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लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने दिया इस्तीफा, वीके सक्सेना बने नए LG

Updated: Thu, 05 Mar 2026 11:23 PM (IST)

लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। उन्होंने 18 जुलाई 2025 को पदभार संभाला था।

लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने पद छोड़ा, वीके सक्सेना लेंगे जगह

लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने पद छोड़ा, वीके सक्सेना लेंगे जगह

HighLights

  1. लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने पद छोड़ा

  2. छठे शेड्यूल और नौकरियों पर हुए थे हिंसक प्रदर्शन

  3. इस्तीफे के पीछे राजनीतिक अटकलें और भविष्य की भूमिका

डिजिटल डेस्क, लद्दाख। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल कवींद्र गुप्ता ने गुरुवार अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके त्यागपत्र से जम्मू कश्मीर और लद्दाख में राजनीतिक अफवाहों ने जोर पकड़ लिया है। कवींद्र गुप्ता ने अपने त्यागपत्र का तत्काल कोई कारण स्पष्ट नहीं किया है और न अधिकारिक तौर पर त्यागपत्र को लेकर कोई बयान जारी किया गया है। वहीं, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का नया LG बनाया गया है।

गौरतलब है कि कवींद्र गुप्ता ने 18 जुलाई 2025 को ही केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के तीसरे उपराज्यपाल के रूप में पद्भार ग्रहण किया था। मूलत: जम्मू के रहने वाले कवींद्र गुप्ता 31 अक्टूबर 2019 से पहले के पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य के उपमुख्यमंत्री और विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं। उस समय लद्दाख भी जम्मू कश्मीर का ही एक हिस्सा था।

क्यों देना पड़ा इस्तीफा?

लद्दाख के उपराज्यपाल के रूप में कवींद्र गुप्ता के आठ महीने के कायकाल के दौरान ही लद्दाख में छठे शेडयूल का लाभ दिए जाने, लद्दाख में विधानसभा के गठन और लद्दाख में जमीन और नौकरियों पर लद्दाखियो के अधिकार को सुनिश्चित बनाने के लिए हिंसक प्रदर्शन हुए।

इन प्रदर्शनों पर काबू पाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था, जिसमें चार लोगो की मौत हो गई थी और लगभग चार दर्जन लोग जख्मी हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न सरकारी इमारतों में तोड़फोड़ करने के लावा भाजपा कार्यालय में आगजनी भी की थी।

इस बीच, सूत्रों ने दावा किया है कि कवींद्र गुप्ता को केंद्र सरकार और भाजपा कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपने जा रही है। इसलिए उन्होंने यह इस्तीफा दिया है, जबकि कुछ अन्य का कहना है कि वह लद्दाख में जारी आंदोलन को समाप्त कराने में सफल नहीं हो पाए हैं। इसलिए उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा है।