जवानी में कश्मीर आए थे खामेनेई, जामिया मस्जिद में नमाज-ए-जुम्मा से पहले खुतबा देने वाले बने थे पहले शिया धर्मगुरू
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने युवावस्था में कश्मीर का दौरा किया था। उनका उद्देश्य शिया-सुन्नी एकता को बढ़ावा देना था।

ईरान-इजरायल युद्ध में मारे गए खामेनेई। फाइल फोटो
नवीन नवाज, श्रीनगर। ईरान के सर्वाेच्च नेता दिवंगत अयातुल्ला खामेनेई, जब युवा थे तो कश्मीर आए थे। वह कश्मीर में सैर सपाटा करने नहीं आए थे, बल्कि शिया-सुन्नी समुदाय में एकता-सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए आए थे। उन्हें लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ लोगों ने उनकी कार को उठा लिया था।
वह कश्मीर की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में नमाज-ए-जुम्मा से पूर्व खुतबा देने वाले पहले शिया धर्मगुरू भी हैं। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा कि वे इस गुजारिश के साथ आए हैं कि मुसलमानों को कुरान को अच्छी तरह समझना चाहिए और उसे अपने जीवन में उतारना चाहिए। उनके भाषण ने जामिया मस्जिद के भीतर का माहौल बदल दिया था।
कश्मीर में शिया समुदाय की आबादी 20 लाख
अयातुल्ला खामेनेई जो उस समय एक युवा मौलवी थे, को उनके पिता रुहल्ला मौसवी खामेनेई, जो उस समय ईरान के सर्वाेच्च नेता थे, ने विश्वभर में शिया-सुन्नी समुदाय के बीच एकजुटता के लिए एक अभियान चलाया था और इसी मिशन के तहत अयातुल्ला खामेनेई कश्मीर आए थे। कश्मीर में मौजूदा समय में शिया समुदाय की आबादी लगभग 20 लाख के आस पास है। कश्मीर घाटी समेत समूचे जम्मू कश्मीर में सुन्नी मुस्लिम ही बहुसंख्यक है।
जीवन के लगभग 78 वसंत पार कर चुके हाजी नजीब हुसैन ने कहा कि मैं उस समय जवान था। जहां तक मुझे याद है चिल्ले कलां बीत चुका था और यहां ठंड समाप्त हो रही थी। यह मार्च 1981 का महीना हो सकता है। वह यहां हजरतबल दरगाह में गए थे। उन्होंने श्रीनगर के जडीबल स्थित इमामबाड़े में भी एक मजलिस को संबोधित किया था। उन्होंने डाउन-टाउन स्थित जामिया मस्जिद में नमाज भी अदा की थी।
कश्मीर की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक जामिया मस्जिद की प्रबंधन समिति अंजुमन ए औकाफ जामिया मस्जिद श्रीनगर के एक पदाधिकारी ने अयातुल्ला खामेनेई के जामिया मस्जिद दौरे की पुष्टि करते हुए बताया कि उस समय दिवंगत फारूक अहमद (मौजूदा मीरवाइज मौलवी उमर फारूक के पिता) कश्मीर के मीरवाइज थे।
मीरवाइज मौलवी फारूक अहमद की अगुवाई में शिया नेता अयातुल्ला खामेनेई ने नमाज ए जुम्मा जामिया मस्जिद में अदा की थी। नमाज से पूर्व उन्होंने मस्जिद में जमा लोगों केा संबोधित भी किया था। बडगाम स्थित आगा सैयद मोहम्मद तकी जिनके कश्मीर में रहने वाले शिया समुदाय का एक बड़ा वर्ग अपना धार्मिक संरक्षक और नेता मानता है ने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई का दौरा संक्षिप्त दौरा था।
वह सिर्फ एक रात यहां कश्मीर में रुके थे। वह निर्धारित समय पर नहीं बल्कि देरी से पहुंचे थे और यहां खबर फैल गई थ्ीा कि उनका दौरा रद हो गया है। उनके स्वागत के लिए श्रीनगर एयरपोर्ट पर वादी से पहुंचे कई लोग अपने घरों में लौट गए थे।
वह श्रीनगर एयरपोर्ट पर उतरे और वहां से बडगाम में आगा सैयद हुसैन साहब के घर पहुंचे जहां उन्होंने मगरिब की नमाज अदा की। इसके बाद वह श्रीनगर चले गए। उनके रात ठहरने का बंदोबस्त श्रीनगर के एक होटल में ही था।अगले दिन शुक्रवार को वह जामिया मस्जिद गए,जहां उन्होंने नमाज ए जुम्मा अदा की,भाषण भी दिया।इसके बाद वह हजरतबल दरगाह गए,जहां उन्होंने असर की नमाज अदा की।
उन्होंने जडीबल इमामबाडा में ळभी एक मजलिस को संबोधित किया था। बडगाम में आगा सैयद हसन साहब ने स्थानीय उलेमाओं के साथ अयातुल्ला खामेनेई की बैठक के दौरान दुभाषिए के तौर पर भी काम किया। बताया जाता है कि वर्ष 2012 में तत्कालीन प्रधानमं9ी मनमोहन सिंह जब तेहरान यात्रा गए थे तो तो अयातुल्ला खामेनेई ने उनके साथ अपनी भारत यात्रा,कश्मीर यात्रा का भी उल्लेख किया था।
