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कश्मीर के कारीगरों को 2 लाख तक का लोन, 7% ब्याज सब्सिडी भी; घर बैठे ऐसे करें ऑनलाइन अप्लाई

Published: Thu, 08 Oct 2026 06:03 PM (IST)

कश्मीर में कारीगरों और बुनकरों को क्रेडिट कार्ड योजना से बड़ी राहत मिली है, जिससे उन्हें अपने पारंपरिक हुनर को ...और पढ़ें

कश्मीर के कारीगरों के लिए क्रेडिट कार्ड योजना बनी सहारा।

कश्मीर के कारीगरों के लिए क्रेडिट कार्ड योजना बनी सहारा।

HighLights

  1. क्रेडिट कार्ड योजना से कश्मीर के कारीगरों को आर्थिक सहारा मिला।

  2. चालू वित्त वर्ष में 1054 कारीगरों को 14.71 करोड़ ऋण मिला।

  3. कारीगरों को पांच साल तक 7% ब्याज सब्सिडी का लाभ।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर की पहचान सिर्फ उसकी खूबसूरत वादियों से नहीं, बल्कि उन हुनरमंद हाथों से भी है जो पीढ़ियों से कालीन, शॉल, लकड़ी की नक्काशी, कढ़ाई और दूसरे पारंपरिक हस्तशिल्प को जीवंत बनाए हुए हैं। अब इन हाथों को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग ने चालू वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों में अपनी प्रमुख क्रेडिट कार्ड योजना के तहत कारीगरों और बुनकरों को 14.71 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया है।

विभाग के अनुसार, इस अवधि में बैंकों को 3885 आवेदन प्रायोजित किए गए, जिनमें से 1332 आवेदन मंजूर हुए और 1054 लाभार्थियों को ऋण वितरित किया जा चुका है।

विभाग का कहना है कि वह लीड बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर इस सुविधा का दायरा लगातार बढ़ा रहा है, ताकि अधिक से अधिक दस्तकार औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ सकें।

 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी

इस योजना का मकसद केवल कर्ज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि कारीगरों को अपने पैरों पर खड़ा करना है। ऋण की मदद से वे स्वतंत्र उत्पादन इकाइयां स्थापित करने, कच्चा माल खरीदने और जरूरी औजार जुटाने में सक्षम हो सकते हैं। श्रम-प्रधान इस क्षेत्र के लिए छोटी-सी पूंजी भी किसी कारीगर के काम को गति देने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

योजना की एक अहम खासियत 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी है, जो पांच वर्षों तक घटती हुई दर पर उपलब्ध कराई जाती है। इसका उद्देश्य नई इकाइयों को शुरुआती दौर में आर्थिक राहत देना और धीरे-धीरे उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

10 हजार से अधिक कारीगरों को मिल चुका 151 करोड़ का ऋण

विभाग के मुताबिक, वर्ष 2020 में ऋण सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई थी। यह बदलाव वूल प्रोसेसिंग, हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट्स पॉलिसी के अनुरूप किया गया। इसके बाद से 10 हजार से अधिक कारीगरों को कुल 151 करोड़ रुपये के ऋण मिल चुके हैं। इसी अवधि में विभाग ने इन इकाई संचालकों को राहत देने के लिए 19 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी भी प्रदान की है।

दरअसल, योजना के पीछे एक बड़ी चुनौती का समाधान छिपा है। जैसे कि कारीगरों की अनौपचारिक और महंगे कर्ज पर निर्भरता कम करना। आसान और समय पर संस्थागत ऋण मिलने से वे अपने उत्पादन का विस्तार कर सकते हैं, नई पीढ़ी को पारंपरिक हुनर से जोड़ सकते हैं और कश्मीर की हस्तशिल्प एवं हथकरघा अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकते हैं।

ऑनलाइन आवेदन के लिए सिंगल विंडो पोर्टल पर करें पंजीकरणऑ

कारीगर और बुनकर इस योजना का लाभ लेने के लिए singlewindow.jk.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जिलों में स्थापित कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) भी पंजीकरण में सहायता के लिए उपलब्ध हैं।

विभाग ने वित्तीय संस्थानों और लीड बैंकों से अपील की है कि वे हस्तशिल्प क्षेत्र को प्राथमिकता वाले ऋण क्षेत्र के रूप में देखते हुए कारीगरों को समय पर और बिना अनावश्यक परेशानी के ऋण उपलब्ध कराएं। क्योंकि कश्मीर के इन हुनरमंद हाथों को अगर पूंजी का सहारा मिल जाए, तो सदियों पुराना हुनर सिर्फ जिंदा ही नहीं रहेगा बल्कि वह नई पीढ़ी के साथ नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।