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    कश्मीर के बाद पुंछ की बारी, सीमावर्ती जिलों को रेल से जोड़ने की बड़ी तैयारी, 190 KM नई रेललाइन का फाइनल सर्वे पूरा

    By Naveen Sharma Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Sat, 08 Aug 2026 04:16 PM (IST)

    जम्मू-कश्मीर में जम्मू/रियासी से पुंछ तक 190 किलोमीटर लंबी नई रेललाइन का फाइनल लोकेशन सर्वे पूरा हो गया है, जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अब ...और पढ़ें

    जम्मू-कश्मीर में पुंछ तक नई रेललाइन का फाइनल सर्वे पूरा, सीमावर्ती क्षेत्रों को मिलेगा मजबूत रेल संपर्क।

    जम्मू-कश्मीर में पुंछ तक नई रेललाइन का फाइनल सर्वे पूरा, सीमावर्ती क्षेत्रों को मिलेगा मजबूत रेल संपर्क

    HighLights

    1. जम्मू/रियासी से पुंछ तक 190 किमी रेललाइन सर्वे पूरा।

    2. केंद्रीय रेल मंत्री ने सीमावर्ती रेल संपर्क की पुष्टि की।

    3. USBRL ने कश्मीर को देश से जोड़कर आर्थिक लाभ दिया।

    राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में रेल संपर्क के विस्तार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जम्मू/रियासी से पुंछ तक प्रस्तावित 190 किलोमीटर लंबी नई रेललाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) पूरा कर लिया गया है और अब इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी।

    केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी को नई मजबूती देगी।

    रेल मंत्री ने कहा कि उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना के पूरा होने से कश्मीर घाटी को देश के अन्य हिस्सों से हर मौसम में विश्वसनीय और तेज रेल संपर्क मिला है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिला है, बल्कि स्थानीय किसानों, कारीगरों और लघु एवं मध्यम उद्यमों को भी बड़े राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिली है। अब जम्मू-कश्मीर के सेब, सूखे मेवे, पश्मीना शॉल और हस्तशिल्प जैसे उत्पाद देश के विभिन्न हिस्सों तक आसानी से पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

    320 से अधिक पुलों और सुरंगों का निर्माण किया

    272 किलोमीटर लंबी यूएसबीआरएल परियोजना देश की सबसे चुनौतीपूर्ण रेल परियोजनाओं में शामिल रही है। हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच तैयार इस परियोजना में रियासी जिले में चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बनाया गया है। इसके अलावा अंजी खड्ड पर भारतीय रेलवे का पहला केबल-स्टे पुल भी तैयार किया गया है। इस परियोजना में 320 से अधिक पुलों और सुरंगों का निर्माण किया गया है, जिससे क्षेत्र में बेहतर आवागमन की सुविधा उपलब्ध हुई है।

    रेल मंत्री ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में माल ढुलाई और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सांबा जिले में गति शक्ति मल्टी-माडल कार्गो टर्मिनल (जीसीटी) शुरू किया गया है। इसके साथ ही कठुआ, अनंतनाग और जम्मू में जीसीटी स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इन टर्मिनलों से क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा और उद्योगों को तेज व किफायती परिवहन सुविधा मिलेगी।

    खबरें और भी

    जम्मू-कश्मीर में रेल ढांचे के विस्तार के लिए अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी काम आगे बढ़ रहा है। जालंधर कैंट-जम्मू तवी के बीच 216 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन की डीपीआर तैयार हो चुकी है और परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है। वहीं जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच 78 किलोमीटर अतिरिक्त लाइन और जम्मू/रियासी-पुंछ नई रेललाइन के लिए एफएलएस को मंजूरी दी जा चुकी है।

    रोजगार व व्यापार के नए अवसर पैदा हो रहे

    रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण के लिए अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत जम्मू तवी, बडगाम, शहीद कैप्टन तुषार महाजन और श्री माता वैष्णो देवी कटरा स्टेशनों का विकास किया जा रहा है। यात्रियों की सुविधा, बेहतर पहुंच मार्ग, आधुनिक प्रतीक्षालय, फुट ओवरब्रिज, एस्केलेटर और स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए कियोस्क जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

    रेल मंत्रालय के अनुसार जम्मू-कश्मीर में मौजूदा ब्रॉड गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आधुनिक सिग्नल प्रणाली और कवच तकनीक को भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।

    अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को रेल नेटवर्क से जोड़ना केवल परिवहन सुविधा का विस्तार नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। बेहतर रेल संपर्क से घाटी के उत्पादों को नए बाजार मिल रहे हैं और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार व व्यापार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं