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जम्मू-कश्मीर फिल्म फेस्टिवल का दूसरा दिन, श्रीराम राघवन की मास्टरक्लास ने मन मोहा; बॉलीवुड सितारों ने जमाया रंग

By Naveen NawazEdited By: Dallu Slathia
Published: Tue, 08 Sep 2026 07:06 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन श्रीराम राघवन की मास्टरक्लास और 70 फिल्मों की स्क्रीनिंग मुख्य आकर्षण ...और पढ़ें

कश्मीर के पहले फिल्म फेस्टिवल में दिखा सिनेमा का रंग। फोटो- साहिल मीर/जागरण

कश्मीर के पहले फिल्म फेस्टिवल में दिखा सिनेमा का रंग फोटो- साहिल मीर/जागरण

HighLights

  1. श्रीराम राघवन की मास्टरक्लास और उनकी फिल्म 'इक्कीस' की स्क्रीनिंग।

  2. महोत्सव में 70 फिल्मों, शॉर्ट फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन।

  3. डल झील में फ्लोटिंग सिनेमा में क्लासिक फिल्म 'आरजू' का प्रदर्शन।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में पहली बार आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हिंदी सिनेमा के दिग्गजों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। विदु विनोद चोपड़ा, श्रीराम राघवन, इम्तियाज अली, पंकज त्रिपाठी, रमेश सिप्पी सहित फिल्म जगत की कई नामचीन हस्तियों ने इस आयोजन में शिरकत की। चार दिवसीय फिल्म महोत्सव का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में सिनेमा की संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गत सोमवार शाम भव्य समारोह में फेस्टिवल का उद्घाटन किया। इसके बाद मंगलवार को दूसरे दिन फिल्मों की स्क्रीनिंग के साथ कई मास्टरक्लास और संवाद सत्र आयोजित किए गए। श्रीराम राघवन की मास्टरक्लास दर्शकों के लिए खास आकर्षण रही। 'एक हसीना थी', 'बदलापुर' और 'अंधाधुन' जैसी चर्चित फिल्मों के निर्देशक राघवन ने निर्देशन और पटकथा लेखन से जुड़े अनुभव साझा किए। उनकी आगामी फिल्म 'इक्कीस' की स्क्रीनिंग भी महोत्सव में की गई।

विदु विनोद चोपड़ा से लेकर पंकज त्रिपाठी तक जुटे सितारे

फेस्टिवल में निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी, अभिनेता पंकज त्रिपाठी, फातिमा सना शेख, ताहा शाह बदुश्शा समेत कई कलाकारों की मौजूदगी ने आयोजन की रौनक बढ़ाई। फिल्मकार विदु विनोद चोपड़ा के लिए कश्मीर से जुड़ा यह आयोजन खास रहा। कश्मीर से उनके पुराने रिश्ते और यहां की लोकेशन से हिंदी सिनेमा का गहरा नाता रहा है।

फिल्मकार इम्तियाज अली भी कश्मीर में सिनेमा की संभावनाओं को लेकर लगातार अपनी बात रखते रहे हैं। उनका मानना रहा है कि घाटी में प्रतिभा और खूबसूरत लोकेशन दोनों मौजूद हैं। ऐसे में इस तरह के फिल्म महोत्सव स्थानीय युवाओं को बड़े मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

संगीत जगत से सुनीधि चौहान, उषा उत्थुप और पलक मुच्छल भी फेस्टिवल का हिस्सा बनीं। वहीं प्रसिद्ध सिनेमैटोग्राफर संतोष सिवन, साउंड डिजाइनर बायलोन फोन्सेका और सिनेमैटोग्राफर अनिल मेहता ने भी आयोजन में शिरकत की।

70 फिल्मों की स्क्रीनिंग ने बांधा समां

फेस्टिवल के दूसरे दिन करीब 70 फिल्मों, शार्ट फिल्मों और डाक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग हुई। आइनाक्स में 'लैला मजनू' और 'मिर्जापुर: द मूवी' दिखाई गईं। श्रीराम राघवन की 'इक्कीस' की स्क्रीनिंग आइनााक्स के साथ जम्मू के वेव्स सिनेमा में भी हुई।

अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में मलेशिया की 'द लास्ट राइट्स', ईरान की 'सडन राइज' और 'एंड द गॉड हू इज क्लोज', पुर्तगाल की 'स्टोन बीच', इंडोनेशिया की 'तुगास सेदिह यांग पांजांग' और 'द स्टिफ फिंगर्स', मेक्सिको की 'सोमोस अगुआ', जॉर्डन की 'सिमसिम', क्यूबा की 'टू द वेस्ट, इन जापाटा' और बेल्जियम की 'फैमिली पार्टी' जैसी फिल्मों ने दर्शकों को विश्व सिनेमा से रूबरू कराया।

डल झील में दिखेगी 'आरजू'

फेस्टिवल का सबसे खास आकर्षण डल झील में आयोजित फ्लोटिंग सिनेमा रहा। यहां राजेंद्र कुमार, साधना और फिरोज खान अभिनीत 1965 की चर्चित फिल्म 'आरजू' की स्क्रीनिंग की गई। इसके अलावा आइनाक्स में भी इसकी स्क्रीनिंग हुई कश्मीर में फिल्माए गए इस रोमांटिक ड्रामा के गीत आज भी लोकप्रिय हैं। 'छलके तेरी आंखों से', 'अजी रूठ कर', 'बेदर्दी बालमा' और 'ऐ नरगिस-ए-मस्ताना' जैसे गीतों ने उस दौर में फिल्म को खास पहचान दिलाई थी।

इस फिल्म की फ्लोटिंग सिनेमा में स्क्रीनिंग ने कश्मीर और हिंदी सिनेमा के दशकों पुराने रिश्ते को एक बार फिर दर्शकों के सामने जीवंत कर दिया। फेस्टिवल के जरिए जम्मू-कश्मीर को एक बार फिर फिल्म निर्माण और फिल्म पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश भी दिखाई दे रही है।