'दम है तो संसद से इस्तीफा देकर दोबारा लड़ें चुनाव', आगा रुहुल्ला पर भड़के फारूक अब्दुल्ला, 1984 की घटना की दिलाई याद
नेशनल कान्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने बागी सांसद आगा सैयद रुहुल्ला को चुनौती दी कि अगर वे अपनी लोकप्रियता पर जीते हैं तो संसद से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ें।

आगा रुहुल्ला पर भड़के फारूक अब्दुल्ला। फाइल फोटो
HighLights
फारूक अब्दुल्ला ने रुहुल्ला को इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने की चुनौती दी।
अब्दुल्ला ने रुहुल्ला की पार्टी नीतियों पर सवाल उठाने की आलोचना की।
उन्होंने नेशनल कान्फ्रेंस के इतिहास और पार्टी निष्ठा पर जोर दिया।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस में लगातार बढ़ रही अंतर्कलह के बीच सोमवार को पार्टी प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने बागी संसद आगा सैयद रुहुल्ला को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि अगर जीत अपनी लोकप्रियता के दम पर हुई है तो सांसद से इस्तीफा देकर दोबारा जनता के बीच जाएं और देख लें कि उनके साथ कौन खड़ा होता है।
अब्दुल्ला ने कहा कि आगा रुहुल्ला आए दिन भड़काऊ बयानबाजी करते हैं, पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए खुद को संगठन से बड़ा साबित करने का प्रयास कर रहे हैं।
इस्तीफा दें और जनता के बीच जाएं
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि आगा रुहुल्ला दावा करते हैं कि वह अपने दम पर जीते हैं और उन्होंने पार्टी के कई नेताओं की चुनावी जीत को सुनिश्चित बनाया है। अगर ऐसा है तो बताएं कि क्या रुहुल्ला ने नेशनल कान्फ्रेंस के बिना चुनाव जीता है? क्या कभी जीते हैं?
उन्होंने कहा कि यदि रुहुल्ला को लगता है कि लोकसभा चुनाव उन्होंने अपने व्यक्तिगत वोटबैंक के दम पर जीता था, तो उन्हें संसद से इस्तीफा देकर जनता की अदालत में दोबारा जाना चाहिए।
अब्दुल्ला ने कहा कि अगर वह अपने वोट से जीते हैं तो आज भी मैं उनसे कहता हूं कि इस्तीफा दें। संसद से इस्तीफा दें और जनता के पास जाएं। फिर देखते हैं उन्हें कौन वोट देता है। यह बात उनके सामने भी साफ हो जाएगी और पूरी दुनिया के सामने भी।
उन्हें कौन रोक रहा, हमने तो नहीं रोका?
अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर रुहुल्लाह की मुखर राजनीति पर भी फारूक अब्दुल्ला ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि रुहुल्ला को भरोसा है कि अनुच्छेद 370 वापस लाया जा सकता है, तो वे संसद सदस्य हैं और उन्हें इसके लिए आगे बढ़कर प्रयास करना चाहिए। उन्हें कौन रोक रहा है? हमने तो उन्हें नहीं रोका।
फारूक अब्दुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए रुहुल्ला को 1984 की घटनाओं की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उन्हें देखना चाहिए कि 1984 में मेरी सरकार गिराने वाले उन 14 विधायकों का क्या हुआ।
आज उनका कहीं कोई निशान नहीं है। नेशनल कान्फ्रेंस केवल सत्ता और पद की राजनीति से खड़ी नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे उन कार्यकर्ताओं और नेताओं का संघर्ष और बलिदान है जिन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों में पार्टी को मजबूत किया।
रुहुल्ला में हिम्मत ही नहीं
यह पूछे जाने पर कि क्या रुहुल्ला 1984 जैसी कोई राजनीतिक बगावत दोहरा सकते हैं, अब्दुल्ला ने इसे लगभग खारिज करते हुए कहा कि रुहुल्ला ऐसा बिल्कुल नहीं कर सकते। उनमें इसके लिए हिम्मत ही नहीं है।
इसके बाद उन्होंने धार्मिक संदर्भ देते हुए रुहुल्ला को आत्ममंथन की सलाह दी। अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें कुरान में अपने लिए सही रास्ता तलाशना चाहिए और आरोप लगाया कि वह फिलहाल “गलत रास्ते” पर हैं।
पार्टी के प्रति निष्ठा पर जोर देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने नेशनल कान्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता मौलाना मसूदी की पुरानी राजनीतिक मिसाल का हवाला दिया। उनका संकेत था कि पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्ति विशेष से ऊपर होती है कि पार्टी जिस उम्मीदवार को मैदान में उतारे, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उसके पीछे खड़ा होना चाहिए।
