अमरनाथ यात्रा 2026: NH-44 पर चप्पे-चप्पे की तलाशी, CRPF-सेना का 'रोड ओपनिंग पार्टी' ऑपरेशन से हर इंच पर नजर
अमरनाथ यात्रा 2026 की सुरक्षा के लिए NH-44 पर CRPF, सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा 'रोड ओपनिंग पार्टी' (ROP) ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। ...और पढ़ें

जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर एक पल भी नहीं टूटती निगरानी।
HighLights
NH-44 पर 'रोड ओपनिंग पार्टी' ऑपरेशन तेज।
CRPF, सेना, पुलिस मिलकर कर रहे तलाशी अभियान।
स्निफर डॉग्स और BDDS दस्ते हाईवे खंगाल रहे।
जागरण संवाददाता, श्रीनगर। 3 जुलाई से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा से पहले ही NH-44 पर हर सुबह जवानों, स्निफर डॉग्स और बम निरोधक दस्तों का एक ऐसा सर्च ऑपरेशन चलता है, जिसमें हाईवे का एक-एक इंच खंगाला जाता है। लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए CRPF, सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस अब 'रोड ओपनिंग पार्टी' मिशन में दिन-रात जुटी है।
28 अगस्त 2026 तक चलने वाली श्री अमरनाथ यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फोर्स (CRPF) ने सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर नेशनल हाईवे-44 पर ऑपरेशन तेज कर दिए हैं। मकसद साफ है— कोई भी चूक नहीं, कोई भी अप्रिय घटना नहीं।
कैसे काम करती है ROP?
- सुबह-सवेरे ऑपरेशन: काफिला निकलने से कई घंटे पहले ही ROP टीमें कैंप से निकल पड़ती हैं।
- 4-5 किमी का जिम्मा: हर टीम को कम से कम 4-5 किलोमीटर हाईवे और आसपास के इलाकों की बारीकी से तलाशी करनी होती है।
- डॉग + BDDS स्क्वाड: बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड और खोजी कुत्तों के साथ हाईवे का चप्पा-चप्पा चेक किया जाता है।
- संदिग्ध वस्तु = तुरंत नष्ट: SOP के तहत कोई भी संदिग्ध चीज मिलते ही उसे वहीं नष्ट कर दिया जाता है।
जमीन पर उतरे बड़े अफसर, पिकेट से लेकर मोर्चों तक घेराबंदी
सुरक्षा सिर्फ जवानों के भरोसे नहीं। CRPF के कमांडिंग ऑफिसर से लेकर DIG और IG रैंक के सीनियर अधिकारी खुद ग्राउंड पर हैं। कई बार तो बड़े अफसर भी सड़क साफ करने के अभियान में शामिल होते हैं। अमरनाथ यात्रा को सफल बनाने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा का प्लान तैयार किया गया है।
- पिकेट तैनाती: SOP के तहत हाईवे पर तय जगहों पर सुरक्षा चौकियां 24x7 एक्टिव।
- साइड रोड सील: NH-44 से जुड़ने वाली हर छोटी सड़क पर 'मोर्चे' लगाकर संदिग्ध गाड़ियों की एंट्री रोकी जा रही है।
- टीम दर टीम हैंडओवर: एक ROP टीम अपना इलाका क्लियर करने के बाद अगली टीम को चार्ज देती है, ताकि जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर एक पल के लिए भी निगरानी न टूटे।
90वीं बटालियन कमांडेंट केपी सिंह बोले- 'हर इंच पर नजर'
90वीं बटालियन के कमांडेंट के.पी. सिंह के मुताबिक, ROP रोज तैनात की जाती है। "हमारे जवान काफिला शुरू होने से पहले ही सुबह हाईवे पर निकल जाते हैं। BDDS के स्पेशल उपकरण और खोजी दस्तों से हाईवे का हर इंच खंगाला जाता है। हमारा मकसद है- अमरनाथ यात्रा हो या सुरक्षा बलों का मूवमेंट, हर काफिला सुरक्षित पहुंचे।"
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इस साल यात्रा 58 दिनों तक चलेगी। CRPF, सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियां बहुस्तरीय घेरे में काम कर रही हैं। NH-44 और उसके शुरुआती हिस्सों पर ROP का ये उन्नत सुरक्षा घेरा तीर्थयात्रियों और सुरक्षा काफिलों के चलने से पहले हर दिन और मजबूत किया जाएगा। लगातार सड़क सुरक्षा, गहन निगरानी और समन्वित तैनाती से लाखों श्रद्धालुओं को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और परेशानी मुक्त यात्रा का माहौल देने की तैयारी पूरी है।