अब कुत्ते भी डराने लगे, राजौरी जिले के कोटरंका में पागल कुत्तों के डर से 8 पंचायतों में स्कूल बंद, 7 को काटा
राजौरी के कोटरंका क्षेत्र में आवारा कुत्तों के हमले से सात लोग घायल होने के बाद दहशत फैल गई है। एहतियाती तौर पर शिक्षा विभाग ने आठ पंचायतों के स्कूलों ...और पढ़ें

कुत्ते के काटने पर तुरंत करवाएं इलाज, न करें लापरवाही।
HighLights
कोटरंका में आवारा कुत्तों के हमले से सात घायल।
आठ पंचायतों के स्कूल एहतियाती तौर पर बंद।
प्रशासन से कुत्तों को पकड़ने की मांग तेज।
जागरण संवाददाता, राजौरी। कोटरंका क्षेत्र में आवारा और संदिग्ध रूप से पागल कुत्तों के घूमने तथा लोगों को काटने की घटनाओं के बाद दहशत का माहौल बना हुआ है। क्षेत्र में पिछले दिनों कुत्तों के हमले में सात लोगों के घायल होने की सूचना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने एहतियाती कदम उठाते हुए आठ पंचायतों के अंतर्गत आने वाले स्कूलों को सोमवार को बंद रखने के निर्देश जारी किए। प्रशासन और शिक्षा विभाग के इस निर्णय के बाद संबंधित क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, कोटरंका शिक्षा क्षेत्र में आवारा और संदिग्ध रूप से आक्रामक कुत्तों के घूमने तथा लोगों पर हमले की शिकायतें सामने आई थीं। बताया गया कि इन कुत्तों ने सात लोगों को काटा है। इसके अलावा कई आवारा कुत्तों पर भी हमले किए जाने की बात सामने आई है। स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सोमवार को स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति नहीं बुलाने का निर्णय लिया।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, कोटरंका शिक्षा क्षेत्र के आठ पंचायत क्षेत्रों के स्कूलों को सोमवार को बंद रखा गया इनमें जगलानू, मोहरा-ए, मोहरा-बी, हुब्बी, लारकोटी, कंडी अपर, कंडी लोअर और खड़ियान पंचायतें शामिल हैं। संबंधित क्षेत्रों के स्कूल प्रमुखों और शिक्षकों को निर्देश दिया गया कि वे अभिभावकों और विद्यार्थियों तक विभाग के आदेश की जानकारी पहुंचाएं तथा बच्चों को स्कूल आने से रोकते हुए उन्हें घर पर सुरक्षित रहने की सलाह दी गई थी।
बच्चों को बाहर न भेजें, खतरा अभी टला नहीं
जोनल एजुकेशन प्लानिंग ऑफिसर (जेईपीओ) कोटरंका की ओर से जारी निर्देश में स्कूल प्रमुखों और शिक्षकों से कहा गया कि वे आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। विभाग ने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति में विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में जब तक क्षेत्र में आवारा कुत्तों से उत्पन्न खतरे की स्थिति नियंत्रित नहीं होती, तब तक बच्चों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।
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स्कूल बंद रखने का फैसला सामने आने के बाद अभिभावकों ने भी राहत की सांस ली। कई अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के स्कूल आने-जाने के दौरान उन्हें आवारा कुत्तों के हमले का डर बना हुआ था। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बच्चे अक्सर पैदल स्कूल पहुंचते हैं, ऐसे में आक्रामक कुत्तों की मौजूदगी उनके लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में घूम रहे आवारा और संदिग्ध कुत्तों को पकड़ने के लिए तत्काल अभियान चलाया जाए। लोगों का कहना है कि केवल स्कूल बंद रखने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। संबंधित विभागों को मिलकर कुत्तों को पकड़ने, उनकी जांच करवाने तथा आवश्यक कार्रवाई करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए, ताकि लोगों में व्याप्त भय समाप्त हो सके।
काटने पर तुरंत करवाएं इलाज, न करें लापरवाही
लोगों ने यह भी मांग की है कि जिन लोगों को कुत्तों ने काटा है, उन्हें समय पर उपचार और आवश्यक चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध करवाई जाए। कुत्ते के काटने के बाद रेबीज जैसी गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है, इसलिए प्रभावित लोगों को चिकित्सकीय जांच और आवश्यक उपचार उपलब्ध करवाना जरूरी है।
शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रशासन को विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने और स्थिति पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं, स्थानीय निवासियों से भी अपील की गई है कि वे बच्चों को आवारा कुत्तों के पास जाने से रोकें और घर से बाहर निकलते समय विशेष सावधानी बरतें।
फिलहाल आठ पंचायतों में स्कूल बंद रखने का निर्णय एहतियाती कदम के तौर पर लिया गया है।
स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई है कि संबंधित विभाग जल्द अभियान चलाकर आवारा और आक्रामक कुत्तों की समस्या पर नियंत्रण पाएंगे, ताकि बच्चों और आम लोगों में सुरक्षा की भावना बहाल हो सके।