जम्मू: इस 200 साल पुराने मंदिर में विराजते अभिमुक्तेश्वर महादेव, उत्तर की ओर बहती देविका, 880 किलो का घंटा है खास
जम्मू के उत्तरवहनी में स्थित अभिमुक्तेश्वर महादेव मंदिर आस्था, स्थापत्य कला का अद्भुत संगम है, जहाँ देविका नदी उत्तर दिशा में बहती है। महाराजा गुलाब स ...और पढ़ें

अभिमुक्तेश्वर महादेव मंदिर।
HighLights
जम्मू के उत्तरवहनी में स्थित प्राचीन अभिमुक्तेश्वर महादेव मंदिर।
देविका नदी का उत्तर दिशा में बहना, बढ़ाता है धार्मिक महत्व।
880 किलो का घंटा और महाराजाओं का ऐतिहासिक योगदान।
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू से करीब 35 किलोमीटर और पुरमंडल से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित उत्तरवहनी का अभिमुक्तेश्वर महादेव मंदिर आस्था, इतिहास और स्थापत्य कला का अद्भुत संगम है। देविका नदी जब इस स्थान पर पहुंचकर उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित होती है, तो यह पावन भूमि श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व धारण कर लेती है। यही कारण है कि इसे प्राचीन काल से ही अत्यंत पवित्र क्षेत्र माना जाता रहा है।
करीब दो शताब्दी पुराने इस मंदिर के निर्माण की शुरुआत महाराजा गुलाब सिंह के शासनकाल में हुई थी और इसका निर्माण कार्य महाराजा रणवीर सिंह के शासनकाल में पूर्ण हुआ।
महाराजा गुलाब सिंह ने देखा था उत्तर काशी का सपना
बताया जाता है कि महाराजा गुलाब सिंह उत्तरवहनी को काशी की तर्ज पर एक प्रमुख धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करना चाहते थे। इसी उद्देश्य से उन्होंने इस क्षेत्र में अनेक मंदिरों का निर्माण करवाया। हरे-भरे विशाल परिसर में स्थित अभिमुक्तेश्वर मंदिर आज भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
विशाल वृक्षों की छांव, शांत वातावरण और मंदिर परिसर की आध्यात्मिक अनुभूति यहां आने वाले हर व्यक्ति को कुछ देर ठहरने और आत्मिक शांति महसूस करने के लिए प्रेरित करती है।
880 KG का प्राचीन घंटा है खास पहचान
स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना अभिमुक्तेश्वर मंदिर की स्थापत्य शैली देखते ही बनती है। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर की गई बारीक नक्काशी तत्कालीन कारीगरों की अद्भुत कला-कुशलता की कहानी कहती है। मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थापित विशाल प्राचीन घंटा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। मान्यता है कि इसका वजन करीब 22 मन, यानी लगभग 880 किलोग्राम है।
मंदिर के सामने भगवान शिव की सवारी नंदी की विशाल प्रतिमा विराजमान है। नंदी की शांत और श्रद्धामयी मुद्रा ऐसी प्रतीत होती है, मानो वे सदैव अपने आराध्य भगवान शिव के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हों।
अमावस्या पर उमड़ता है आस्था का सैलाब
पंडित मिंटू शर्मा बताते हैं कि अभिमुक्तेश्वर मंदिर का धार्मिक महत्व अमावस्या के अवसर पर और बढ़ जाता है। इस दिन दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तरवहनी पहुंचते हैं और देविका नदी में पवित्र स्नान करने के बाद भगवान शिव के दर्शन एवं पूजा-अर्चना करते हैं।
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सावन के पवित्र महीने में तो यहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। सोमवार, शनिवार तथा विभिन्न पर्व-त्योहारों पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि अभिमुक्तेश्वर महादेव के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना और मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होती है।
सावन में विशेष आकर्षण बनता अभिमुक्तेश्वर धाम
सेवक शिव खजूरिया ने बताया कि अमावस्या के दिन दूर-दूर से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सावन में मंदिर में पूरे महीने भक्तों की विशेष आस्था देखने को मिलती है। जो भी व्यक्ति सच्चे मन से यहां आकर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करता है। उसकी मनोकामना पूर्ण होती है।
अभिमुक्तेश्वर महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि जम्मू की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा, इतिहास और संस्कृति की जीवंत धरोहर है। जम्मू-कश्मीर धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा मंदिर के प्रबंधन एवं संरक्षण से यह प्राचीन धरोहर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।