उच्च स्तरीय समिति के सामने उठा 1947 में गुलाम जम्मू-कश्मीर से हिंदू और सिखों के विस्थापन का मुद्दा, पुनर्वास की मांग की
पीओजेके विस्थापित सेवा समिति ने 1947 में पीओजेके से हिंदू-सिखों के बड़े पैमाने पर विस्थापन का मुद्दा उच्च स्तरीय समिति के समक्ष उठाया।
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1947 में गुलाम जम्मू-कश्मीर से हिंदू और सिखों के विस्थापन का मुद्दा। फाइल फोटो
HighLights
पीओजेके से 1947 में हिंदू-सिखों का बड़ा विस्थापन।
पाकिस्तान समर्थित हमलों से व्यापक हत्याएं और लूटपाट हुई।
विस्थापितों के पुनर्वास और अधिकारों पर विचार की मांग।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जनसांख्यिकी बदलाव पर जम्मू के दौरे पर आई टीम के समक्ष 1947 में पीओजेके से हिंदू-सिखों के विस्थापन का मुद्दा भी उठा।पीओजेके विस्थापित सेवा समिति ने 1947 में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से हिंदू और सिख समुदाय के बड़े पैमाने पर हुए विस्थापन को लेकर उच्च स्तरीय समिति के समक्ष एक ज्ञापन प्रस्तुत किया है। समिति ने इसे जम्मू-कश्मीर के इतिहास में विस्थापन के एक महत्वपूर्ण और लंबे समय से उपेक्षित अध्याय के रूप में रेखांकित किया।
समिति के सदस्यों ने कहा कि, 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान समर्थित कबायली लड़ाकों के साथ हुए हमले के दौरान जम्मू-कश्मीर के मुजफ्फराबाद क्षेत्र से हिंसा शुरू हुई, जो बाद में मीरपुर, कोटली, पुंछ, पलांदरी और आसपास के क्षेत्रों तक फैल गई। समिति का आरोप है कि इस दौरान व्यापक हत्याएं, संपत्ति की लूट और तबाही के साथ हिंदू एवं सिख आबादी का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ।
समिति ने अपने ज्ञापन में कहा है कि हिंसा के दौरान महिलाओं और बच्चों समेत नागरिकों के खिलाफ गंभीर अत्याचार हुए।कई हिंदू और सिख परिवारों को अपने घर, जमीन, कारोबार और अन्य संपत्तियां छोड़कर पलायन करना पड़ा। कई परिवार बिछड़ गए और बड़ी संख्या में लोग मारे गए अथवा लापता हुए।
इस विस्थापन के कारण पीओजेके के जनसांख्यिकीय स्वरूप में व्यापक बदलाव आया। समिति ने दावा किया कि करीब 2.5 से 3 लाख हिंदू और सिखों के विस्थापन से क्षेत्र की आबादी का स्वरूप बदल गया। समिति ने यह भी कहा कि 1965 और 1971 के दौरान देवा, बाटाला, छंब आदि क्षेत्रों से भी 10 हजार से अधिक परिवारों के विस्थापन का उल्लेख मिलता है।
समिति ने मुजफ्फराबाद में मंगला बांध के निर्माण के बाद हुए भौगोलिक एवं जनसांख्यिकीय बदलावों का भी उल्लेख किया है। उसका कहना है कि इन परिस्थितियों ने विस्थापित समुदाय के लिए अपनी मूल भूमि पर लौटने और पुनर्वास की संभावनाओं को और कठिन बना दिया है।
ज्ञापन में विस्थापित परिवारों के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रोविंशियल रिहैबिलिटेशन ऑर्गनाइजेशन के रिकॉर्ड में 31,619 विस्थापित परिवार दर्ज थे। इनमें करीब 26,319 परिवार जम्मू-कश्मीर में बसाए गए, जबकि लगभग 5,300 परिवारों के जम्मू-कश्मीर से बाहर बसने का रिकॉर्ड दर्ज है।
पीओजेके विस्थापित सेवा समिति ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, उनके अधिकारों और ऐतिहासिक विस्थापन के दस्तावेजीकरण पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है।

