'मुस्लिम धार्मिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं', वक्फ बोर्ड के खुतबा पहल पर उमर अब्दुल्ला का BJP पर हमला
जम्मू-कश्मीर में वक्फ बोर्ड द्वारा मस्जिदों में जुमे के खुतबों के विषय तय करने की पहल पर विवाद खड़ा हो ...और पढ़ें

वक्फ बोर्ड की खुतबा पहल पर उमर अब्दुल्ला ने आपत्ति जताई।
HighLights
वक्फ बोर्ड की खुतबा पहल पर उमर अब्दुल्ला ने आपत्ति जताई
इसे मुस्लिम धार्मिक मामलों में भाजपा का हस्तक्षेप बताया
वक्फ बोर्ड ने नशामुक्ति, शांति संदेश का तर्क दिया
डिजिटल डेस्क, जम्मू। जम्मू-कश्मीर की मस्जिदों में शुक्रवार को जुमे के खुतबों के विषय पहले से तय करने की वक्फ बोर्ड की पहल पर सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस योजना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे मुस्लिम धार्मिक मामलों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सीधा और अस्वीकार्य हस्तक्षेप करार दिया है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर तीखा हमला बोलते हुए वक्फ बोर्ड की भाजपा-नियुक्त अध्यक्ष को इस प्रयास को तुरंत रोकने की नसीहत दी है।
क्या बोले उमर अब्दुल्ला
उमर अब्दुल्ला ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए बोला- यह मुसलमानों के धार्मिक मामलों में दखल देने की बीजेपी की एक अस्वीकार्य कोशिश है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बीजेपी द्वारा नियुक्त चेयरपर्सन को अपने आकाओं को खुश करने की इस गलत कोशिश को तुरंत रोकना चाहिए।
This is an unacceptable attempt by the BJP to interfere in the religious affairs of Muslims and will not be accepted under any circumstances. The BJP appointed Chairperson must immediately halt this misplaced attempt to please her masters.
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) October 13, 2026
क्या है वक्फ बोर्ड की विवादित पहल, जिस पर मचा है बवाल?
बता दें कि, जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड ने प्रस्ताव रखा था कि एक धार्मिक विद्वानों की समिति बनाई जाएगी जो मस्जिदों में इमामों द्वारा दिए जाने वाले जुमे के खुतबों के सामाजिक व नैतिक विषय तय करेगी।
वक्फ बोर्ड का तर्क था कि इससे नशामुक्ति, सामाजिक बुराइयों को रोकने और शांति का संदेश देने में मदद मिलेगी, जबकि घाटी के राजनीतिक दल और धार्मिक नेता इसे धार्मिक उपदेशकों की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने की कोशिश मान रहे हैं।
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष क्या बोले?
वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष डा सैयद दरख्शां अंद्राबी ने कहा है कि खुतबे आस्था, समाज और क्षेत्र के भविष्य से जुड़े होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं से संबंधित पारंपरिक उपदेशों में बदलाव नहीं किया जाएगा।
