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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 29, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भले ही बूढ़े हो गए हों, लेकिन आज जब समाज पीड़ा में है, तो हम चुप कैसे रह सकते हैं, बाढ़ पीड़ितों के लिए आगे आए वृद्ध

Published: Fri, 29 Aug 2025 04:22 PM (IST)

जम्मू के वृद्धाश्रम के वृद्धों ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 500 भोजन पैकेट दान करने का संकल्प लिया ...और पढ़ें

भले ही वे बूढ़े हो गए हों, लेकिन उनकी आत्मा हमेशा जवान है और पीड़ितों की मदद करना चाहते हैं।
भले ही वे बूढ़े हो गए हों, लेकिन उनकी आत्मा हमेशा जवान है और पीड़ितों की मदद करना चाहते हैं।

राज्य ब्यूरो, जागरण, जम्मू। जम्मू में आई बाढ़ के कारण लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। बहुत से संगठन इन लोगों की सहायता के लिए आगे आए हैं। लेकिन एक संगठन इन सबसे अलग है। यह है जम्मू के अंबफला स्थित वृद्धाश्रम (ओल्डेज होम)। इस होम में रहने वाले वृद्धों ने बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित लोगों की सहायता के लिए एक नेक पहल की है।

इस विनाशकारी आपदा ने कई परिवारों को बेघर, असहाय बना दिया है और उन्हें भोजन जैसी बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। उनकी पीड़ा को देखते हुए होम ऐ निवासियों ने त्रासदी के पीड़ितों के लिए दोपहर और रात के भोजन के 500 पैकेट तैयार करके वितरित करने का संकल्प लिया है।

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जिम्मेदारी की भावना दर्शाती है यह पहल

यह पहल न केवल उनकी सहानुभूति, बल्कि समाज के प्रति उनकी अटूट ज़िम्मेदारी की भावना को भी दर्शाती है। बुज़ुर्ग सदस्यों ने कहा कि यह आश्रम लोगों की उदारता और सद्भावना के कारण ही अस्तित्व में है और चल रहा है। इसलिए, संकट की इस घड़ी में, जब अनगिनत परिवार कठिनाई और भूख से जूझ रहे हैं, यह उनका नैतिक कर्तव्य है कि वे आगे आएं और सार्थक योगदान दें।

आज समाज को हमारी जरूरत है

आश्रमवासियों की ओर से बोलते हुए एक निवासी ने कहा हम भले ही बूढ़े हो गए हों, लेकिन हमारे दिल और आत्मा हमेशा जवान रहते हैं। आश्रम समाज के सहयोग से फलता-फूलता है, और आज जब समाज पीड़ा में है, तो हम चुप कैसे रह सकते हैं ? यह उन लोगों को कुछ वापस देने का हमारा विनम्र प्रयास है जो वर्षों से हमारे साथ खड़े रहे हैं।

प्रयास में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे वृद्ध

अपनी उम्र और शारीरिक सीमाओं के बावजूद, ये लोग इस प्रयास में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। अपना समय, ऊर्जा और आशीर्वाद देकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रभावित परिवारों को इस कठिन समय में देखभाल और सहायता का एहसास हो। उनका निस्वार्थ भाव मानवता, एकता और करुणा का एक सशक्त संदेश देता है जो उम्र और परिस्थितियों से परे है।

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दयालुता की कोई उम्र नहीं होती

गृह की प्रबंध समिति ने इस पहल का तह दिल से समर्थन किया है और इसे सेवा का एक अनुकरणीय कार्य और व्यापक समुदाय के लिए प्रेरणा बताया है। उन्होंने अन्य संगठनों, परोपकारी लोगों और व्यक्तियों से भी आगे आकर बाढ़ पीड़ितों की इसी तरह मदद करने की अपील की है। वरिष्ठ नागरिकों का यह उल्लेखनीय कार्य इस बात की याद दिलाता है कि दयालुता की कोई उम्र नहीं होती और मानवता की सेवा कृतज्ञता और प्रेम की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति है।