जम्मू-कश्मीर में फैक्ट्री लगाना चाहते थे? आपके लिए अच्छी खबर, केंद्र से 5630 करोड़ की राशि को मिली मंजूरी
जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र ने न्यू सेंट्रल सेक्टर स्कीम (NCSS) के तहत 5630.75 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा, केंद्र ने NCSS के तहत 5630 करोड़ दिए
HighLights
केंद्र ने जम्मू-कश्मीर के लिए 5630.75 करोड़ रुपये मंजूर किए।
यह राशि NCSS के 28,400 करोड़ पैकेज का बचा हुआ हिस्सा है।
पात्र औद्योगिक इकाइयों के पंजीकरण में होगा इस राशि का उपयोग।
ललित कुमार, जम्मू। प्रदेश में निवेश करने के इच्छुक निवेशक न्यू सेंट्रल सेक्टर स्कीम(एनसीएसएस) के तहत 28,400 करोड़ रुपये के पैकेज को विस्तार दिए जाने की उम्मीद लगाकर बैठे थे।
जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2021 में घोषित न्यू सेंट्रल सेक्टर स्कीम का लाभ समाप्त होने के बाद से प्रदेश में थमे औद्योगिक निवेश को फिर गति मिल सके, इसके लिए उम्मीद जताई जा रही थी कि पैकेज को विस्तार मिलेगा। सितंबर 2024 में वित्तीय पैकेज का लाभ आवंटित होने के साथ ही इस स्कीम को बंद कर दिया गया जिसके बाद से नया निवेश थम गया।
इस निवेश को जारी रखने के लिए पिछले साल जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 28,400 करोड़ रुपये के पैकेज को बढ़ाकर 75 हजार करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। 11 जुलाई को नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एपेक्स कमेटी की बैठक भी हुई लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।
अब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त औद्योगिक इकाईयों के पंजीकरण के लिए 5630. 75 करोड़ रुपये मंजूर किए है। जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एनसीएसएस के तहत उपलब्ध 5630.75 करोड़ की राशि का उपयोग प्रतीक्षा सूची में शामिल पात्र औद्योगिक इकाइयों के पंजीकरण करने के लिए इस्तेमाल करने की मंजूरी दी है।
28,400 करोड़ के पैकज के आवंटन का ही हिस्सा है यह राशि
एनसीएसएस के तहत जम्मू-कश्मीर में अब तक 918 औद्योगिक इकाइयों का पंजीकरण किया जा चुका है। यह 5630.75 करोड़ रुपये वास्तविकता में 28,400 करोड़ के पैकज के आवंटन का ही हिस्सा है। वास्ताव में जब औद्योगिक इकाईयों की ओर से डीपीआर पेश की जाती है और अंत में जब वास्तविक निवेश किया जाता है तो उसमें कुछ अंतर रहता है।
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इस अंतर से सरकार के पास 4551.01 करोड़ रुपये बचे थे। इसके अलावा जब योजना के तहत वास्ताविक जीएसटी लाभ आवंटित हुआ तो उसमें से भी 1079.74 करोड़ रुपये सरकार के पास बचे। ऐसे में कुल पैकेज का 5630.75 करोड़ रुपये बचता था और केंद्र सरकार ने वहीं पैसे प्रतिक्षा सूची में शामिल पात्र औद्योगिक इकाईयों के पंजीकरण करने के लिए मंजूर किया है।
बता दे कि एनसीएसएस के तहत जम्मू-कश्मीर में उद्योग लगाने पर कैपिटल इन्वेस्टमेंट इंसेंटिव, कैपिटल इंटरेस्ट सबवेंशन, जीएसटी-लिंक्ड इंसेंटिव और वर्किंग कैपिटल इंटरेस्ट सबवेंशन का लाभ मिलता हैं। इस योजना को पहली अप्रैल 2021 को शुरू किया गया था और यह वर्ष 2037 तक लागू रहेगी।