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    जम्मू-कश्मीर में क्यों अटकी EV की राह? 200 ई-बसें, 295 चार्जिंग स्टेशन, फिर भी सुस्त पड़ी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 03:28 PM (GMT+05:30)

    जम्मू-कश्मीर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और नीतिगत देरी बड़ी बाधा है। निजी ट्रांसपोर्टर ई-बसों में रुचि न ...और पढ़ें

    जम्मू-कश्मीर में सरकार का पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर फोकस। (फाइल फोटो)

    जम्मू-कश्मीर में सरकार का पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर फोकस। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. जम्मू-कश्मीर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी।

    2. निजी ट्रांसपोर्टर ई-बसों की खरीद में रुचि नहीं दिखा रहे।

    3. नीतिगत देरी और प्रशिक्षित कर्मचारियों का भी अभाव।

    विकास अबरोल, जम्मू। ऐसे समय में जब देशभर में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को गति मिल रही है तो केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर अभी भी लंबे समय से चल रही चर्चाओं से आगे बढ़ने के लिए संघर्ष कर रहा है। प्रदेश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (चार्जिंग का बुनियादी ढांचा) के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं है और राजमार्गों और दूरदराज के क्षेत्रों में वाहनों की खराबी से निपटने के लिए कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है।

    यहीं वजह है कि प्राइवेट ट्रांसपोर्ट ईवी बसों की खरीददारी में कोई रूचि नहीं दिखा रहे हैं जबकि प्रदेश ई-आटो और ई-दो पहिया वाहनों की खरीददारी में उपभोक्ताओं ने रूचि दिखाई है।

    ई-रिक्शा से बस तक टैक्स में बड़ी राहत

    केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नियम प्राइवेट सेक्टर से कहीं ज़्यादा कड़े और फायदेमंद हैं। सरकार का मुख्य ध्यान पब्लिक ट्रांसपोर्ट को इलेक्ट्रिक में बदलने और टैक्स में बड़ी राहत देने पर है। भले ही जम्मू-कश्मीर की अपनी पूरी ईवी नीति अभी भी प्रशासनिक स्तर पर अंतिम रूप ले रही है, लेकिन परिवहन विभाग ने कमर्शियल ईवी को बढ़ावा देने के लिए अलग से कई नियम, निर्देश और सब्सिडी लागू की हैं।

    इसमें प्राइवेट गाड़ियों की तरह ही, सभी कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों (जैसे ई-रिक्शा, ई-ऑटो, माल ढोने वाली गाड़ियां, और बसों) को जम्मू-कश्मीर में रोड व टोकन टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई है।

    प्रदेश में मौजूदा 200 ई-बसें

    प्रदेश के प्रत्येक जिले में ई-बस सेवा उपलब्ध करवाने की दिशा में केंद्र सरकार ने पीएम ई-ड्राइव याेजना के अंतर्गत 200 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी भी दी है। मौजूदा स्थिति में प्रदेश में 200 ई-बसें, जो जम्मू में 100 और श्रीनगर में 100 हैं, जो सिर्फ दो राजधानी शहरों में जम्मू व श्रीनगर के अलावा कुछ अन्य जिला मुख्यालयों तक ही सीमित हैं।

    मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस वर्ष गत फरवरी में वित्त वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तुत करते हुए प्रदेश के ई-बस बेड़े में 200 और बसों को शामिल करने का एलान करते हुए यकीन दिलाया था कि ई-बस सेवा को प्रदेश के सभी जिलों में यथासंभव विस्तार प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन की कमी, ई-वाहनों के प्रोत्साहन की राह में रोड़ा बन रही है।

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    हालांकि परिवहन आयुक्त की टीम द्वारा तैयार की गई नई परिवहन और ईवी नीति का व्यापक मसौदा अंतिम समीक्षा के लिए प्रशासनिक विभाग को सौंप दिया गया है। इसमें पूरे जम्मू-कश्मीर के के जिलों में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना भी शामिल है।

    जम्मू-कश्मीर में 295 और लद्दाख में 25 चार्जिंग स्टेशन

    भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा संसद में दिए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 295 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन हैं, जबकि पड़ोसी प्रदेश लद्दाख में 25 ईवी स्टेशन हैं। वहीं महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में करीब सात हजार से अधिक ईवी चार्जिंग स्टेशन हैं।

    आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक व्यापक इलेक्ट्रिक वाहन नीति बनाने की प्रक्रिया अक्टूबर 2022 में शुरू हुई, जब सरकार ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों वाली एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। समिति को जम्मू-कश्मीर में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के उपायों का मूल्यांकन करने और सुझाव देने का कार्य सौंपा गया था।

    कईं महीनों तक चले विस्तृत अध्ययन के बाद, समिति ने सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपीं, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहन स्वामित्व के लिए प्रोत्साहन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में बदलाव को सुगम बनाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण जैसे पहलू शामिल थे।

    हर 25 km में EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने पर जोर

    समिति ने जिला, सब डिवीजन और तहसील स्तर पर, साथ ही प्रमुख राजमार्गों पर हर 25 किलोमीटर के अंतराल पर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने पर विशेष बल दिया था। इसमें यह भी कहा गया कि प्रत्येक फास्ट-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए लगभग 10 लाख रुपये का खर्च आएगा। इन सुविधाओं के अभाव में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना संभव नहीं होगा।

    गत वर्ष नवंबर में सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति के मसौदे की पुन: जांच करने और 2021 से इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में हुए विकास और भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों द्वारा जारी किए गए अद्यतन दिशानिर्देशों के आलोक में संशोधन सुझाने के लिए एक और समिति का गठन किया।

    हालांकि कोई ठोस निर्णय लेने के बजाय, इस मामले को आगे की चर्चा के लिए योजना, विकास एवं निगरानी विभाग के अंतर्गत नवाचार और परिवर्तन केंद्र को भेज दिया गया है।

    सड़क पर EV बंद हुई तो घंटों फंस सकते यात्री

    सूत्रों ने बताया प्रदेश में कितने चार्जिंग स्टेशनों की आवश्यकता है, अभी तक सबसे बुनियादी प्रश्न पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इसके अतिरिक्त चिंताजनक बात यह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की मरम्मत और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की लगभग कमी है। वर्तमान स्थिति में, खराबी की स्थिति में प्रतिक्रिया देने के लिए कोई विश्वसनीय तंत्र नहीं है, खासकर राजमार्गों और दूरदराज के क्षेत्रों में जहां तत्काल सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    ऐसी परिस्थितियों में, तकनीकी सहायता या चार्जिंग बैकअप के बिना खराब हुई इलेक्ट्रिक गाड़ी यात्रियों को घंटों तक फंसे रहने के लिए मजबूर कर सकती है, जिससे सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा हो सकती हैं।'

    कागजों से आगे नहीं बढ़ी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तैयारी

    अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ स्थिति बिल्कुल विपरीत है। पूरे देश में इलेक्ट्रिक वाहन नीतियां केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं, जिन्हें प्रोत्साहनों और सेवा प्रणालियों का समर्थन प्राप्त है। हालांकि जम्मू-कश्मीर में यह प्रक्रिया चर्चाओं के चक्र में अटककर रह गई है, जिसका जमीनी स्तर पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है।

    जम्मू-कश्मीर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, मानव संसाधन विकास और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों पर तत्काल और समयबद्ध निर्णय लिए बिना इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के प्रयास केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गए हैं।

    चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से कंपनियां हिचक रहीं

    सूत्रों ने बताया कि निवेशक जम्मू-कश्मीर जैसे भौगोलिक रूप में चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में संसाधन लगाने से हिचकिचा रहे हैँ। प्रदेश में नीतिगत अनिश्चितता की कमी के कारण निजी कंपनियों ने भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने में सीमित रुचि दिखाई है।

    पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ईवी इकोसिस्टम को लागू करने में देरी केंद्र शासित प्रदेश के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में वाहन उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों को कमजोर कर सकती है। सतत परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी महत्वपूर्ण है, लेकिन बुनियादी ढांचे की तैयारी के बिना, यह परिवर्तन केवल एक आकांक्षा बनकर रह जाएगा।

    चार्जिंग नेटवर्क के बिना ई-बसों का सफर मुश्किल

    आल जेएंडके ट्रांसपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय सिंह चिब का कहना है कि प्रदेश में ईवी बसों को प्रोत्साहन देने के लिए चार्जिंग स्टेशन बनाना बहुत जरूरी है। जब तक प्रदेश में पेट्रोल पम्पों की तर्ज पर जगह-जगह वाहन मालिकों और चालकों को ईवी चार्जिंग स्टेशन नहीं मिलेेंगे तब तक प्राइवेट ट्रांसपोर्टर ई-बसों की खरीददारी में अपनी रूचि नहीं दिखा सकते।

    जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन और जम्मू स्मार्ट सिटी व श्रीनगर स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत चलने वाली ई-बसों के लिए तो इनके डिपुओं में चार्जिंग स्टेशन की सुविधा उपलब्ध है लेकिन आम उपभोक्ता इनका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि प्रदेश के हरेक पेट्रोल पम्पों में भी चार्जिंग स्टेशन की सुविधा शुरू करेंगे तो ही प्राइवेट ट्रांसपोर्ट भी इस बारे में सोचंगे।

    फिलहाल प्रदेश में ई-आटो तो जगह-जगह दौड़ते हुए आसानी से नजर आ जाते हैं क्योंकि इन्हें घर पर ही चार्ज करने की भी सुविधा होती है।

    क्या बोले परिवहन मंत्री सतीश शर्मा?

    परिवहन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सतीश शर्मा ने कहा कि ईवी को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास जारी हैं। पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना सरकार की पहली प्राथमिकता है। प्रदेश में ईवी चार्जिंग स्टेशन की संख्या में बढ़ोतरी करने की दिशा में प्रयास जारी हैं।

    उन्होंने ड्राइवरों और तकनीकी कर्मचारियों की कमी पर चिंता जताई और कहा कि इन सभी की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी ताकि हमारा प्रदेश भी अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रदेश में ई-वी को बढ़ावा देने में सार्थक भूमिका निभा सके।