जम्मू-कश्मीर में समय से पहले खिले फूल, पिघलने लगे ग्लेशियर... अब सरकार की समिति खोजेगी समाधान
जम्मू-कश्मीर में जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभाव दिख रहे हैं, जहां सामान्य से अधिक तापमान के कारण बादाम और सेब के बागों में समय से पहले फूल खिल गए हैं ...और पढ़ें

समय से पहले खिले फूल, पिघलते ग्लेशियर चिंता का विषय। फाइल फोटो
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समय से पहले खिले फूल, पिघलते ग्लेशियर चिंता का विषय
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 16-सदस्यीय समिति गठित
समिति जलवायु परिवर्तन चुनौतियों पर कार्ययोजना बनाएगी
जागरण संवाददाता, जम्मू। जलवायु परिवर्तन का असर अन्य पर्वतीय क्षेत्रों की तर्ज पर जम्मू-कश्मीर पर साफ दिख रहा है। पिछले पखवाड़े कश्मीर के सभी प्रमुख शहरों का तापमान सामान्य से आठ से 12 डिग्री तक अधिक बना रहा। इसका दुष्प्रभाव यह हुआ कि बादाम और सेब के बागों में फरवरी में ही फूलों की बहार दिखने लगी।
सामान्य तौर पर यह मार्च के दूसरे पखवाड़े में दिखाई देती है। इसका ही असर है श्रीनगर का ट्यूलिप पार्क सामान्य से पहले खुल रहा है। दिसंबर और जनवरी में बहुत कम वर्षा व हिमपात होने के कारण ग्लेशियर के पिघलने का खतरा बढ़ गया है। अब प्रदेश सरकार ने इन चिंताओं का समाधान खोजने और भविष्य की रणनीति पर विचार के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 13 विभागों के सचिवों की समिति बनाई है।
यह 16 सदस्यीय समिति प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की कार्ययोजना पेश करेगी और विभिन्न विभागों में समन्वय भी सुनिश्चित करेगी। कमेटी जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों, जल संसाधन संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास, आपदा प्रबंधन व प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से संबंधित नीतियों व कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा भी करेगी। सामान्य प्रशासनिक विभाग के आयुक्त सचिव एम राजू ने यह आदेश जारी किया।
इन विभागों के सचिव होंगे शामिल
मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में इस समिति में 13 सरकारी विभागों के सचिवों को शामिल किया गया है। इनमें जल शक्ति, बिजली विकास, लोक निर्माण, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, योजना, विज्ञान एवं तकनीक, वन, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, उद्योग, कृषि उत्पादन, ग्रामीण विकास, यातायात, शहरी विकास व आपदा प्रबंधन विभागों के प्रशासनिक सचिव शामिल हैं। इनके साथ वन विभाग के प्रमुख वन संरक्षक व पर्यावरण विभाग के निदेशक भी समिति में शामिल किए गए हैं।
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समिति का लक्ष्य
इस समिति के गठन से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने व सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। समिति समय-समय पर बैठकों के माध्यम से कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगी। इस पहल का उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना व जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटना है।
पर्यावरण विशेषज्ञ को नहीं शामिल किया गया
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी समितियों में पर्यावरण के विशेषज्ञ ओर क्षेत्र में पर्यावरण के लिए लड़ाई लड़ने वाले लोगों को शामिल करना अनिवार्य है। इन लोगों को शामिल किया जाता तो भविष्य में वह पर्यावरण के मुद्दे पर अधिक तार्किक राय दे सकते थे। इस समिति को खुले मंच से कुछ सुझाव आमंत्रित करने चाहिए।
जम्मू-कश्मीर और पर्यावरण की चुनौतियां
1. ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और जल संकट: बढ़ते तापमान के कारण प्रदेश में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ लगातार इस पर चिंता जता रहे हैं। जल स्रोतों के सूखने के कारण ग्लेशियरों घट रहे हैं और चश्मे व झीलें सूख रही हैं। इससे भविष्य में पेयजल और सिंचाई का संकट गहरा सकता है।
2. कृषि व बागवानी पर दुष्प्रभाव: समय से पूर्व तापमान में वृद्धि का असर बागवानी पर पड़् रहा है। पेड़ों में फूल खिल गए है और पर्याप्त ठंडक न मिलने से सेब की गुणवता में भी कमी आने की आशंका है। बादाम व अखरोट का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।
3. प्राकृतिक आपदाएं: पिछले वर्ष मानसून के दौरान अति वर्षा की समस्या के कारण अचानक बाढ़ आने की समस्या बढ़ी और उससे हुई तबाही का असर अब तक आमजन पर पड़ रहा है। जम्मू संभाग में सबसे अधिक जनहानि हुई और भूस्खलन की चुनौतियों के कारण लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। इससे प्राकृतिक संपदा को भी क्षति पहुंची।
4. अनियंत्रित विकास: पर्यटन में विस्तार के नाम पर गुलमर्ग, पहलगाम और पत्नीटाप जैसे क्षेत्रों में जंगल काटकर होटलों का निर्माण कर दिया गया। इसके अलावा कचरा बढ़ा और अब नाजुक पारिस्थितिक तंत्र पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है।