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    Jammu-Rajouri Rail Link: अखनूर-सुंदरबनी रूट भूली सरकार, कांग्रेस बोली- 'आक्रोश झेलने को रहें तैयार'

    By Satnam Singh Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Tue, 11 Aug 2026 11:56 AM (IST)

    जम्मू-कश्मीर कांग्रेस ने जम्मू-राजौरी रेल लिंक परियोजना में अखनूर-सुंदरबनी जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों को कथित तौर पर नजरअंदाज करने पर भाजपा सरकार पर सवा ...और पढ़ें

    जम्मू-राजौरी रेल लिंक पर कांग्रेस का भाजपा पर हमला अखनूर-सुंदरबनी रूट की अनदेखी पर जनता में आक्रोश।

    जम्मू-राजौरी रेल लिंक पर कांग्रेस का भाजपा पर हमला अखनूर-सुंदरबनी रूट की अनदेखी पर जनता में आक्रोश

    HighLights

    1. कांग्रेस ने जम्मू-राजौरी रेल लिंक में सीमावर्ती क्षेत्रों की अनदेखी पर सवाल।

    2. जम्मू-राजौरी-पुंछ रेल परियोजना को तत्काल मंजूरी देने की मांग।

    3. परियोजना मंजूर न होने पर भाजपा को जनता के आक्रोश का सामना।

    राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जम्मू से राजौरी-पुंछ तक प्रस्तावित रेल संपर्क में अखनूर, छंब, चौकीचौरा, सुंदरबनी और नौशहरा होते हुए सीमा क्षेत्र को कथित तौर पर नजरअंदाज किए जाने पर केंद्र की भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं।

    कांग्रेस ने मांग की है कि लंबे समय से लंबित इस रेल परियोजना को तत्काल मंजूरी दी जाए, अन्यथा भाजपा नेताओं को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने केंद्र सरकार द्वारा जम्मू से राजौरी-पुंछ के लिए अखनूर, सुंदरबनी और नौशहरा के रास्ते किए गए मूल सर्वे को कथित तौर पर दरकिनार किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जम्मू से अखनूर, सुंदरबनी और नौशहरा होते हुए राजौरी तक फैला विशाल सीमा क्षेत्र लंबे समय से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहा है।

    शर्मा ने कहा कि इन सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों ने चार युद्धों और बार-बार होने वाले विस्थापन का दंश झेला है। इसके बावजूद इस पूरे क्षेत्र को रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग वर्षों से लंबित है। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों को पिछले पांच दशक से रेल संपर्क की उम्मीद थी।

    5 दशक पुरानी मांग पर फिर गरमाई सियासत

    उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पहल पर राजौरी में एक सार्वजनिक रैली के दौरान स्थानीय लोगों द्वारा इस मांग को जोरदार तरीके से उठाए जाने के बाद जम्मू से राजौरी-पुंछ तक रेल लिंक का सर्वे कराया गया था। इसके बाद करीब 13000 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिससे दोनों सीमावर्ती जिलों के लोगों में रेल सुविधा मिलने की उम्मीद जगी थी।

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    रविंदर शर्मा ने आरोप लगाया कि केंद्र में सरकार बदलने के बाद और इन क्षेत्रों से संसद एवं विधानसभा में कांग्रेस के प्रतिनिधित्व में कमी आने के कारण इस परियोजना की आवाज कमजोर पड़ गई। उन्होंने दावा किया कि परियोजना को पहले ठंडे बस्ते में डाला गया और अब इसे कथित तौर पर छोड़ दिया गया है।

    उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने अखनूर, सुंदरबनी और नौशहरा होते हुए राजौरी तक प्रस्तावित रेल परियोजना को जल्द मंजूरी नहीं दी तो सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों में भारी रोष पैदा होगा और भाजपा नेताओं को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।