जम्मू-कश्मीर में मौसम का बड़ा अलर्ट, अगले 40 घंटे भारी, पहाड़ी इलाकों में रहने वाले रहें सतर्क
जम्मू-कश्मीर में अगले 36-40 घंटों तक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण भारी बारिश की संभावना है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में अगले 40 घंटे भारी बारिश का अलर्ट, रहें सतर्क।
HighLights
अगले 36-40 घंटे तक जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश की आशंका।
बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने का खतरा बढ़ा।
अनावश्यक यात्रा टालें, सुरक्षित रहें, अमरनाथ यात्रा प्रभावित।
डिजिटल डेस्क, जम्मू। जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए अगला डेढ़ दिन बेहद अहम रहने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस अगले 36 से 40 घंटों तक पूरे प्रदेश को प्रभावित करेगा। इस सिस्टम की खास बात यह है कि यह अरब सागर से नमी खींच रहा है, जिसके चलते जम्मू-कश्मीर के अधिकांश हिस्सों में बारिश की तीव्रता अचानक बढ़ जाएगी।
अगर आप जम्मू, कठुआ, सांबा या मैदानी इलाकों में रहते हैं, तो भी छाता और रेनकोट तैयार रखें। लेकिन पहाड़ों पर रहने वाले भाइयों-बहनों के लिए यह खबर ज्यादा जरूरी है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस वेदर सिस्टम का सबसे ज्यादा असर आज देर रात से शुरू होकर कल सुबह तक रहेगा। इस दौरान जम्मू संभाग से लेकर कश्मीर घाटी तक कई इलाकों में मध्यम से भारी बारिश होने की पूरी संभावना है।
राजौरी, पुंछ, डोडा, किश्तवाड़, रामबन, ऊधमपुर और रियासी जैसे जिलों में तो कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश भी हो सकती है। श्रीनगर, बारामुला, अनंतनाग और शोपियां में भी बादल जमकर बरसेंगे। किसानों को सलाह है कि अगर खेत में फसल कटी हुई है तो उसे सुरक्षित जगह रख लें, और पशुपालक अपने जानवरों को निचले इलाकों से दूर रखें।
जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी
प्रशासन और मौसम विभाग ने खासतौर पर पहाड़ी और भूस्खलन संभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। लगातार भारी बारिश के कारण फ्लैश फ्लड यानी अचानक आने वाली बाढ़, लैंडस्लाइड और मडस्लाइड का खतरा बढ़ जाता है।
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जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे, मुगल रोड और सिंथन टॉप जैसे रास्तों पर सफर करने से पहले एक बार ट्रैफिक कंट्रोल रूम से सड़क की स्थिति जरूर पता कर लें। नदी-नालों के पास बस्तियों में रहने वाले लोग रात के समय विशेष सतर्कता बरतें और पानी का स्तर बढ़ने पर तुरंत सुरक्षित जगह चले जाएं।
बादल फटने का भी है खतरा
मौसम विभाग ने यह भी बताया है कि कुछ एक-दो जगहों पर बादल फटने जैसी घटनाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि यह बहुत सीमित क्षेत्र में होता है, लेकिन जहां होता है वहां भारी नुकसान पहुंचाता है। इसलिए ऊंचाई वाले इलाकों और खड्डों के पास रहने वाले लोग अफवाहों पर ध्यान न दें, मगर प्रशासन की एडवाइजरी को गंभीरता से लें।
इन 5 बातों का रखें ध्यान
- जरूरी न हो तो सफर टालें: अगले 24 घंटे पहाड़ी रास्तों पर जाने से बचें। अगर बहुत जरूरी है तो दिन के उजाले में ही निकलें।
- बिजली उपकरणों से दूरी: गरज-चमक के दौरान बिजली के खंभों, पेड़ों और मोबाइल टावर से दूर रहें।
- इमरजेंसी किट तैयार रखें: टॉर्च, पावर बैंक, जरूरी दवाएं और कुछ सूखा राशन घर में रखें।
- बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान: उन्हें अकेले घर से बाहर न निकलने दें और निचले इलाकों में न खेलने दें।
- अफवाहों से बचें, अपडेट रहें: मौसम की सही जानकारी के लिए रेडियो, दूरदर्शन या जिला प्रशासन के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल देखें।
स्कूल-कॉलेज और अमरनाथ यात्रा पर असर संभव
भारी बारिश के मद्देनजर जिला प्रशासन जरूरत पड़ने पर स्कूलों में छुट्टी का फैसला ले सकता है। वहीं अमरनाथ यात्रा के दोनों रूटों पर भी यात्रा को अस्थायी तौर पर रोका जा सकता है। इसलिए यात्रा पर निकले श्रद्धालु बेस कैंप के निर्देशों का पालन करें।
जम्मू-कश्मीर का मौसम जितना खूबसूरत है, उतना ही अनिश्चित भी। प्रकृति के इस रूप का सम्मान करते हुए हम सावधानी बरतें, तो किसी भी मुश्किल से बचा जा सकता है। आप सुरक्षित रहें, अपनों का ख्याल रखें। कोई भी आपात स्थिति में 112 हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत संपर्क करें।