'GST से जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था मजबूत', जीएसटी परिषद की बैठक में CM उमर बोले- टैक्स दरों को और सरल बनाने की जरूरत
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जीएसटी परिषद की बैठक में राज्य की राजकोषीय स्थिति मजबूत करने और आर्थिक विकास को गति देने पर जोर दिया।
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जीएसटी परिषद की बैठक में शामिल CM उमर अब्दुल्ला। फोटो जागरण
HighLights
उमर अब्दुल्ला ने जीएसटी परिषद की बैठक में हिस्सा लिया।
जम्मू-कश्मीर की राजकोषीय स्थिति मजबूत करने पर जोर दिया।
जीएसटी राज्य की सबसे बड़ी कर आय का स्रोत है।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को उम्मीद जताई कि परिषद के फैसलों से जम्मू-कश्मीर की राजकोषीय स्थिति मजबूत होगी तथा आर्थिक विकास, निवेश और जनकल्याण की गतिविधियों को गति मिलेगी।
जम्मू-कश्मीर के लिए जीएसटी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केंद्र शासित प्रदेश की अपनी कर आय का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है। उन्होंने यह विचार नई दिल्ली में नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में व्यक्त किए। बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों तथा केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
परिषद में जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाने, राजस्व संग्रह बढ़ाने, कर अनुपालन आसान करने और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जीएसटी परिषद को राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के वित्तीय हितों का ध्यान रखते हुए ही आगे बढ़ना चाहिए।
जीएसटी की विभिन्न दरों को और बेहतर बनाने पर जोर
जीएसटी को और ज्यादा सरल एवं प्रभावकारी बनाए जाने की जरूरत है। इसमें सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विभिन्न उत्पादों और वस्तुओं के लिए जीएसटी की विभिन्न दरोें को और बेहतर बनाने पर भी जोर दिया।
यहां यह बताना असंगत नहीं होगा कि वित्तीय आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में जम्मू-कश्मीर का एसजीएसटी संग्रह करीब 8,586 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2025-26 के संशोधित अनुमान में इसके 11,500 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। 2026-27 के बजट में एसजीएसटी से 13,000 करोड़ रुपये की प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह पिछले कुछ वर्षों में जीएसटी से होने वाली अपनी आय में लगातार वृद्धि हुई है।
हालांकि जम्मू-कश्मीर की वित्तीय स्थिति अभी भी केंद्रीय सहायता पर काफी निर्भर है। 2026-27 के बजट अनुमान के अनुसार कुल राजस्व प्राप्तियां करीब 90,018 करोड़ रुपये हैं, जिनमें 58,218 करोड़ रुपये केंद्र से ग्रांट इन एड के रूप में मिलने का अनुमान है। वहीं अपना कुल कर राजस्व करीब 20,700 करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें जीएसटी की हिस्सेदारी लगभग 63 प्रतिशत है।
बिजली का खर्च, राजकोषीय घाटा और केंद्रीय अनुदानों पर निर्भरता
जम्मू-कश्मीर सरकार के लिए जीएसटइी राजस्व बढ़ाना इसलिए भी अहम है क्योंकि अपनी आय के मजबूत होने से विकास और जनकल्याण योजनाओं के लिए वित्तीय गुंजाइश बढ़ती है। दूसरी ओर, बिजली क्षेत्र का खर्च, राजकोषीय घाटा और केंद्रीय अनुदानों पर निर्भरता वित्तीय प्रबंधन की प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं।
बैठक में जीएसटी अनुपालन को आसान बनाने, रिफंड प्रक्रिया में सुधार और इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े विवादों को कम करने पर भी जोर दिया गया। इन सुधारों का पर्यटन, होटल, परिवहन, निर्माण और छोटे कारोबार जैसे क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। जम्मू-कश्मीर में इन क्षेत्रों की गतिविधियां बढ़ने से जीएसटी संग्रह में भी वृद्धि हो सकती है।
