हार्ट अटैक-स्ट्रोक के इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, जम्मू के हृदय रोग विशेषज्ञ बोले- 'हर मिनट है कीमती'
जीएमसी जम्मू के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील शर्मा ने लोगों को हार्ट अटैक और स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। ...और पढ़ें

हार्ट अटैक और स्ट्रोक के लक्षणों को न करें नजरअंदाज डॉ सुशील शर्मा की चेतावनी।
HighLights
हार्ट अटैक, स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानना महत्वपूर्ण।
समय पर उपचार से जान बचाई जा सकती है।
स्वस्थ जीवनशैली, नियमित जांच हृदय रोगों से बचाती है।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जीएमसी जम्मू हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील शर्मा ने लोगों को हार्ट अटैक और स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि दोनों गंभीर चिकित्सा आपात स्थितियां हैं और इनमें समय पर उपचार मिलने से जान बचाने के साथ-साथ हृदय और मस्तिष्क को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
सिख एम्पैथी एंड वेलफेयर एसोसिएशन के सहयोग से त्रिकुटा नगर स्थित गुरुद्वारा बाला प्रीतम में आयोजित कैंप में डा. शर्मा ने बताया कि हार्ट अटैक के प्रमुख लक्षणों में सीने में दर्द या दबाव, भारीपन, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक पसीना, मतली, चक्कर तथा दर्द का हाथ, कंधे, जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैलना शामिल हो सकता है।
वहीं, स्ट्रोक की स्थिति में चेहरे, हाथ या पैर के किसी एक हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में परेशानी, भ्रम, नजर कमजोर होना, चक्कर, संतुलन बिगड़ना या अचानक तेज सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें, क्योंकि आपात स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
डॉ. सुशील शर्मा ने कहा कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्राल, मोटापा, तंबाकू का सेवन, शारीरिक निष्क्रियता, अस्वास्थ्यकर खान-पान, अत्यधिक शराब का सेवन और लंबे समय तक रहने वाला तनाव हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाते हैं। उन्होंने लोगों को संतुलित और हृदय के लिए अनुकूल आहार लेने की सलाह दी, जिसमें ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और पर्याप्त प्रोटीन शामिल हों। साथ ही नमक, रिफाइंड चीनी, प्रोसेस्ड फूड और अस्वास्थ्यकर वसा का सेवन सीमित करने पर जोर दिया।
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स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का आह्वान
उन्होंने नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, वजन नियंत्रण और तनाव कम करने को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा बताया। डॉ. शर्मा ने कहा कि शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती निष्क्रिय जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर खान-पान चिंता का विषय है। उन्होंने परिवारों और सामाजिक संस्थाओं से स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
उन्होंने नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व पर भी जोर दिया और लोगों को समय-समय पर रक्तचाप, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने की सलाह दी। खासकर हृदय रोगों के पारिवारिक इतिहास या अन्य जोखिम वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत बताई गई। उन्होंने चिकित्सकों द्वारा निर्धारित दवाओं और सलाह का नियमित रूप से पालन करने की अपील भी की।
कैंप में डॉ. अनितिपाल सिंह, डा. भोला कुमार, डा. आदित्य शर्मा और डा. आदर्श शर्मा सहित पैरामेडिक्स और स्वयंसेवकों ने भी सहयोग दिया। इनमें रंजीत सिंह, खुशविंदर संधू, सुधीर भारती, राहुल वैद, मुकेश कुमार, मनिंदर सिंह, अनमोल सिंह, डिंपल कुमार, शुभम शर्मा, गोकुल जामवाल, गौरव शर्मा, विकास कुमार, राजिंदर सिंह, नरिंदर दत्ता, मनदीप सिंह, काली दास और निरवैर सिंह बाली शामिल रहे।