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    जम्मू में डेलीवेजर्स का हल्ला बोल! सचिवालय के बाहर फूटा गुस्सा, बोले- '30 रुपये की दिहाड़ी में कैसे चलाएं घर'

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 03:52 PM (GMT+05:30)

    जम्मू में विभिन्न विभागों के डेलीवेजरों ने न्यूनतम वेतन और नियमितीकरण की मांग को लेकर सिविल सचिवालय का घेराव किया। उन्होंने 30 रुपये प्रतिदिन की मजदूर ...और पढ़ें

    यूनियन के नेताओं का कहना है कि गरीबों के साथ न्याय करें।

    यूनियन के नेताओं का कहना है कि गरीबों के साथ न्याय करें।

    HighLights

    1. डेलीवेजरों ने न्यूनतम वेतन और नियमितीकरण के लिए सचिवालय घेरा।

    2. 30 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी को अव्यावहारिक बताया, भुगतान में देरी।

    3. मांगें न मानी तो जम्मू-कश्मीर में चक्का जाम की चेतावनी।

    जागरण संवाददाता, जम्मू: आल डेलीवेजर्स संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में विभिन्न विभागों में काम करने वाले डेलीवेजरों ने सोमवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर सिविल सचिवालय के बाहर विशाल विरोध प्रदर्शन किया। वर्षों से जारी अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए इन कर्मियों ने जमकर नारेबाजी की।

    सचिवालय घेराव के चलते पहले से ही बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती यहां कर दी गई थी। प्रदर्शनकारियों को सचिवालय के नजदीक ही रोक दिया गया। प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं।

    30 रुपए प्रति दिन पर काम चलाना नामुमकिन

    कर्मियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि आज के दौर में महज 30 प्रति दिन पर काम चलाना नामुमकिन है। इसे तुरंत बढ़ाकर न्यूनतम मजदूरी कानून के दायरे में लाया जाए। उन्होंने कहा कि 900 रुपये महीना तनख्वाह है, वो भी समय पर नहीं मिलती। चार-छह महीनों बाद यह दी जाती है। उन्होंने 10 से 15 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे डेलीवेजर्स के लिए एक ठोस नियमितीकरण नीति बनाने की मांग को भी दोहराया।

    मांगें नहीं मानीं तो होगा चक्का जाम

    यूनियन के नेताओं का कहना है कि वे बार-बार प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी बदहाली से अवगत करा चुके हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। समिति के जेके यूटी अध्यक्ष सनी कांत चिब ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी बार-बार केवल कमेटियों के गठन और खोखले आश्वासनों से बहला रहे हैं, जबकि धरातल पर कर्मचारियों की स्थिति जस की तस है।

    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी वाजिब मांगों पर तुरंत कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो संघर्ष समिति जम्मू से दिल्ली तक लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण आंदोलन चलाएगी और संपूर्ण जम्मू-कश्मीर में अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू किया जाएगा। उन्होंने उपराज्यपाल प्रशासन और विभागीय अधिकारियों पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।

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    गरीबों के साथ न्याय करें

    यूनियन के नेताओं का कहना है कि गरीबों के साथ न्याय करें। नहीं तो सरकार को रहने नहीं देंगे। आज के समय में 30 रुपये में दैनिक मजदूरी पर परिवार पालना असंभव है। कर्मचारी अपने बच्चों की स्कूल फीस और परिवार के इलाज का खर्च उठाने में पूरी तरह असमर्थ हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार केवल खोखले आश्वासन और कमेटियों का गठन करती है, लेकिन धरातल पर डेली वेजर्स और मिड-डे मील वर्कर्स की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में न्यूनतम वेतन कानून को पूरी तरह अमल में लाया जाए। पात्र डेलीवेजरों और कर्मचारियों को तुरंत स्थायी दर्जा दिया जाए। सभी श्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। दिहाड़ी मजदूरों की वर्षों से चली आ रही समस्याओं का स्थाई हल निकाला जाए। मजदूरों को न्याय और उचित रोजगार सुरक्षा प्रदान की जाए।