Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    जम्मू-कश्मीर के बर्फीले इलाकों में अब नहीं बचेंगे आतंकी, पहाड़ों में तैनात CRPF जवानों को मिलेगा 'हिमसुरक्षा' कवच

    By Vivek Singh Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Mon, 10 Aug 2026 11:46 AM (IST)

    गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में CRPF जवानों के लिए 4.54 करोड़ रुपये के विशेष शीतकालीन उपकरण और 'हिमसुरक्षा' कवच को मंजूरी दी है। ...और पढ़ें

    जम्मू-कश्मीर में CRPF को मिला 'हिमसुरक्षा' कवच, पहाड़ों में आतंकियों का होगा सफाया। फोटो: सीआरपीएफ

    जम्मू-कश्मीर में CRPF को मिला 'हिमसुरक्षा' कवच, पहाड़ों में आतंकियों का होगा सफायाफोटो: सीआरपीएफ

    HighLights

    1. गृह मंत्रालय ने 4.54 करोड़ रुपये का फंड मंजूर किया।

    2. CRPF जवानों को विशेष शीतकालीन उपकरण, 'हिमसुरक्षा' मिलेगा।

    3. पहाड़ी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियान मजबूत होंगे।

    पीटीआई, जम्मू। जम्मू कश्मीर में 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रदेश के उच्च, दुर्गम इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को बेहतर साजो-सामान मिलेगा। गृह मंत्रालय ने विशेष शीतकालीन कपड़े व उपकरण खरीदने के लिए 4.54 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की है।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह राशि करीब 600 केरिपुब जवानों के लिए अत्यधिक ठंड व बर्फीले क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले आवश्यक कपड़ों व उपकरणों की खरीद पर खर्च की जाएगी। इनमें गेटर्स, स्लीपिंग बैग, स्नो बूट, स्नो गागल्स, इंसुलेटिंग मैट, रक्सैक, दस्ताने, टेंट, थर्मल इनसोल, कंबल व रेस्क्यू बैग शामिल हैं।

    इसके साथ जवानों के लिए डीआरडीओ द्वारा विकसित अत्यधिक ठंडे मौसम के कपड़े ‘हिमसुरक्षा’ भी उपलब्ध कराए जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक, इन उपकरणों का इस्तेमाल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लंबे समय तक चलने वाली गश्त, निगरानी, कठिन मौसम में जीवित रहने व आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान किया जाएगा।

    -50 डिग्री में लड़ने वाले कपड़े और टेंट मिलेंगे 

    आतंकवादियों द्वारा जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके व दुर्गम पहाड़ी इलाकों में छिपने की रणनीति को देखते हुए सुरक्षा बलों ने इन क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। इसके तहत 6,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर अस्थायी आपरेटिंग बेस बनाए गए हैं। अस्थायी आपरेटिंग बेस पर केरिपुब के कमांडो तैनात रहते हैं।

    खबरें और भी

    वहां से वे आतंकवादियों की तलाश, निगरानी व जरूरत पड़ने पर तलाशी व हमले की कार्रवाई की जाती है। आतंकवादी अकसर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित ‘ढोक’, यानी मिट्टी व पत्थरों से बने अस्थायी आवासों में छिपने का प्रयास करते रहे हैं।

    ताजा आंकड़ों के अनुसार, केरिपुब ने जम्मू-कश्मीर के दोनों संभागों में अब तक 55 अस्थायी आपरेटिंग बेस स्थापित किए हैं। प्रत्येक अस्थायी आपरेटिंग बेस में सामान्यता 15 से 25 सशस्त्र जवान तैनात रहते हैं। वहां उनके आराम तथा पुनर्स्थापन के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

    पहलगाम हमले के बाद अस्थायी आपरेटिंग बेस नेटवर्क को मजबूत बनाने का अभियान तेज हुआ है। केरिपुब ने ने इस तरह का पहला आपरेशनल बेस जुलाई 2025 में स्थापित किया था। हालांकि, केरिपुब कमांडो के लिए सेना की तर्ज पर ऐसे अस्थायी आपरेटिंग बेस बनाने की योजना वर्ष 2022-23 से विचाराधीन थी। लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इसे तेजी से लागू किया गया।

    बैसरन घाटी हमले के बाद सरकार का बड़ा फैसला

    गत वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इनमें अधिकांश पर्यटक थे। हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने ऊंचाई वाले इलाकों में आतंकवादियों के ठिकानों और उनके संभावित मार्गों पर निगरानी एवं ऑपरेशनल मौजूदगी बढ़ाने की रणनीति तैयार की। अस्थायी आपरेटिंग बेस आपरेशन महादेव का अहम आधार बना था।

    जुलाई 2025 में पहलगाम हमले के जिम्मेदार तीन आतंकवादियों को मार गिराने के लिए चलाए गए अापरेशन महादेव’ में केरिपुब ने अस्थायी आपरेटिंग बेस को सुरक्षा बलों करी कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधार बनाया था। आपरेशन महादेव 22 मई 2025 को शुरू किया गया था। यह पहलगाम हमले के बाद तैयार की गई व्यापक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा था। इस अभियान के दौरान ऊंचाई वाले इलाकों में सुरक्षा बलों की बेहतर तैनाती व लाजिस्टिक सपोर्ट ने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    गृह मंत्रालय की ओर से जुलाई में केरिपुब के प्रस्ताव को इन उपकरणों की खरीद के लिए पूर्ण मंजूरी दिए जाने के बाद अब बल अपने ऊंचाई वाले अस्थायी बेस और मजबूत होंगे। अधिकारियों के अनुसार, इन वस्तुओं की औसत उपयोग अवधि करीब दो वर्ष है व आवश्यकता के अनुसार भविष्य में नई खरीद के लिए फंड में बढ़ोतरी की जा सकती है।

    इस कदम का उद्देश्य अत्यधिक ठंड, बर्फबारी व कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में तैनात केरिपुब जवानों को बेहतर सुरक्षा, गतिशीलता और जीवित रहने की क्षमता उपलब्ध कराना है, ताकि वे लंबे समय तक निगरानी और आतंकवाद विरोधी अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकें।