Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    जम्मू में चांगथांग नोमेडिक फेस्टिवल, पश्मीना पालकों को मिला बड़ा प्रोत्साहन; पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 10:36 AM (IST)

    पूर्वी लद्दाख के चांगथांग नोमेडिक मेले में उपराज्यपाल ने 1,200 से अधिक पश्मीना पालकों को 1.10 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की। ...और पढ़ें

    जम्मू में चांगथांग नोमेडिक फेस्टिवल (फोटो: जागरण)

    जम्मू में चांगथांग नोमेडिक फेस्टिवल (फोटो: जागरण)

    राज्य ब्यूरो, जम्मू। पूर्वी लद्दाख के सो मोरीरी में रविवार को शुरू हुए चांगथांग नोमेडिक मेले में पूर्वी लद्दाख के घुमंतू समुदाय की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली ने पर्यटकों को आकर्षित किया।

    मेले के पहले दिन लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने चांगथांग के मेहनती चांगपा समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 1,200 से अधिक घुमंतू पश्मीना बकरी पालकों को 1.10 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की। मेले में सैकड़ों पर्यटक और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।

    उपराज्यपाल ने लद्दाख के धुमंतू चांगपा समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं व पश्मीना उत्पादन की सराहना की। उन्होंने कहा कि बकरी पालकों को दी गई सहायता उत्पादन आधारित 25 प्रतिशत प्रोत्साहन योजना का हिस्सा है।

    इस योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और इस वर्ष कच्ची पश्मीना का संग्रह बढ़कर 19 मीट्रिक टन पहुंच गया है, जो वर्ष 2025 में कुल 16 मीट्रिक टन उत्पादन से अधिक है।

    पश्मीना पालकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आल चांगथांग पश्मीना ग्रोअर्स मार्केटिंग कोआपरेटिव सोसाइटी को आठ करोड़ रुपये का रिवाल्विंग फंड उपलब्ध कराया गया है। इसका उद्देश्य पश्मीना उत्पादकों को बेहतर वित्तीय सहायता देना व उनकी आय में स्थिरता लाना है।

    उन्होंने पश्मीना उत्पादकों से वैज्ञानिक एवं आधुनिक तरीकों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि कच्ची पश्मीना की औसत उपज को वर्तमान 200 ग्राम प्रति बकरी से बढ़ाकर 350 ग्राम तक किया जाना चाहिए। साथ ही अगले तीन वर्षों में पश्मीना बकरियों की संख्या को दो लाख से बढ़ाकर चार लाख करने का लक्ष्य रखा गया है।

    उपराज्यपाल ने कहा कि लद्दाख की पश्मीना केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि क्षेत्र की कालातीत विरासत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घुमंतू व पशुपालक समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के विजन के अनुरूप प्रशासन उन समुदायों को अधिकतम आर्थिक लाभ सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    खबरें और भी

    वे सदियों पुरानी पश्मीना विरासत को संरक्षित कर रहे हैं। वहीं, चांगथांग मेले में लद्दाख की पारंपरिक खानाबदोश संस्कृति, पश्मीना उत्पादन, स्थानीय हस्तशिल्प, लोक परंपराओं व प्राकृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जा रहा है।

    पर्यटक चांगपा लोगों के जीवन को करीब से देख रहे हैं। महोत्सव क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान के साथ पश्मीना आधारित आजीविका और पर्यटन को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभर रहा है।