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    जम्मू की आबादी में कितना बदलाव? सच जानने पहुंची केंद्र की 4 सदस्यीय हाई-लेवल जनसांख्यिकीय समिति

    By Rohit JandialEdited By: Rahul Sharma
    Updated: Mon, 10 Aug 2026 06:52 PM (IST)

    केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति जम्मू में जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने पहुंची है। यह समिति अवैध प्रवासियों, विशेषकर रोहिंग्या और बांग ...और पढ़ें

    जम्मू की बदलती आबादी का सच जानने पहुंची केंद्रीय उच्चस्तरीय समिति।

    जम्मू की बदलती आबादी का सच जानने पहुंची केंद्रीय उच्चस्तरीय समिति

    HighLights

    1. केंद्रीय समिति जम्मू में जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करेगी।

    2. रोहिंग्या, बांग्लादेशी बस्तियों सहित संवेदनशील क्षेत्रों का आकलन।

    3. मुख्य सचिव, डीजीपी से मिलकर समिति ने जानकारी जुटाई।

    राज्य ब्यूरो, जम्मू। देश के विभिन्न हिस्सों में जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति सोमवार को तीन दिवसीय दौरे पर जम्मू पहुंची। समिति अपने दौरे के दौरान विभिन्न क्षेत्रों का विस्तृत आकलन करेगी।

    समिति के जम्मू पहुंचने के बाद मुख्य सचिव अटल डुल्लू और पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने एक होटल में समिति के सदस्यों से मुलाकात की। अधिकारियों के अनुसार, यह बैठक समिति की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों के साथ किए जा रहे विचार-विमर्श का हिस्सा थी। समिति अपने आकलन के लिए विभिन्न विभागों से आवश्यक जानकारी और सुझाव जुटा रही है।

    अधिकारियों ने बताया कि मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के साथ बैठक से पहले समिति को जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकीय स्थिति और बदलते रुझानों को लेकर एक प्रस्तुति भी दी गई। समिति 12 अगस्त तक जम्मू में विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बातचीत करेगी।

    केंद्र सरकार ने मई में सेवानिवृत्त जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नवलकर की अध्यक्षता में इस उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति को अवैध आव्रजन और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने तथा उनसे निपटने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई है।

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष 15 अगस्त को हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन की घोषणा की थी, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11 सितंबर को मंजूरी दी थी। समिति में जनगणना आयुक्त के अलावा सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री शमिका रवि शामिल हैं। गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव समिति के सदस्य सचिव हैं।

    दौरे के दौरान समिति के जम्मू के कई इलाकों का दौरा करने की संभावना है। इनमें रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की बस्तियां तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास के कुछ संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं, जहां सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से स्थिति का जायजा लिया जाएगा।

    जम्मू, सांबा में हजारों रोहिंग्या और बांग्लादेशी

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जम्मू और सांबा जिलों में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों समेत 13,700 से अधिक विदेशी नागरिक रह रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2008 से 2016 के बीच इनकी संख्या में 6,000 से अधिक की वृद्धि हुई थी।मार्च 2021 में जम्मू पुलिस ने सत्यापन अभियान के दौरान शहर में महिलाओं और बच्चों समेत 270 से अधिक रोहिंग्याओं के अवैध रूप से रहने का पता लगाया था। बाद में उन्हें कठुआ उप-जेल परिसर स्थित होल्डिंग सेंटर में रखा गया था।

    क्षेत्र में अवैध विदेशी नागरिकों, विशेषकर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी को लेकर अतीत में भाजपा नेताओं और विभिन्न संगठनों की ओर से चिंता जताई जाती रही है। इन संगठनों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, जनसांख्यिकीय बदलाव और स्थानीय संसाधनों के संभावित दुरुपयोग का हवाला देते हुए अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की मांग की है।