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    एक कमरे से शुरू करें मशरूम की खेती, कम खर्च में सालभर होगी कमाई! शेड से बीज तक जानें पूरा प्लान

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 02:12 PM (IST)

    जम्मू में बटन मशरूम की खेती की तैयारी अभी से शुरू करें, अक्टूबर में इसकी बुवाई होगी। यह खेती अच्छी आय का स्रोत है, जिसके लिए शेड, बीज और खाद की बुकिंग ...और पढ़ें

    जम्मू में बटन मशरूम की खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं।

    जम्मू में बटन मशरूम की खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं।

    HighLights

    1. बटन मशरूम खेती की तैयारी अभी से शुरू करें जम्मू में।

    2. शेड, बीज और कंपोस्ट की बुकिंग व व्यवस्था करें।

    3. तकनीकी ज्ञान और कृषि विभाग से प्रशिक्षण प्राप्त करें।

    जागरण संवाददाता, जम्मू। अगर आप बटन मशरूम की खेती में अपना रोजगार तलाश रहे हैं तो अपनी सोच को अभी पक्का कर लें। क्योंकि इस खेती की आरंभिक तैयारी शुरू करने का समय आ गया। बटन मशरूम जम्मू में बड़े पैमाने पर उगाई जाती है और इसकी मार्केट में जबरदस्त मांग रहती है। इसलिए अनेकों किसान बटन मशरूम की खेती कर अच्छी आमदनी बना लेते हैं।

    कृषि विभाग से संयुक्त निदेशक के पद पर रहे रामलाल भगत का कहना है कि मशरूम की खेती बहुत मेहनत का काम है। लेकिन जो मेहनत कर गया वह अच्छा रोजगार भी कर गया।

    मशरूम का शेड कहां बनवाएं?

    अगर आप भी इस खेती में आना चाहते हैं तो सबसे पहले यह सोच लें कि मशरूम का शेड कहां बनवाना है। अगर पहले से खेती करते आ रहे हैं तो आपको पुराने शेड की साफ सफाई का काम अभी से शुरू करवा देना चाहिए और अगर किसान इस खेती में नया हैं तो मशरूम की खेती के लिए उसे शेड बनवाने पड़ेंगे। शेड ऐसा हो कि उसमें खिड़कियां हो ताकि हवा आ का सके।

    शेड के ऊपरी भाग में टीन का इस्तेमाल न किया जाए। क्योंकि धूप से टीन गर्म हो जाता है और रात को ठंड से यह टीन ठंडी हो जाती है और इससे शेड के अंदर तापमान का सारा खेल बिगड़ जाता है। बेहतर होगा कि कोई टूटा फूटा मकान हो या झोपड़ी आदि हो तो वहां मशरूम की खेती अच्छे तरीके से की जा सकती है। घास फूस की झोपड़ी में मशरूम की खेती का तापमान नियंत्रित करने में आसानी रहती है।

    मशरूम के बीज की बुकिंग अभी करवा लें

    दूसरी ओर किसान तुरंत अभी मशरूम के स्पान (बीज) की बुकिंग कृषि विभाग में जाकर करवा लें, क्योंकि मशरूम तो जम्मू के मैदानी इलाकों में अक्टूबर माह में ही लगेगी। लेकिन उसके लिए बी की बुकिंग पहले करनी पड़ती है। साथ ही अगर किसान मशरूम की खेती के लिए मशीन से बना हुआ कंपोस्ट प्राप्त करना चाहता है, तो इसकी भी बुकिंग विभाग के पास जाकर करवानी चाहिए। किसानों को बताना होगा कि उनको कितने लिफाफे कंपोस्ट के चाहिए, उसी हिसाब से विवाद फिर बंदोबस्त करता है।

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    28 दिन में तैयार होगा मशरूम का कंपोस्ट

    किसान अगर चाहे तो प्राइवेट व्यापारियों से भी बना बनाया कंपोस्ट प्राप्त कर सकते हैं जिसमें स्पान डालकर मशरूम की खेती की शुरुआत कर दी जाती है। अगर किसान मशीन का बना बनाया कंपोस्ट नहीं लेना चाहता और अपना खुद का कंपोस्ट बनाना चाहता है तो उसे भूसा चारा का अभी तुरंत बंदोबस्त कर लेना चाहिए। क्योंकि इसी भूसा चारा के जरिए ही कंपोस्ट बनेगा।

    इसके लिए किसानों को 28 दिन की प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ेगा। भूसा चारा गीला कर उसमें रसायन खाद मिलकर थोड़े-थोड़े दिन के बाद भूसा चार को पलटा देना होता है। रामलाल भगत ने बताया कि अच्छा रहेगा कि किसान मशीन से बना बनाया कंपोस्ट प्राप्त कर लें। इससे उसे कंपोस्ट बनाने की 28 दिन की लंबी और जटिल प्रक्रिया से छूट मिल जाएगी।

    तापमान की अच्छी जानकारी जरूरी

    किसान को खेती शुरू करने से पहले मशरूम की खेती के तापमान की अच्छी तरह से जानकारी होनी चाहिए। क्योंकि तापमान थोड़ा बहुत ऊपर गया, तो उसे कैसे संतुलित करना है इसके तरीके आने चाहिए। अगर तकनीकी जानकारी किसानों के पास नहीं है तो बेहतर होगा कि वह कृषि विभाग में जाकर मशरूम की खेती का प्रशिक्षण प्राप्त कर ले। इससे किसान को तमाम बातों का पता चल जाएगा।

    जम्मू में अक्टूबर में शुरू होगी मशरूम की खेती

    मशरूम की खेती बिल्कुल तकनीक से होती है और जरा सा तापमान ऊपर नीचे होने से यह खेती प्रभावित हो जाती है। इसलिए इस खेती का तकनीकी ज्ञान होना बहुत जरूरी है। अभी अक्टूबर महीने में जम्मू में यह खेती शुरू होगी, पहाड़ों में पहले शुरू हो जाती है। इसलिए अभी समय है सारी तैयारी करने का और प्रशिक्षण प्राप्त करने का। अधिक जानकारी के लिए किसान किसी विभाग जम्मू के मशरूम सेक्शन या स्कास्ट के कृषि विज्ञान केंद्र में भी संपर्क कर सकते हैं।

    कम लागत में घर से शुरू करें खेती

    जम्मू कृषि विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक रामलाल भगत ने बताया कि मशरूम की खेती रोजगार की दिशा में एक अच्छा रास्ता है। अब तो यह खेती बारहमासी भी हो गई है क्योंकि बटन मशरूम के बाद ढिंगरी मशरूम और उसके बाद गर्मियों में मिल्की मशरूम लगाई जा सकती है। बस मेहनतकश इंसान आगे आने चाहिए इस खेती में करने के लिए बहुत कुछ है। अगर कोई किसान छोटा किसान है तो वह छोटा किसान है तो वह जुगाड़ लगाकर घर के अंदर ही छोटा सा यूनिट लगा सकता है। उसको कम खर्च पर ही मशरूम मिलने लगेगी।

    बड़े काम का है किसान क्रेडिट कार्ड

    आप अगर किसान है और आपके पास किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) नहीं है तो फिर आप नुकसान ही उठा रहे हैं। क्योंकि यह सुविधा किसानों के लिए ही है। इसमें किसान को हर नई फसल पर बैंक से पैसा मिल जाता है और फसल आने पर कम ब्याज दी पर यह पैसा लौटाना होता है।

    मतलब यह कि किसानों को नई फसल लगाते समय खाद, बीज के खर्च के लिए पैसे की चिंता करने की जरूरत नहीं होती है। जिन किसानों के पास यह कार्ड नहीं है, वे कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।