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100% दिव्यांग सुभाष को 10 महीने से पेंशन का इंतजार, हिमाचल में कर्मचारी की गलती का खामियाजा भुगत रहा जरूरतमंद

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 08 Oct 2026 03:06 PM (IST)

ऊना के 100% दिव्यांग साहित्यकार सुभाष चंद पारस को कर्मचारी की गलती के कारण 10 माह से पेंशन नहीं मिली है, जिससे उनके जीवनयापन पर संकट आ गया है।

100 प्रतिशत सुभाष चंद पारस की 10 महीने से पेंशन बंद है।

100 प्रतिशत सुभाष चंद पारस की 10 महीने से पेंशन बंद है।

HighLights

  1. 100% दिव्यांग सुभाष को 10 माह से पेंशन नहीं मिली।

  2. कर्मचारी की ई-केवाईसी गलती से वृद्धावस्था पेंशन दर्ज हुई।

  3. पेंशन न मिलने से खानपान, दवा व देखभाल पर संकट।

जागरण संवाददाता, ऊना। पिछले 35 वर्ष से शत-प्रतिशत दिव्यांगता के कारण बिस्तर पर पड़े 49 वर्षीय साहित्यकार सुभाष चंद पारस को 10 माह की पेंशन कर्मचारी की गलती के कारण नहीं मिल पाई है। अधिकारियों ने भी पेंशन के लिए गुहार अभी तक नहीं सुनी है। पेंशन बंद होने से उनके खानपान, दवा से लेकर देखरेख आदि के खर्च पर भी संकट आ गया है। 

वित्तीय वर्ष 2026 में कल्याण विभाग की ओर से पेंशन बंद किए जाने के बाद सुभाष ने उपायुक्त को प्रार्थना पत्र भेजकर पेंशन शुरू करवाने की गुहार लगाई है। कल्याण विभाग के अधिकारियों के समक्ष भी समस्या के समाधान की बात रखी है। सुभाष चंद ने करीब 10 पुस्तकें लिखी हैं व काव्य गोष्ठियों में ऑनलाइन शामिल होते हैं।

दिव्यांग श्रेणी की जगह वृद्धावस्था कर दिया दर्ज

सुभाष को पेंशन न मिलने के पीछे समस्या ई-केवाईसी करने के दौरान कर्मचारी की बरती लापरवाही है। प्रक्रिया को पूर्ण करते समय सुभाष की दिव्यांग श्रेणी की जगह वृद्धावस्था पेंशन का नामांकन दर्ज कर दिया। परिणामस्वरूप संबंधित कर्मी ने उनके दस्तावेज में आयु को देखते हुए ई-केवाईसी के बाद दर्ज नामांकन को ही साफ्टवेयर से हटा दिया। दो दशक से उन्हें नियमित रूप से दिव्यांगता पेंशन मिल रही थी।

सातवीं कक्षा से बिस्तर पर

सुभाष बताते हैं कि सातवीं कक्षा के दौरान पांव से शुरू हुए रोग के कारण पूरी तरह बिस्तर पर हैं। रोटी, पानी, दवा लेने से लेकर करवट बदलने तक के लिए परिवार पर निर्भर हैं। विभाग की ओर से उनकी पेंशन को पोर्टल से भी हटा दिया गया है। प्रति माह 1700 रुपये पेंशन मिलती थी। अब उन्हें घर का गुजारा और दवाओं का खर्च करना चुनौती बन गई है। ई-केवाईसी और आवश्यक सत्यापन भी करवाया है।

बुजुर्ग स्वजन कर रहे देखभाल

हरोली स्थित कल्याण विभाग के कार्यालय में कई बार जरूरी दस्तावेज दिखाए। पेंशन के अलावा परिवार की आय का कोई अन्य साधन नहीं है। वृद्ध और बीमार स्वजन उनकी देखभाल कर रहे हैं। 

सरकार से गुहार

आहत सुभाष ने सरकार से गुहार लगाई है कि परिवार को इच्छामृत्यु की अनुमति दे या दिव्यांगता पेंशन बहाल करे। पेंशन उनके लिए महज आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि जीवनयापन का मुख्य सहारा है। सुभाष चंद ने जिलाधीश से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए बंद की गई पेंशन तत्काल बहाल करवाने की मांग की है। 

ई-केवाईसी करते समय फील्ड कर्मचारी की ओर से सुभाष की श्रेणी को दिव्यांगता की जगह वृद्धावस्था करने से समस्या आई। इनकी कम आयु से साफ्टवेयर ने आवेदन डिलीट कर दिया। इसलिए तीन बार की पेंशन नहीं आई। पिछली रुकी पेंशन शायद न मिले, इसे लेने के लिए लंबी प्रक्रिया है। फौरी राहत के लिए उन्हें नए सिरे से आवेदन दिव्यांग श्रेणी में करने के लिए बोला गया है।
-आवास पंडित, जिला कल्याण अधिकारी, ऊना।

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