विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ईरान युद्ध का दवा उद्योग पर भी असर, कच्चा माल 40 प्रतिशत तक हुआ महंगा; ...तो जीवन रक्षक दवाओं का संकट खड़ा होगा?

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Updated: Wed, 11 Mar 2026 12:05 PM (IST)

पश्चिम एशिया में चल रहे अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण भारतीय दवा उद्योग पर गंभीर असर पड़ा है। दवाओं में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (एपीआई) की कीमतें 25 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं, जिससे दवा निर्माताओं की चिंता बढ़ गई है।

ईरान युद्ध का दवा उद्योग पर भी असर दिखने लगा है। प्रतीकात्मक फोटो

ईरान युद्ध का दवा उद्योग पर भी असर दिखने लगा है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. पश्चिम एशिया युद्ध से दवा उद्योग का कच्चा माल महंगा हुआ।

  2. एपीआई की कीमतें 25-40% बढ़ीं, उत्पादन लागत में वृद्धि।

  3. जीवन रक्षक दवाओं की कमी का संकट, सरकार से जांच की मांग।

सुनील शर्मा, सोलन। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर देश के दवा उद्योग पर भी पड़ने लगा है। दवाओं में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल (एपीआइ) 25 से 40 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। इससे उद्योगपतियों की चिंता बढ़ गई है। देश में दवाओं के उत्पादन पर प्रभाव पड़ रहा है।

एपीआइ के दाम में वृद्धि से फार्मा उद्यमियों के आर्डर को डिस्ट्रीब्यूटर व एपीआइ उत्पादकों ने रद कर दिया और नए दाम पर आर्डर देने को कहा है।

कच्चे माल की कीमतों में उछाल से स्थिति गंभीर 

हिमाचल प्रदेश ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के मुताबिक पहले व्यावसायिक सिलेंडर के दाम में बढ़ोतरी से उद्योगों पर आर्थिक दबाव बढ़ा था और अब दवाओं के कच्चे माल की कीमतों में उछाल ने स्थिति और गंभीर बना दी है। एपीआइ के दाम में बढ़ोतरी होने से सस्ती दवाएं बनाना लगभग नामुमकिन हो गया है। 

उद्योगों को हो सकता है नुकसान 

दवा कंपनियां सरकार द्वारा तय कीमतों के तहत ही जरूरी दवाओं का उत्पादन करती हैं, लेकिन कच्चे माल के दाम बढ़ने के बावजूद दवाओं की कीमत बढ़ाना संभव नहीं है। ऐसे में उद्योगों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि एपीआइ की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की जांच करवाई जाए। अधिकतर एपीआइ देश सहित चीन से आयात किया जाता है। 

पुराने दाम पर कच्चा माल देने से इन्कार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में तेजी और सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण दवा कंपनियों को महंगे दाम पर एपीआइ खरीदना पड़ रहा है। कई डिस्ट्रीब्यूटरों और सप्लायरों ने पुराने दाम पर कच्चा माल देने से इन्कार कर दिया है। इससे पैरासिटामोल, आइपीए, एमडीसी के कच्चे माल की कीमत में लगभग 36 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है।
मनीष ठाकुर, महासचिव, हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन।  

जीवन रक्षक दवाओं की हो सकती है कमी 

इस मामले में सरकार की ओर से नई अधिसूचना जारी नहीं हुई है, इसके बावजूद एपीआइ के दाम अचानक बढ़ा दिए हैं। यदि इसी तरह कीमतों में वृद्धि जारी रही तो दवा उत्पादन प्रभावित हो सकता है। आने वाले समय में जीवन रक्षक दवाओं की वैश्विक बाजार में कमी हो सकती है। 
संजय शर्मा, प्रवक्ता हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन। 

एपीआइ के पुराने व नए दाम

  • दवा,    पुराना दाम, नया दाम 
  • असिक्लोफिनेक,935,975 
  • पैरासिटामोल,255,310
  • क्लोरोग्जोन,710,880
  • एमडीसी,45,60
  • मिथाइलकोबलामिन,1.15 लाख,1.35 लाख 
  • पोटाशियम क्लेवुनेट,15000,17500
  • प्लेन पोली,360,390
  • बेस फ्वायल,410,450
  • पोलीबैग,114,170
  • पीवीसी,112,150
    (दाम प्रति किलो में)

यह भी पढ़ें: हिमाचल में बनेगा एक और फोरलेन, ऊना से रानीताल का सफर होगा सुगम, दूरी भी होगी कम