यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 27, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Himachal: मुख्यमंत्री राहत कोष में सौंप दी 11 करोड़ रुपये की संपत्ति, कौन है परवाणू में रहने वाला बागरिया दंपती?
Himachal Couple Donate Property हिमाचल प्रदेश के परवाणू में रहने वाले बागरिया दंपती ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 11 करोड़ ...और पढ़ें

HighLights
- वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री राहत कोष में संपत्ति दान करने के लिए बनाई थी वसीयत
- ट्रैक्टर उपकरण निर्माता कंपनी के मालिक नरेंद्र के बाद अब प्रोफेसर पत्नी का भी निधन
- जीवनभर सामाजिक कार्यों से जुड़े बागरिया दंपती ने मरने के बाद भी पेश की मिसाल
मनमोहन संधू, परवाणू (सोलन)। Himachal Couple Donate Property, जीवनभर सामाजिक कार्यों से जुड़े बागरिया दंपती ने मरने के बाद भी मिसाल पेश की है। दरअसल, नरेंद्र बागरिया ने वर्ष 2019 में ही एक वसीयत तैयार करवाई थी। इसमें उन्होंने लिखा था कि उनकी मृत्यु के बाद संपूर्ण संपत्ति पत्नी के नाम रहेगी, लेकिन पत्नी की मृत्यु के उपरांत यह पूरी संपत्ति मुख्यमंत्री राहत कोष को स्थानांतरित कर दी जाएगी।
परवाणू के सेक्टर चार में रहने वाले नरेंद्र बागरिया की मौत वर्ष 2019 में हो गई थी। अब 23 सितंबर को उनकी पत्नी शशि बागरिया का भी निधन हो गया। शशि के निधन के बाद करीब 11 करोड़ रुपये की संपत्ति अब मुख्यमंत्री राहत कोष में जाएगी।
संपत्ति में नकदी, कार, मकान, जमीन, बैंक लाकर, ज्वेलरी सहित अन्य संपत्ति शामिल है। नरेंद्र बागरिया की एक कंपनी थी जो आइशर ट्रैक्टर के उपकरण और पेंट बनाते थे, जबकि पत्नी कॉलेज में प्रोफेसर थीं।
दंपती ने दूसरों की सेवा को ही माना धर्म
बागरिया दंपती की कोई संतान नहीं थी। वह जीवनभर सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे और उन्होंने हमेशा दूसरों की सेवा को ही अपना धर्म माना। उनके पास मौजूद संपत्ति का आधिकारिक मूल्यांकन अभी किया जाना बाकी है।
प्रशासन ने शुरू की संपत्ति स्थानांतरण की प्रक्रिया
इस दान की जानकारी केयरटेकर ने प्रशासन को दी। जानकारी मिलते ही उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने तहसीलदार कसौली को वसीयत के अनुसार संपत्ति स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
समाजहित पर केंद्रित रही सोच
स्थानीय लोगों के अनुसार, बागरिया दंपती का जीवन बेहद सादगीपूर्ण था और उन्होंने संपत्ति कभी व्यक्तिगत विलासिता पर खर्च नहीं की। उनकी सोच हमेशा समाजहित और जरूरतमंदों की सहायता पर केंद्रित रही। ऐसे में उनकी यह अंतिम इच्छा भी समाज और राष्ट्र सेवा की भावना को उजागर करती है।
याद में स्मारक बनाने की उठी मांग
परवाणू विकास मंच के अध्यक्ष सतीश बेरी ने कहा कि बागरिया दंपती का यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने उपायुक्त सोलन से मांग की कि परवाणू में बागरिया दंपती की याद में कोई स्मारक या यादगार स्थापित की जाए।
