हिमाचल की पहाड़ी सड़कों पर हांफ गई HRTC की इलेक्ट्रिक बसें, कंपनी के दावे मुताबिक नहीं दे पा रहीं माइलेज
एचआरटीसी की इलेक्ट्रिक बसों को बेड़े में शामिल होने में देरी हो रही है क्योंकि ट्रायल में पहाड़ी क्षेत्रों में वे कंपनी के दावे के अनुसार 180 किलोमीटर ...और पढ़ें

हिमाचल के पहाड़ों पर इलेक्ट्रिक बसें हांफ गई हैं। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
इलेक्ट्रिक बसें पहाड़ी क्षेत्रों में कम माइलेज दे रही हैं।
डिलीवरी में देरी के कारण कंपनी पर भारी जुर्माना लगा।
कंपनी ने चिप की कमी को देरी का मुख्य कारण बताया।
अनिल ठाकुर, शिमला। इलेक्ट्रिक बसों के एचआरटीसी के बेड़े में शामिल होने में और देरी होगी। एचआरटीसी प्रबंधन की ओर से करवाए ट्रायल में बसों में कुछ तकनीकी खामी सामने आई है। कंपनी ने कहा था कि एक बार बैटरी चार्ज बस 180 किलोमीटर चलेगी। मैदानी क्षेत्रों में तो माइलेज ठीक आ रही है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में बसें इतनी माइलेज नहीं दे पा रही हैं।
एचआरटीसी ने प्रदेश में 36 स्थानों पर इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल करवाया है। एक बार बैटरी चार्ज करने पर कहीं इलेक्ट्रिक बस 167, कहीं 170 व और कहीं 175 किलोमीटर तक ही चल पाई।
रिपोर्ट कंपनी को भेजी
एचआरटीसी प्रबंधन ने इसकी रिपोर्ट कंपनी को भेज दी है। कंपनी को निर्देश दिए हैं कि माइलेज पूरी होने पर ही बसें ली जाएंगी। कंपनी को ये भी निर्देश दिए हैं कि इस महीने के अंतिम सप्ताह तक 100 बसें टेंडर में दर्शाई शर्तों को पूरा करते हुए भेज दें। बसों की डिलीवरी में कंपनी जितनी देर करेगी उन पर जुर्माना उतना ज्यादा लगेगा। कंपनी ने आश्वस्त किया है कि इसे ठीक कर दिया जाएगा।
42 करोड़ रुपये से ज्यादा का लग चुका है जुर्माना
297 इलेक्ट्रिक बसों की डिलीवरी तय समय पर न करना कंपनी पर भारी पड़ रहा है। एचआरटीसी ने टेंडर में तय की शर्तों के अनुसार बसों की डिलीवरी न करने पर कंपनी पर जुर्माना तय कर दिया है। टेंडर की कुल लागत का 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया जा सकता है। 424.01 करोड़ रुपये का टेंडर है। करीब 42 करोड़ रुपये जुर्माना कंपनी पर अभी तक बन गया है।
कंपनी का क्या है तर्क
कंपनी ने तर्क दिया है कि ई-बसों की बैटरी में एक चिप लगती है जो कि चीन में बनती है। चिप आने में हो रही देरी की वजह से ही मामला लटका है। एचआरटीसी के अधिकारी मान रहे हैं कि कंपनी ने जो तर्क दिए हैं वे वाजिब हैं, लेकिन प्रबंधन टेंडर में निहित शर्तों पर अड़ा है। अब यदि इसमें कोई बदलाव होता है तो निगम प्रबंधन पर सवाल उठ सकते हैं।
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11 महीने का समय दिया था
2025 में ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड को 297 बसों की खरीद का आर्डर जारी किया था। 424.01 करोड़ रुपये का टेंडर है। कंपनी ने 11 महीने में यह आर्डर पूरा करने का आश्वासन दिया था। कंपनी को नौ जनवरी तक 50 प्रतिशत यानी 149 बसों की डिलीवरी करनी थी, जिसमें कंपनी सफल नहीं हुई है।
एचआरटीसी में है बसों की कमी
एचआरटीसी में बसों की कमी है। एचआरटीसी ने हाल ही में अपने बेड़े से 100 से ज्यादा पुरानी बसों को हटा दिया है। अभी 150 के करीब बसें ऐसी हैं, जिनकी स्थिति बेहद खराब है। ये 10 से 12 वर्ष पुरानी हैं। बसें न आने से निगम इन्हें मजबूरी में चला रहा है।
बसों का ट्रायल प्रदेश में 36 स्थानों पर करवाया गया है। टेंडर में कंपनी ने एक बार बैटरी चार्ज करने पर 180 किलोमीटर की माइलेज देने की बात कही है। कुछ स्थानों पर यह माइलेज ट्रायल में कम आई है। कंपनी को इसे ठीक करने के निर्देश दिए हैं। इस महीने के अंत तक कंपनी 100 बसें भेज देगी।
-अजय वर्मा, उपाध्यक्ष एचआरटीसी।
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