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    'हिमाचल सरकार ने राहत के बजाय आर्थिक संकट में डाल दिया', वेतन कटौती पर शिक्षकों की चेतावनी; क्या कहते हैं पूर्व अधिकारी

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Mon, 23 Mar 2026 11:50 AM (GMT+05:30)

    हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ ने सरकार के वेतन कटौती के निर्णय का विरोध किया है। संघ ने इसे कर्मचारी विरोधी और तानाशाही बताया, जिससे श ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश में वेतन कटौती का विरोध शुरू हो गया है। प्रतीकात्मक फोटो

    हिमाचल प्रदेश में वेतन कटौती का विरोध शुरू हो गया है। प्रतीकात्मक फोटो

    HighLights

    1. शिक्षक संघ ने वेतन कटौती को कर्मचारी विरोधी बताया।

    2. लंबित महंगाई भत्ता और यूजीसी एरियर जारी करने की मांग।

    3. सरकार के निर्णय के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी।

    जागरण टीम, शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकार के वेतन कटौती के निर्णय का विरोध शुरू हो गया है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ ने सरकार से बजट में ए और बी श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन का प्रतिमाह तीन प्रतिशत हिस्सा स्थगित करने के निर्णय को वापस लेने की मांग की है। संघ ने इस निर्णय को कर्मचारी विरोधी और तानाशाही रवैया बताया है। इससे शिक्षकों व कर्मचारियों के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

    आर्थिक संकट में डाल दिया

    संघ के महासचिव डा. नितिन व्यास ने कहा कि महंगाई के इस दौर में वेतन स्थगित करने का निर्णय असंवेदनशील है। सरकार को कर्मचारियों को राहत देने के उपाय करने चाहिए थे, न कि उनके वेतन में कटौती कर आर्थिक संकट में डालना चाहिए। कर्मचारियों का 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता लंबे समय से लंबित है, जिसे तुरंत जारी किया जाना चाहिए। 

    यूजीसी वेतनमान का एरियर नहीं मिला

    संघ ने 2016 के यूजीसी वेतनमान के एरियर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अधिकांश राज्यों में इसका भुगतान हो चुका है, जबकि प्रदेश में यह अब तक लंबित है। संघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द वेतन स्थगित करने का निर्णय वापस नहीं लिया और लंबित मांगों को पूरा नहीं किया तो शिक्षक और कर्मचारी आंदोलन करेंगे।

    प्रदेश सरकार चाहे तो स्थगित कर सकती है वेतन पर रोक

    16वें वित्तायोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद करने के बाद शनिवार को प्रस्तुत बजट में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कर्मचारियों के वेतन में तीन से 30 प्रतिशत तक स्थगन करने की घोषणा की है। कर्मचारियों के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में वेतन और वित्तीय लाभों पर अस्थायी रोक का प्रविधान है। इस निर्णय पर पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों के अलग-अलग मत है।

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    क्या कहते हैं पूर्व अधिकारी

    किसी भी कर्मचारी के वेतन पर स्थायी या फिर अस्थायी तौर पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्थिति में ही वेतन कटौती हो सकती है। प्रदेश सरकार को कर्मचारियों के वेतन की कुछ राशि पर आंशिक रोक लगाने के साथ-साथ राज्य के लिए दीर्घकालीन योजना पर तत्परता से काम करना होगा। 
    -डा. श्रीकांत बाल्दी, पूर्व मुख्य सचिव।

    प्रदेश सरकार ने राज्य की गंभीर वित्तीय स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों के वेतन पर केवल छह माह के रोक लगाई है। सरकार चाहे तो इस तरह की रोक लगा सकती है और हालत सुधरने के बाद बकाया भुगतान किया जा सकता है। कोरोनाकाल में भी कर्मचारियों का देय डीए आपातकालीन परिस्थितियों को देखते हुए आगे कर दिया गया था।
    -डा. दीपक शानन, पूर्व वरिष्ठ आइएएस अधिकारी।

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