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शिमला पुलिस विवाद पर CM सुक्खू ने DGP से मांगी रिपोर्ट, हिमाचल में क्यों कमजोर पड़ा खुफिया नेटवर्क? दूसरी बार लगा चकमा

By Chaitanya Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 26 Feb 2026 05:58 PM (IST)Updated: Thu, 26 Feb 2026 06:31 PM (IST)

मुख्यमंत्री सुक्खू ने रोहड़ू में दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर खुफिया चूक को लेकर डीजीपी से रिपोर्ट मांगी ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने डीजीपी से पुलिस विवाद पर रिपोर्ट मांगी है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने डीजीपी से पुलिस विवाद पर रिपोर्ट मांगी है।

HighLights

  1. मुख्यमंत्री ने खुफिया चूक पर डीजीपी से रिपोर्ट मांगी।

  2. दिल्ली पुलिस ने बिना सूचना रोहड़ू में गिरफ्तारी की।

  3. सीआईडी में फेरबदल से कमजोर हुआ खुफिया तंत्र।

जागरण संवाददाता, शिमला। खुफिया एजेंसी की बड़ी चूक के कारण एआई समिट प्रदर्शन में शामिल तीन प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी का मामला हिमाचल में प्रशासनिक विवाद का कारण बन गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वीरवार को मुख्यमंत्री ने सचिवालय में डीजीपी से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली। सरकार ने इस बात पर चिंता जताई कि बाहरी राज्य की पुलिस टीम प्रदेश के कई हिस्सों से गुजरती हुई रोहड़ू तक पहुंच गई, लेकिन खुफिया स्तर पर पूर्व इनपुट उपलब्ध नहीं था।

सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सूचना तंत्र को मजबूत करने और बेहतर समन्वय के निर्देश दिए हैं।

दिल्ली पुलिस की 13 सदस्यीय टीम आईपीएस अफसर राहुल विक्रम की अगुवाई में परवाणु से दाखिल होते हुए तड़के रोहड़ू स्थित एक रिजोर्ट तक पहुंच गई, लेकिन प्रदेश की खुफिया इकाई को इसकी समय रहते कोई जानकारी नहीं मिल पाई।

यही सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरा है कि बाहरी राज्य की पुलिस टीम की आवाजाही का इनपुट आखिर क्यों नहीं जुटाया जा सका और निगरानी तंत्र कहां कमजोर पड़ा।

मुख्य सचिव से डीजीपी की बैठक

हिमाचल व दिल्ली पुलिस के बीच हुए घटनाक्रम मामले पर वीरवार को राज्य सचिवालय में बैठक हुई। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने डीजीपी को सचिवालय बुलाया। डीजीपी अशोक तिवारी सुबह 10:30 राज्य सचिवालय पहुंचे। करीब आधे घंटे तक दोनों के बीच बैठक हुई। डीजीपी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई।

सीआईडी में फेरबदल से कमजोर हुआ नेटवर्क

सूत्रों के अनुसार हाल के महीनों में सीआईडी में बड़े स्तर पर फेरबदल किए गए हैं। करीब सौ से अधिक कर्मचारियों को हटाकर अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया गया, जबकि उनकी जगह नया स्टाफ तैनात किया गया है, जो थानों और चौकियों से लिया गया है। अनुभवी कर्मियों की कमी और कमजोर जमीनी नेटवर्क को इस चूक का प्रमुख कारण माना जा रहा है। 

अधिकारियों का मानना है कि सूचना संकलन और अंतरराज्यीय समन्वय में ढील के कारण समय रहते अलर्ट जारी नहीं हो सका, जिसकी जिम्मेदारी खुफिया तंत्र की आंतरिक निगरानी प्रणाली पर भी आ रही है।

बिना सूचना हिरासत से बढ़ा अधिकार क्षेत्र विवाद

दिल्ली पुलिस की टीम एसीपी राहुल विक्रम के नेतृत्व में तीन गाड़ियों में तड़के रोहड़ू पहुंची और बिना स्थानीय पुलिस को औपचारिक सूचना दिए तीन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। जब इस कार्रवाई की जानकारी शिमला पुलिस को मिली, तो तुरंत शहर और आसपास के क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी गई। आईएसबीटी शिमला, शोघी और धर्मपुर में नाकाबंदी कर विशेष जांच अभियान चलाया गया और संबंधित गाड़ियों को रोककर शिमला लाया गया। इसके बाद दोनों राज्यों की पुलिस के बीच अधिकार क्षेत्र और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई।

शिमला पुलिस की सतर्कता से संभली स्थिति

जैसे ही गिरफ्तारी की सूचना मिली, शिमला पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नाके लगा दिए और गाड़ियों की जांच शुरू की। पुलिस की सतर्कता के कारण टीम की मूवमेंट ट्रेस हो सकी और स्थिति नियंत्रण में रही। बताया जा रहा है कि यदि टीम त्यूणी मार्ग से उत्तराखंड सीमा की ओर निकल जाती, तो प्रदेश पुलिस के लिए कार्रवाई करना कठिन हो सकता था। ऐसे में समय पर की गई चौकसी से प्रशासन की संभावित किरकिरी टल गई।

राज्यसभा चुनाव में भी उठा था सवाल

राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग की घटना में भी समय रहते सटीक राजनीतिक इनपुट सामने नहीं आ पाए थे, जिससे खुफिया व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए थे। विधायकों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद कांग्रेस चुनाव हार गई व बीजेपी के उम्मीदवार हर्ष महाजन जीत गए। 

रोहड़ू गिरफ्तारी मामला

दिल्ली पुलिस की टीम का प्रदेश में प्रवेश, कई जिलों से गुजरना और सीधे रोहड़ू पहुंचकर कार्रवाई करना, जबकि खुफिया इकाई को पूर्व सूचना न होना, सूचना नेटवर्क में समन्वय की कमी का ताजा उदाहरण माना जा रहा है।

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