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    हिमाचल सरकार ने दिया 78 प्रतिशत इंक्रीमेंट, जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर का वेतन 33,660 से सीधे 60 हजार रुपये हुआ

    By Chaitanya Thakur Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Wed, 05 Aug 2026 05:21 PM (IST)

    हिमाचल सरकार ने जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर (स्पेशलिस्ट) और कॉन्ट्रैक्ट मेडिकल ऑफिसरों का मासिक वेतन 78% बढ़ाकर ₹33,660 से ₹60,000 कर दिया है। ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर का वेतन 78% बढ़ा।

    2. मासिक वेतन ₹33,660 से बढ़कर ₹60,000 हुआ।

    3. विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने में सहायक।

    जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर का वेतन 78 प्रतिशत बढ़ा दिया है। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने और उन्हें सरकारी सेवा में बनाए रखने की दिशा में सुक्खू सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। पहले पीजी डॉक्टरों, सीनियर रेजिडेंट और सुपर स्पेशलिस्ट का स्टाइपेंड बढ़ाने के बाद अब सरकार ने जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर (स्पेशलिस्ट) और कॉन्ट्रेक्ट मेडिकल ऑफिसरों के वेतन में 78 प्रतिशत की ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर दी है।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर (स्पेशलिस्ट) का मासिक वेतन 33,660 रुपये से बढ़ाकर सीधे 60 हजार रुपये प्रतिमाह करने को मंजूरी दी है। लंबे समय से कम मानदेय को लेकर उठ रही मांगों के बीच आए इस फैसले को विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों की कमी दूरी करने के लिए की है तैनाती

    प्रदेश में जॉब ट्रेनी स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्तियां विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी पूरी करने के उद्देश्य से की गई थीं, लेकिन नियुक्ति के बाद से ही कम वेतन सबसे बड़ा मुद्दा बना रहा। 

    वेतन को लेकर उठ रहे थे सवाल

    डॉक्टरों का कहना था कि एमडी, एमएस और अन्य स्पेशलिस्ट डिग्रियां हासिल करने के बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय न तो उनकी योग्यता के अनुरूप है और न ही पड़ोसी राज्यों व निजी अस्पतालों के बराबर। यही वजह रही कि कई डॉक्टर निजी क्षेत्र या अन्य राज्यों की ओर रुख कर रहे थे। पिछले लंबे समय से डॉक्टर बेहतर वेतन की मांग सरकार के समक्ष उठा रहे थे।

    स्टाइपेंड बढ़ा चुकी है सरकार

    यह पहली बार नहीं है जब सुक्खू सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में डॉक्टरों के हित में बड़ा वित्तीय फैसला लिया हो। इससे पहले सरकार मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई कर रहे डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ा चुकी है। प्रथम वर्ष के पीजी डॉक्टरों का स्टाइपेंड 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये, द्वितीय वर्ष का 45 हजार से बढ़ाकर 60 हजार रुपये तथा तृतीय वर्ष का 50 हजार से बढ़ाकर 65 हजार रुपये किया गया था।

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    रेजिडेंट का स्टाइपेंड भी बढ़ाया

    इसके अलावा सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर स्पेशलिस्ट का मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर एक लाख रुपये तथा सुपर स्पेशलिस्ट और सीनियर रेजिडेंट (सुपर स्पेशलिस्ट) का स्टाइपेंड 1.30 लाख रुपये प्रतिमाह किया गया।

    2022 में भी हुई थी बढ़ोतरी

    वर्ष 2022 में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर (स्पेशलिस्ट) का मानदेय लगभग 27 हजार रुपये से बढ़ाकर 33,660 रुपये किया गया था। अब मौजूदा सरकार ने इसमें सीधे 78 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए इसे 60 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इससे विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    क्या कहना है सीएम सुक्खू का

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में हैं। पिछले साढ़े तीन वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। सरकार एक ओर अस्पतालों में आधुनिक तकनीक, नई मशीनें और चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार कर रही है, वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की कमी दूर करने के लिए भी लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

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