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    हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कैप्टिव डीजल जेनरेटर से पैदा बिजली पर नहीं लगेगा टैक्स

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 10:08 AM (GMT+05:30)

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि औद्योगिक उपभोक्ता अपने लिए डीजल जेनरेटर से बनाई बिजली पर राज्य सरकार को टैक्स नहीं देंगे। ...और पढ़ें

    डीजल जेनरेटर से अपने लिए बनाई बिजली पर टैक्स वसूली अवैध (फाइल फोटो)

    डीजल जेनरेटर से अपने लिए बनाई बिजली पर टैक्स वसूली अवैध (फाइल फोटो)

    विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने औद्योगिक व अन्य उपभोक्ताओं को राहत देते हुए साफ किया है कि डीजल जेनरेटर या किसी अन्य साधन से केवल अपने लिए पैदा की बिजली पर राज्य सरकार बिजली ड्यूटी (टैक्स) नहीं वसूल सकती।

    अदालत ने हिमाचल प्रदेश बिजली (ड्यूटी) अधिनियम, 2009 की धारा 3(1)(xi) को अवैध पाते हुए रद कर दिया है। यह निर्णय न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर व न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मेसर्स रुचिरा पेपर्स लिमिटेड की ओर से दायर रिट याचिका को स्वीकार करते हुए सुनाया।

    याचिकाकर्ता ने कोर्ट में सरकार के उस कानून को चुनौती दी थी, जिसके तहत खुद के उपयोग के लिए जेनरेटर से बनाई गई बिजली पर टैक्स लगाया जा रहा था। सरकार ने पहली सितंबर 2023 को अधिसूचना जारी कर डीजल जेनरेटर से पैदा होने वाली बिजली पर टैक्स की दर को 30 पैसे प्रति यूनिट से बढ़ाकर 45 पैसे प्रति यूनिट कर दिया था।

    कंपनी का तर्क था कि बिजली बोर्ड के कट लगाने के कारण मिल को नुकसान से बचाने के लिए उन्हें मजबूरन डीजल जेनरेटर से तीन गुना महंगी बिजली बनानी पड़ती है। ऐसे में बोर्ड की नाकामी की सजा उपभोक्ता को टैक्स लगाकर नहीं दी जा सकती।

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    कंपनी का मुख्य कानूनी तर्क यह था कि एक्ट की मूल "चार्जिंग धारा-3" (टैक्स लगाने का मुख्य अधिकार) केवल बिजली बोर्ड, लाइसेंसधारी या बिजली उत्पादक कंपनियों द्वारा बेची या खुद इस्तेमाल की जाने वाली बिजली पर ही टैक्स लगाने की इजाजत देती है। विभाग ने कहा कि डीजल जेनरेटर भारी वायु प्रदूषण फैलाते हैं।

    इस टैक्स का उद्देश्य दंडात्मक नहीं, बल्कि नियामक कदम है ताकि उद्योग ग्रीन और रिन्यूएबल एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) की तरफ बढ़ें। अदालत ने दोनों पक्षों की जिरह और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों (जैसे स्वरूप वेजिटेबल्स और जेआर काटन मिल्स) का गहन अध्ययन करने के बाद सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2009 के अधिनियम की मुख्य धारा-3 के तहत बिजली ड्यूटी तभी लग सकती है जब बिजली या तो बोर्ड/लाइसेंसधारी द्वारा खुद खपत की जाए, या उनके द्वारा किसी उपभोक्ता को "सप्लाई (बेची)" की जाए।