हिमाचल हाई कोर्ट की पंचायत पुनर्गठन पर सख्त टिप्पणी, ...यह समझ से परे; चुनाव के बजाय और ही काम में लगी सरकार
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पंचायत चुनावों से ठीक पहले नई पंचायतों के गठन और पुरानी के पुनर्गठन पर सरकार की कड़ी आलोचना की है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव सिर पर हैं, फिर भी सरकार निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण में लगी है।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
हाई कोर्ट ने पंचायत पुनर्गठन पर सरकार को फटकारा।
चुनाव से ठीक पहले सीमा निर्धारण पर उठाए सवाल।
मनलोग बड़ोग मामले में सरकारी अधिसूचना रद्द की।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पंचायत चुनावों के अंतिम समय पर नई पंचायतों के गठन और पुरानी के पुनर्गठन को लेकर जारी की जा रही अधिसूचनाओं पर सरकार के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पंचायत चुनाव सिर पर आ गए हैं और सरकार अभी भी पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण में लगी हुई है।
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि वे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि जब पंचायती राज संस्थाओं का 5 साल का समय पहले ही खत्म हो चुका है। सरकार संविधान के आदेश से बंधी हुई है और चुनाव प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 31 मई तक पूरा किया जाना है, तो सरकार बड़े पैमाने पर वार्ड, पंचायती राज संस्थाओं को फिर से बनाने और नई पंचायतों का गठन करने का काम क्यों कर रही है।
इरादे के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है
सरकार ने यह काम समय पर नहीं किया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार की तरफ से ऐसा करने से इसके इरादे के बारे में गलत अंदाजा लगाया जा सकता है। राज्य सरकार को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिसे पंचायत चुनाव में देरी करने का तरीका या टालमटोल माना जा सकता है, समय की कमी के कारण, जल्दबाजी में लिए गए फैसले जानबूझकर या अनजाने में कमी छोड़ देते हैं और जिससे न्यायिक पुनरीक्षण में अदालत द्वारा दखल की गुंजाइश बनी रहती है।
मनलोग बड़ोग के लोगों याचिका पर संज्ञान
कोर्ट ने यह टिप्पणी अर्की तहसील के अंतर्गत आने वाली पंचायत हनुमान बड़ोग के वार्ड मनलोग बड़ोग को दाडलाघाट पंचायत में शामिल करने के खिलाफ दायर याचिका को स्वीकारते हुए की। मनलोग बड़ोग के नेहरू युवा क्लब एवं महिला मंडल द्वारा सरकार की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी।
यह कार्रवाई बेमतलब
कोर्ट ने इस अधिसूचना को सभी नतीजों के साथ रद्द कर दिया, जिसमें मनलोग बड़ोग गांव को पंचायत हनुमान बड़ोग से हटाने के बाद, ग्राम पंचायत दाड़लाघाट में शामिल करने की सूचना दी गई थी। कोर्ट ने याचिका को स्वीकारते हुए कहा कि गांव मनलोग बड़ोग को ग्राम पंचायत हनुमान बडोग से हटाने और ग्राम पंचायत दाडलाघाट में शामिल करने की सरकार की विवादित कार्रवाई साफ तौर पर मनमानी, गलत, बेमतलब और मौके पर मौजूद तथ्यों के खिलाफ है।

