हिमाचल में पंचायत चुनाव के बाद जनगणना करेंगे शिक्षक, कई स्कूलों के 10 से 12 टीचर की लगा दी ड्यूटी
हिमाचल प्रदेश में शिक्षकों को चुनावी और जनगणना जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने से स्कूलों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। शिक्षा विभाग ...और पढ़ें

पंचायत चुनाव के बाद शिक्षकों की जनगणना में ड्यूटी लगेगी। प्रतीकात्मक फोटो
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शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी से मई में पढ़ाई बाधित।
जून में जनगणना कार्य में लगेंगे 12 हजार शिक्षक।
गैर-शैक्षणिक कार्यों से छात्रों की शिक्षा पर असर।
राज्य ब्यूरो, शिमला। बेशक गुणात्मक सुधार के लिए शिक्षा विभाग कई कदम उठा रहा है, बावजूद इसके इन दिनों स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था चरमराई हुई है। इसका मुख्य कारण शिक्षकों को गैरशैक्षणिक कार्यों में तैनात किया जाना है। मई माह में चुनावी ड्यूटी के कारण शिक्षकों की उपस्थिति में कमी आ रही है तो जून में जनगणना कार्य में भी उन्हें जुटना होगा। शिक्षा विभाग इस स्थिति से चिंतित है, लेकिन चुनाव और जनगणना ड्यूटी से इन्कार करने की स्थिति में नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य के विभिन्न स्कूलों से दो या तीन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है, जबकि कुछ स्कूलों में 10 से 12 शिक्षकों को भी तैनात किया गया है।
कांगड़ा के एक स्कूल में 22 शिक्षक कार्यरत हैं, जहां से 16 शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी लगाई गई है। यदि शिक्षकों की मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (एसआइआर) में भी उन्हें लगाया गया, तो स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी।
23 हजार शिक्षक चुनावी ड्यूटी पर
प्रदेश में 23 हजार शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी लगी है। हाल ही में 51 शहरी निकायों के चुनाव संपन्न हुए हैं, और अब तीन चरणों में पंचायत चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों के परिणाम 31 मई को घोषित होंगे। चुनावी ड्यूटी लगने के बाद शिक्षकों को ट्रेनिंग भी दी जाती है, जिससे मई माह में वे लगभग 20 दिनों तक इस कार्य में व्यस्त रहेंगे। इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ रहा है।
जनगणना में भी लगेगी ड्यूटी
हिमाचल में जनगणना अभियान पहली जून से शुरू होने जा रहा है, जो दो चरण में होगा। इसमें शिक्षकों सहित विभिन्न विभाग के करीब 19 हजार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी, इनमें 12 हजार शिक्षक होंगे।
हिमाचल में 9742 प्राइमरी, 1732 माध्यमिक, 962 उच्च और 1988 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें लगभग 80 हजार शिक्षक कार्यरत हैं।
सबसे ज्यादा लगती है शिक्षकों की ड्यूटी
चुनावी और जनगणना जैसे कार्यों में सबसे अधिक शिक्षकों की ड्यूटी लगती है। ये कार्य शिक्षकों द्वारा बेहतर तरीके से किए जाते हैं, क्योंकि उनके पास फील्ड में कार्य करने का अनुभव होता है। जेओएआइटी सहित अन्य श्रेणी के कर्मचारी भी इन कार्यों में शिक्षकों के साथ सहयोगी के रूप में लगाए जाते हैं।
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अन्य कर्मियों की व्यवस्था करने की मांग
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि सरकार को इन कार्यों के लिए अन्य विभागों से अधिक कर्मचारियों की तैनाती करनी चाहिए, ताकि स्कूलों पर पड़ने वाला दबाव कम हो सके। अधिकारियों का कहना है कि कई स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है। यदि विज्ञान या गणित के शिक्षक को इन ड्यूटियों में भेजा गया, तो उनकी जगह तुरंत दूसरा शिक्षक मिलना मुश्किल होता है। लंबी अनुपस्थिति का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और सीखने की प्रक्रिया पर पड़ता है।
ऐसे लगती है ड्यूटी
राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत और शहरी निकाय चुनावों का आयोजन करता है। उपायुक्त, जो जिला निर्वाचन अधिकारी होते हैं, वे जिला स्तर पर चुनावी प्रबंधन का कार्य देखते हैं। बीडीओ की तरफ से सभी विभागों और स्कूलों को पत्र भेजा जाता है, जिसमें स्टाफ की स्थिति और चुनावों के लिए नाम मांगे जाते हैं। नाम आने के बाद ड्यूटियां लगाई जाती हैं।
86712 कर्मचारी चुनाव में दे रहे ड्यूटी
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार प्रदेश में 3754 पंचायतों में 21678 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 86712 कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है। ड्यूटियां जिला स्तर पर लगती है। सभी विभागों से इसमें कर्मचारियों को शामिल किया जाता है।
शिक्षक स्वयं भी मतदान से रहेंगे वंचित
पंचायत चुनाव में लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए फील्ड में उतरे हजारों अधिकारी और कर्मचारी स्वयं मतदान से वंचित रहेंगे। 86712 कर्मचारियों के अलावा सुरक्षा कर्मी भी तैनात होंगे ये स्वयं मतदान नहीं कर पाएंगे। इसका कारण इस बार डाक मतपत्र की व्यवस्था का न होना है।
शिक्षकों की गैर शैक्षिक कार्यों में ड्यूटी लगने से पढ़ाई प्रभावित होती है। स्कूलों में काम्लेक्स प्रणाली लागू की है। प्रधानाचार्यों को वैकल्पिक व्यवस्था बनाने को कहा गया है। विभाग का प्रयास है कि शिक्षकों की कम से कम ड्यूटी गैर शैक्षिक कार्यों में लगे और ज्यादा समय वे बच्चों को पढ़ाने में लगाएं।
-आशीष कोहली, निदेशक स्कूल शिक्षा विभाग।
विभाग से आग्रह किया था कि कम से कम शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी लगाई जाए। चुनाव व जनगणना सहित विशेष अभियान में 50 प्रतिशत स्टाफ स्कूलों से ही लिया जाता है। यह प्रथा ही गलत है। अन्य विभागों में भी कर्मचारी है उन्हें भी तैनात किया जाना चाहिए। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।
-वीरेंद्र चौहान, अध्यक्ष, राजकीय अध्यापक संघ।
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