CAG Report: हिमाचल का राजकोषीय घाटा तय सीमाओं के पार, सैलरी-पेंशन और सब्सिडी पर खर्च हो रहा 86 प्रतिशत राजस्व
कैग रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश का राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमाओं को पार कर गया है, जिसमें 86% राजस्व वेतन, पेंशन और सब्सिडी पर खर्च हो रहा है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में कैग रिपोर्ट रखी।
HighLights
राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमाओं से काफी ऊपर पहुंचा।
86% राजस्व वेतन, पेंशन और सब्सिडी पर खर्च।
पूंजीगत निवेश हेतु नाममात्र बजट, अनुच्छेद 266 का उल्लंघन।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार के व्यवस्था परिवर्तन के ध्येय के साथ प्रदेश की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के प्रयासों के बीच भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने अपनी रिपोर्ट में चिंताजनक तस्वीर पेश की है। कैग ने तेजी से बढ़ते ऋण पर प्रश्न खड़े किए हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की चिंताजनक रिपोर्ट को मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में पेश किया।
वित्त वर्ष 2024-25 की इस रिपोर्ट में राज्य का राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमाओं को पार कर गया है और विकास कार्यों (पूंजीगत व्यय) के लिए सरकार के पास बजट नाममात्र का रह गया है।
राज्य का राजस्व घाटा 6,804.61 करोड़ रुपये (जीएसडीपी का 2.94 प्रतिशत) तक पहुंच गया है। वहीं, राजकोषीय घाटा 12,611.05 करोड़ रुपये (जीएसडीपी का 5.44 प्रतिशत) हो गया है।
सरकार इन घाटों को राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम के निर्धारित लक्ष्यों के भीतर रखने में विफल रही है। राज्य की बकाया देयताएं भी 15वें वित्त आयोग के लक्ष्यों और राज्य के बजट अनुमानों से काफी अधिक रही हैं।
86 प्रतिशत हिस्सा वेतन-पेंशन पर जा रहा
रिपोर्ट में ये उल्लेख किया गया है कि राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का 86 प्रतिशत हिस्सा केवल वेतन, पेंशन और उपदान चुकाने पर खर्च हो रहा है। इनमें से वेतन-पेंशन 70 प्रतिशत पर खर्च हो रहा। कैग ने बिजली उपदान और ऋण राहत उपायों पर बढ़ते खर्च पर सरकार की कार्य प्रणाली पर प्रश्न लगाया है। बुनियादी ढांचे के विकास और पूंजीगत निवेश के लिए सिर्फ 14 प्रतिशत धनराशि ही उपलब्ध है।
जीडीपी में राज्य का घटता योगदान चिंताजनक
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य की अर्थव्यवस्था में 9.20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत की जीडीपी में हिमाचल का योगदान 0.70 प्रतिशत रहा है। हालांकि, पिछले पांच वर्षों में देश की जीडीपी में राज्य के योगदान में गिरावट आई है, जिसे कैग ने चिंता का विषय बताया है। जीएसटी और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के कारण राज्य की राजस्व प्राप्तियों में 4.34 प्रतिशत और कर-भिन्न राजस्व में 22.40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद, राज्य अब भी केंद्रीय अनुदानों पर बहुत अधिक निर्भर है।
सब्सिडी और प्रतिबद्ध खर्चों ने तोड़ी कमर
राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का 86 प्रतिशत हिस्सा केवल प्रतिबद्ध लागत (वेतन, पेंशन आदि) और सब्सिडी पर खर्च हो रहा है। इनमें से अकेली प्रतिबद्ध लागत ही कुल राजस्व व्यय का 70 प्रतिशत है।
बिजली सब्सिडी और ऋण राहत उपायों के कारण सब्सिडी का खर्च भारी मात्रा में बढ़ा है। नतीजतन, बुनियादी ढांचे के विकास और पूंजीगत निवेश के लिए सीमित बजट बच रहा है, जिससे निवेश में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
संविधान के अनुच्छेद 266 का उल्लंघन
बजट प्रबंधन की कमियों को उजागर करते हुए कैग ने एक गंभीर खुलासा किया है। दुग्ध उपकर, पर्यावरण उपकर और भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर जैसी निधियों को सरकारी खाते से बाहर रखा गया है। कैग के अनुसार, यह सीधे तौर पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 266 के प्रावधानों का उल्लंघन है।
इसके अलावा, स्थानीय निकायों, विभागीय उपक्रमों और स्वायत्त निकायों द्वारा उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) देने में देरी की जा रही है। व्यय के मानक उद्देश्य 20 (अन्य प्रभार) के अत्यधिक उपयोग से वित्तीय रिपोर्टिंग की पारदर्शिता भी प्रभावित हुई है।
कुछ राहत और कैग की नसीहत
कैग रिपोर्ट में केंद्र प्रायोजित योजनाओं की ट्रैकिंग के लिए एकल नोडल एजेंसी (एसएनए) और एसएनए स्पर्श के कार्यान्वयन को एक सकारात्मक कदम बताया गया है, हालांकि इनका पूरी तरह लागू होना अभी बाकी है। कैग ने राज्य सरकार को स्पष्ट नसीहत दी है कि बढ़ते कर्ज और सीमित पूंजीगत निवेश से वित्तीय स्थिरता को खतरा है। दीर्घकालिक वित्तीय सेहत सुधारने के लिए राज्य को राजस्व बढ़ाने, खर्चों पर नियंत्रण करने और संरचनात्मक सुधार लागू करने की सख्त आवश्यकता है।
