हिमाचल में किसानों को अब खेत में बीजी फसल के हिसाब से ही मिलेगी खाद, नए निर्देश में बदल गया वितरण का फार्मूला
हिमाचल प्रदेश में किसानों को अब एग्रीस्टैक के डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर ही खाद और उर्वरक मिलेंगे, जिससे फसल के अनुसार सही वितरण सुनिश्चित होगा। यह व्य ...और पढ़ें

किसानों को खाद वितरण का फार्मूला बदल गया है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
किसानों को एग्रीस्टैक रिकॉर्ड के आधार पर खाद मिलेगी।
फसल के अनुसार उर्वरक वितरण से पारदर्शिता बढ़ेगी।
बिलासपुर, हमीरपुर में पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ।
यादवेन्द्र शर्मा, शिमला। हिमाचल प्रदेश में किसानों को खाद और उर्वरक देने की व्यवस्था अब एग्रीस्टैक के डिजिटल रिकार्ड से जोड़ी जा रही है। किसान ने एग्रीस्टैक में अपने खेत में जिस फसल की जानकारी दर्ज करवाई है, उसी के आधार पर संबंधित फसल के लिए निर्धारित खाद और उर्वरक उपलब्ध करवाए जाएंगे। कृषि विभाग ने अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। अभी तक किसान किसी भी फसल के नाम पर खाद ले सकते थे, भले ही खेत में वह फसल लगी हो या नहीं। दूसरे के नाम पर भी खाद लेने की शिकायतें सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था में ऐसा नहीं चलेगा। पात्र किसानों और बागवानों को निर्धारित मापदंड के अनुसार ही खाद और उर्वरक मिलेंगे।
बिलासपुर व हमीरपुर में शुरुआत
पायलट आधार पर यह व्यवस्था बिलासपुर और हमीरपुर में शुरू कर दी गई है और अन्य जिलों में भी इसे लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
दर्ज फसल से मिलान होगा
नई व्यवस्था में एग्रीस्टैक के रिकार्ड में दर्ज फसल का मिलान किया जाएगा। खेत में गेहूं है तो गेहूं के लिए निर्धारित उर्वरक, मक्की है तो मक्की और धान है तो धान के लिए निर्धारित खाद ही मिलेगी। इससे मनमाने ढंग से किसी भी फसल के नाम पर खाद लेने की सुविधा खत्म होगी।
कौन सी फसल कितने रकबे में
कृषि विभाग का उद्देश्य वितरण में पारदर्शिता के साथ फसल की वास्तविक जरूरत के मुताबिक उर्वरकों का इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। इससे खाद की मांग और उपलब्धता का भी वास्तविक आकलन हो सकेगा। किस क्षेत्र में कौन सी फसल कितने रकबे में लगी है, इसके आधार पर उर्वरकों की जरूरत का अनुमान लगाया जा सकेगा। इससे अनावश्यक उठान, गलत वितरण और एक किसान को जरूरत से अधिक खाद मिलने की संभावना कम होगी।
डिजिटल किसान रजिस्ट्री से जुड़ेगा पूरा रिकार्ड
एग्रीस्टैक में किसान की पहचान, भूमि और फसल संबंधी जानकारी डिजिटल रूप से जोड़ी जा रही है। हिमाचल में किसान रजिस्ट्री के माध्यम से किसान अपने भू-अभिलेख और खेत में किए गए फसल सर्वे की जानकारी देख सकता है। केंद्र सरकार भी कृषि इनपुट वितरण सहित विभिन्न किसान सेवाओं को लक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए एग्रीस्टैक का इस्तेमाल कर रही है।
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एग्रीस्टैक में उपलब्ध भूमि और फसल संबंधी रिकार्ड के आधार पर यह सुनिश्चित होगा कि किसान को जिस फसल के लिए खाद चाहिए, उसी के अनुरूप उर्वरक मिले। इससे वितरण में पारदर्शिता और संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।
-सी पाल रासु, सचिव, कृषि विभाग
किस फसल के लिए कौन सी खाद व उर्वरक कब देना है
- गेहूं को यूरिया, डीएपी/एसएसपी, एमओपी : बुआई के समय फास्फोरस-पोटाश व नाइट्रोजन की निर्धारित मात्रा; शेष नाइट्रोजन बाद में
- मक्की को यूरिया, एसएसपी, एमओपी : मुख्य मात्रा बिजाई के समय; जिंक की कमी पर बिजाई से पहले जिंक सल्फेट
- धान को यूरिया, एसएसपी, एमओपी : फास्फोरस-पोटाश व नाइट्रोजन की निर्धारित मात्रा रोपाई/बुआई के चरण में; नाइट्रोजन बाद में भी
- आलू को यूरिया, एसएसपी, एमओपी :फास्फोरस-पोटाश और आधी नाइट्रोजन बुआई के समय; बाकी पहली मिट्टी चढ़ाते समय
- टमाटर को यूरिया, सुपरफास्फेट, एमओपी या 12:32:16 : भूमि तैयार करते समय आधार खाद; शेष जरूरत के अनुसार
- बंदगोभी को यूरिया, सुपरफॉस्फेट, एमओपी या 12:32:16 : खेत तैयार करते समय आधार खाद; यूरिया की शेष मात्रा बढ़वार के दौरान
- फूलगोभी को यूरिया, सुपरफास्फेट, मिश्रित खाद, एमओपी : रोपाई से पहले आधार खाद; बाद में नाइट्रोजन जरूरत के अनुसार।
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