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हिमाचल में डेपुटेशन का खेल बंद हुआ तो कर्मचारियों को याद आई बीमारी, पसंदीदा स्टेशन के लिए मानवीय आधार का सहारा

By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 08 Oct 2026 06:28 AM (IST)Updated: Thu, 08 Oct 2026 11:05 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश में सरकारी विभागों में प्रतिनियुक्तियां समाप्त होने के बाद करीब 2500 कर्मचारी अपने पसंदीदा स्टेशनों पर बने रहने ...और पढ़ें

हिमाचल का शिमला स्थित राज्य सचिवालय परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल का शिमला स्थित राज्य सचिवालय परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. प्रतिनियुक्तियां खत्म होने पर कर्मचारी बीमारी का बहाना बना रहे।

  2. करीब 2500 कर्मचारियों की प्रतिनियुक्तियां समाप्त की गई हैं।

  3. वेतन भुगतान के लिए मूल पद पर उपस्थिति अनिवार्य होगी।

अनिल ठाकुर, शिमला। पसंद का स्टेशन छूटने लगा तो बीमारी की फाइल हाथ में आ गई। कोई अपनी बीमारी के दस्तावेज लेकर सचिवालय पहुंच रहा है, तो कोई परिवार के सदस्य के इलाज के कागज दिखाकर प्रतिनियुक्ति यानी डेपुटेशन बचाने की पैरवी कर रहा है। पिछले करीब एक सप्ताह में ऐसे मामलों में तेजी आई है। कर्मचारी और अधिकारी मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक मानवीय आधार पर मौजूदा स्टेशन पर ही सेवाएं जारी रखने की गुहार लगा रहे हैं।

हाई कोर्ट ने दिया है आदेश

दरअसल, हाई कोर्ट के आदेश की अनुपालना में कार्मिक विभाग ने 19 सितंबर को सरकारी विभागों, निगमों, बोर्डों और अन्य संस्थानों में चल रही प्रतिनियुक्तियां खत्म करने के आदेश दिए थे। 

2500 कर्मचारियों की डेपुटेशन खत्म

दूसरे विभाग या कार्यालय में प्रतिनियुक्त कर्मचारियों को मूल पद और तैनाती स्थल पर लौटना है। शिक्षा, स्वास्थ्य समेत विभिन्न विभागों में करीब 2500 कर्मचारियों की प्रतिनियुक्तियां खत्म होने के बाद वापसी शुरू हो चुकी है।

लंबे समय से शिमला या अन्य पसंदीदा स्टेशन पर तैनात कर्मचारियों की चिंता अब बढ़ गई है। सामान्य तबादलों पर प्रतिबंध और प्रतिनियुक्तियां रद करने के स्पष्ट आदेशों के बीच राहत की राह तलाशने के लिए बीमारी के दस्तावेज नया आधार बन रहे हैं।

कागज नहीं, हाजिरी का भी हिसाब

सरकार ने प्रतिनियुक्तियां खत्म करने के साथ वेतन भुगतान की व्यवस्था भी कड़ी कर दी है। डीडीओ को वेतन बिल के साथ प्रमाणित करना होगा कि कर्मचारी ने संबंधित माह में अपने मूल पद और स्टेशन पर वास्तव में सेवाएं दी हैं। केवल रिकार्ड में तैनाती पर्याप्त नहीं होगी। वास्तविक उपस्थिति और कार्यस्थल का सत्यापन जरूरी होगा। नियमों की अनदेखी कर वेतन जारी करने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।

निदेशालयों में बदल रहा समीकरण

प्रतिनियुक्तियां खत्म होने का असर सचिवालय और शिमला स्थित निदेशालयों में भी दिख रहा है। स्कूल शिक्षा निदेशालय से करीब दो दर्जन कर्मचारी मूल तैनाती पर लौट चुके हैं। अन्य निदेशालयों में भी वापसी शुरू हो गई है। इससे लंबे समय से खाली पड़े पदों पर कर्मचारी पहुंचेंगे और कार्यालयों में स्टाफ का समीकरण बदलेगा।

अब सरकार के सामने असली कसौटी यही है कि वास्तविक बीमारी और मानवीय जरूरत के मामलों में राहत कितनी दी जाए और पसंदीदा स्टेशन पर प्रतिनियुक्ति बचाने की कोशिश की सीमा कहां तय हो। यानी मामला सिर्फ बीमारी की फाइल का नहीं, नियम और मानवीय आधार के बीच संतुलन का भी है।

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