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हिमाचल के बांधों में गाद से 25 प्रतिशत तक घटा जल भंडारण, बिजली उत्पादन पर संकट; केंद्र ने मांगा एक्शन प्लान

By Parkash Bhardwaj Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 29 Aug 2026 05:51 PM (IST)Updated: Sat, 29 Aug 2026 06:07 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश के बांधों में गाद जमाव से जल भंडारण क्षमता कम होने पर केंद्र ने चिंता जताई है। राज्य ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के बांधों में जल भंडारण कम होने से बिजली संकट पैदा हो सकता है। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल प्रदेश के बांधों में जल भंडारण कम होने से बिजली संकट पैदा हो सकता है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. हिमाचल के बांधों में गाद से 25% तक जल भंडारण घटा।

  2. केंद्र ने गाद निकासी हेतु विस्तृत कार्ययोजना बनाने को कहा।

  3. बैरा जलाशय में गाद समस्या पर प्राथमिकता से काम करने पर जोर।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के प्रमुख जलाशयों (डैम) में तेजी से बढ़ रहे गाद (सिल्ट) के जमाव और घटती जल भंडारण क्षमता पर केंद्र सरकार ने चिंता जताई है। जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग की सचिव अर्चना वर्मा ने मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत को पत्र भेजकर जलाशयों से गाद निकासी के लिए मिशन मोड में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

केंद्र ने कहा है कि कई छोटे बांध और जल निकाय सूखे के मौसम में सूख जाते हैं। इनमें भारी मशीनरी के बिना भी गाद निकाली जा सकती है। ऐसे जल निकायों में डिसिल्टिंग के लिए राज्य में संचालित वीबी-जी रामजी-2026 और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को जोड़ा जा सकता है। अन्य राज्यों में इस मॉडल का सफल प्रयोग हुआ है।

भंडारण क्षमता में 25 प्रतिशत से अधिक कमी

केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश के कई जलाशयों की मूल लाइव स्टोरेज क्षमता में 25 प्रतिशत से अधिक की कमी आ चुकी है। यदि गाद का जमाव इसी गति से जारी रहा तो भविष्य में इन जलाशयों की उपयोगिता प्रभावित होगी और बाद में गाद निकालना बेहद महंगा व मुश्किल हो सकता है।

ऊर्जा व सिंचाई पर पड़ सकता है असर

भंडारण क्षमता घटने का सीधा असर पेयजल आपूर्ति, सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण पर पड़ रहा है। ऐसे में समय रहते गाद प्रबंधन नहीं किया गया तो जल सुरक्षा के साथ-साथ राज्य की ऊर्जा व्यवस्था पर भी इसका असर बढ़ सकता है।

कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

मुख्य सचिव केके पंत ने पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास तथा ऊर्जा विभाग को तत्काल  कार्ययोजना तैयार करने के निर्देशदिए हैं। केंद्र ने तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।

बैरा जलाशय पर प्राथमिकता से काम

केंद्र ने चंबा जिले के बैरा जलाशय को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है। पत्र के अनुसार गाद के कारण इसकी 25 प्रतिशत से अधिक लाइव स्टोरेज क्षमता प्रभावित हो चुकी है। जलाशय के लिए विशेष सेडिमेंट मैनेजमेंट प्लान तैयार कर लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ऐसे अन्य जलाशयों की पहचान करने को कहा गया है, जहां गाद की समस्या गंभीर हो चुकी है।

मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों और बांध प्रबंधन एजेंसियों की

केंद्र ने स्पष्ट किया है कि डैमों के रखरखाव और गाद प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों और बांध प्रबंधन एजेंसियों की है। इसके लिए नेशनल फ्रेमवर्क फार सेडिमेंट मैनेजमेंट-2022 और एसओपी पहले ही साझा की जा चुकी है।

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