हिमाचल में कभी BPL सूची में नहीं रहे 90,000 गरीब परिवारों की अब बदलेगी तकदीर, सरकार ने बनाई खास योजना
हिमाचल में 8 चरणों के सर्वे के बाद 1.78 लाख गरीब परिवारों की पहचान हुई है, जिनमें 90,000 अति गरीब परिवार ऐसे हैं जो पहले कभी BPL सूची में नहीं थे। ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव
HighLights
90,000 अति गरीब परिवारों की हुई पहचान।
इन्हें पहली बार मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ।
स्वरोजगार, बिजली, आवास, शिक्षा में मिलेगी मदद।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में आठ चरणों के सर्वे के बाद 1.78 लाख गरीब परिवारों की पहचान की गई है। इनमें 90,000 ऐसे अति गरीब परिवारों की पहचान हुई है जो आज तक कभी गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रहने वाले परिवारों की सूची में शामिल ही नहीं रहे हैं। इन्हें आज तक सरकारी योजनाओं का कोई लाभ भी नहीं मिला है। इन अति गरीब परिवारों की अब तकदीर बदलेगी।
केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से संचालित योजनाओं का लाभ सबसे पहले इन परिवारों को दिया जाएगा। इसके साथ नई योजनाओं पर काम शुरू किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना शुरू की जा रही है। इन परिवारों के लिए कई और नई कल्याणकारी योजनाओं को शुरू किया जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त कर उन्हें अति गरीब परिवारों की सूची से बाहर लाया जा सके।
परिवारों का डेटाबेस तैयार
इस सर्वे से पहली बार प्रदेश के वास्तविक जरूरतमंद परिवारों का विस्तृत डेटाबेस तैयार हुआ है। इसके आधार पर अब इन परिवारों के आर्थिक, सामाजिक और आजीविका संबंधी विकास के लिए नई योजनाएं बनाई जाएंगी, जिससे उन्हें सरकारी सहायता के साथ आत्मनिर्भर बनाए जाए।
स्वरोजगार के लिए बिना दस्तावेज लोन सहित 300 यूनिट बिजली
इसमें बिना किसी दस्तावेजों के ऋण सुविधा से स्वरोजगार सहित 300 यूनिट निश्शुल्क बिजली और जिनके पास पक्के मकान नहीं है, उन्हें मकान बनाने के लिए वित्तीय मदद प्रदान की जाएगी। इसके अलावा बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए भी सरकार नई पहल शुरू करने जा रही है, जिससे बेहतर शिक्षा प्राप्त कर अपने परिवार की तकदीर को बदल सके।
प्रदेश में आठ चरणों के तहत चयनित 1.78 लाख गरीब परिवारों में 90,000 अति गरीब परिवार ऐसे हैं जो आज तक कभी गरीबी रेखा से नीचे यानी बीपीएल परिवारों की सूची में नहीं रहे हैं। इनके आर्थिक उत्थान के लिए सरकार नई योजनाओं को शुरू करने जा रही है।
-सी पाल रासु, सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग।