'काम ही नहीं करना तो बैठकों का ढकोसला किसलिए', कंगना रनौत मंडी में अधिकारियों की कार्यशैली पर भड़कीं
सांसद कंगना रनौत ने मंडी में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों में लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने ...और पढ़ें
HighLights
कंगना ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त किया।
11 करोड़ के फंड में आधा पैसा अप्रयुक्त पड़ा है।
लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय क्षेत्र से सांसद कंगना रनौत ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों में लापरवाही को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया। मंडी में जिला मुख्यालय पर आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक में सांसद ने अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए दो टूक कहा कि जनता के विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए पूछा कि जब काम ही नहीं करना है, तो यह बैठकों का ढकोसला किसलिए किया जा रहा है?
11 करोड़ के फंड में आधा पैसा बिना इस्तेमाल किए पड़ा
बैठक के दौरान कंगना रनौत ने लंबित विकास योजनाओं और सांसद निधि के उपयोग में हो रही देरी पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि लगभग 11 करोड़ रुपये के फंड में से आधा पैसा अभी भी बिना इस्तेमाल के पड़ा हुआ है। कुछ लोग सरकारी राशि लेकर बैठ गए हैं और काम तक शुरू नहीं किया गया।
सांसद ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसे तत्वों पर दबाव बनाकर जनता के एक-एक पैसे की तुरंत रिकवरी सुनिश्चित की जाए।
दफ्तरों में बैठकर अधिकारी लापरवाह बने हुए
कंगना ने कहा, "यह बेहद शर्मनाक स्थिति है कि विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच गलत संदेश जा रहा है। सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर हमारी जग हंसाई हो रही है और दफ्तरों में बैठकर अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। मेरे कार्यालय से जाने वाले पत्रों और निर्देशों को भी गंभीरता से नहीं लिया जाता।"
...तो एक दिन में निपटा दें लंबित फाइलें
उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि यदि उन्हें एक दिन के लिए भी प्रशासनिक काम संभालने का अवसर मिले, तो वे एक ही दिन में इन लंबित फाइलों का निपटारा करके दिखा सकती हैं।
विभागों को सख्त चेतावनी
सांसद ने सभी संबंधित विभागों को सख्त चेतावनी दी कि पिछले कार्यों का बैकलॉग अविलंब समाप्त किया जाए और आगामी विकास परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए, अन्यथा लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ उच्चस्तर पर सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
