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हिमाचल: परिवार नियोजन ऑपरेशन में लापरवाही से महिला की मौत, कोर्ट का 24.60 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Updated: Sun, 18 Jan 2026 01:12 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में परिवार नियोजन ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही से एक महिला की मौत हो गई। सरकाघाट सिविल जज कोर्ट ने इस मामले में अहम ...और पढ़ें

परिवार नियोजन ऑपरेशन के दौरान लापरवाही से महिला की मौत हो गई। प्रतीकात्मक फोटो

परिवार नियोजन ऑपरेशन के दौरान लापरवाही से महिला की मौत हो गई। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. परिवार नियोजन ऑपरेशन में चिकित्सकीय लापरवाही से महिला की मौत।

  2. कोर्ट ने 24.60 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

  3. आंतरिक रक्तस्राव और उचित उपचार न मिलना मृत्यु का कारण।

जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी में परिवार नियोजन ऑपरेशन के दौरान की गई चिकित्सकीय लापरवाही से महिला की मौत हो गई। इस मामले में सिविल जज कोर्ट दो सरकाघाट ने अहम फैसला सुनाया है। न्यायालय ने प्रदेश सरकार और संबंधित चिकित्सक को मृतका के पति व बच्चों को 24.60 लाख रुपये मुआवजा छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं।

सरकार द्वारा दी गई दो लाख रुपये की राशि को मुआवजे में समायोजित किया जाएगा। मामला विनोद कुमार निवासी गांव बगफल तहसील सरकाघाट से जुड़ा है।

विनोद कुमार ने नाबालिग बच्चों के साथ सरकार व चिकित्सक के खिलाफ 30 लाख रुपये हर्जाने की मांग को लेकर सिविल वाद दायर किया था। वाद में कहा गया कि 10 फरवरी 2014 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नग्गर (जिला कुल्लू) में परिवार नियोजन शिविर में उनकी पत्नी नीलम कुमारी की लैप्रोस्कोपिक ट्यूबेक्टामी की गई थी

कुछ देर में ही बिगड़ गई थी हालात

आपरेशन के कुछ ही मिनटों बाद उसकी हालत बिगड़ गई, लेकिन समय रहते सही उपचार और जांच नहीं की गई। बाद में उसे कुल्लू अस्पताल और फिर पीजीआइ चंडीगढ़ रेफर किया गया जहां 11 फरवरी 2014 को उसकी मौत हो गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट 

न्यायालय ने फैसले में कहा कि लैप्रोस्कोपिक स्टरलाइजेशन एक मान्य प्रक्रिया है और इसमें जटिलताएं संभव हैं, लेकिन इस मामले में गंभीर लापरवाही सामने आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार महिला की मौत आंतरिक रक्तस्राव (हेमरेजिक शाक) से हुई जो मेसोकोलन की रक्त वाहिकाओं में चोट लगने से हुआ। 

अनीमिया से पीड़ित थी महिला, फिर भी नहीं की रक्त की व्यवस्था

न्यायालय ने माना कि आपरेशन के बाद महिला में शाक के स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगे थे, इसके बावजूद आंतरिक रक्तस्राव का समय पर निदान नहीं किया गया और न ही उचित उपचार जैसे रक्त चढ़ाना, अल्ट्रासाउंड या सर्जिकल हस्तक्षेप किया गया। महिला पहले से अनीमिया से पीड़ित थी इसके बावजूद आपरेशन से पहले रक्त की व्यवस्था नहीं की गई। मरीज से केवल सामान्य परिवार नियोजन की सहमति ली गई, लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया और उससे जुड़े जोखिमों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिससे सूचित सहमति का अभाव रहा।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने चिकित्सक अनु शर्मा की आपरेशन पश्चात लापरवाही को मृत्यु का प्रमुख कारण मानते हुए वाद आंशिक रूप से स्वीकार किया और सरकार व चिकित्सक को संयुक्त रूप से मुआवजा देने का आदेश दिया।

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