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कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर हणोगी टनल में लगेगी आधुनिक निगरानी तकनीक, भूगर्भीय हलचल और दरारों का पता चलेगा

By Hansraj Saini Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 28 Oct 2026 06:29 AM (IST)Updated: Wed, 28 Oct 2026 11:11 AM (IST)

कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर हणोगी सुरंगों में यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए आधुनिक निगरानी तकनीक स्थापित की जा रही है।

मनाली हाईवे पर हणोगी टनल में सुरक्षा तंत्र मजबूत होगा।

मनाली हाईवे पर हणोगी टनल में सुरक्षा तंत्र मजबूत होगा।

HighLights

  1. हणोगी सुरंगों में आधुनिक निगरानी तकनीक होगी स्थापित।

  2. भूगर्भीय हलचल और दरारों की मिलेगी लाइव जानकारी।

  3. यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मिलेगी मदद।

जागरण संवाददाता, मंडी। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सफर को सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) हणोगी की सुरंगों में आधुनिक निगरानी तकनीक लगाने जा रहा है। मंडी जिले में स्थित इन सुरंगों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए मल्टीप्वाइंट बोरहोल एक्सटेंसोमीटर (एमबीबीएक्स) इन्क्लाइनोमीटर, बाइ रिफ्लेक्स टारगेट और ग्लास स्ट्रिप क्रैक प्रोग्रेस तकनीक का इस्तेमाल होगा। इससे सुरंगों के भीतर भूगर्भीय हलचल और दरारों की स्थिति की लाइव जानकारी मिल सकेगी।

एनएचएआई सलाहकार ने किया निरीक्षण

एनएचएआई के सलाहकार और वरिष्ठ भूविज्ञानी अक्षय आचार्य ने हाल ही में हणोगी क्षेत्र की सुरंगों का निरीक्षण किया। उन्होंने पहाड़ी की भौगोलिक स्थिति और सुरंगों की आंतरिक सुरक्षा का जायजा लिया। क्षेत्र की भूगर्भीय संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने दरारों के विस्तार और हलचल पर नजर रखने वाले आधुनिक उपकरण जल्द स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।

क्या है यह तकनीक?

  • एमबीबीएक्स तकनीक भूमि के भीतर या सुरंग की दीवारों के पीछे चट्टान और मिट्टी के खिसकाव को मापती है। इससे अंदरूनी स्तर पर संरचना पर बढ़ रहे दबाव का पता चलता है। 
  • इन्क्लाइनोमीटर पहाड़ी ढलान या संरचना के झुकाव और पार्श्व विस्थापन को मापता है। इससे भूस्खलन या सुरंग के तिरछे होने के खतरे का समय रहते आकलन किया जा सकता है।
  • बाइ रिफ्लेक्स टारगेट आप्टिकल सर्वे उपकरण है। टोटल स्टेशन की मदद से यह सुरंग की दीवारों और छतों में मिलीमीटर स्तर तक के खिसकाव की दूरी मापता है। 
  • ग्लास स्ट्रिप फार क्रैक प्रोग्रेशन में दरार के आर-पार कांच की पट्टी लगाई जाती है। दरार चौड़ी होने पर पट्टी चटक जाती है, जिससे दरार के फैलने की गति का अनुमान मिलता है।

क्या कहते हैं अधिकारी

वरिष्ठ भूविज्ञानी अक्षय आचार्य के दिशा-निर्देशों के अनुसार यह तकनीक जल्द सुरंगों में स्थापित की जाएगी। इनसे हलचल पर लगातार नजर रखकर संभावित खतरे से समय रहते निपटने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
-दिगव्रत सिंह, उपप्रबंधक, एनएचएआई, मंडी।

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