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    'आदित्य... तू लौटकर फिर चला जाएगा', ओमान से बेटे की पार्थिव देह पहुंचने पर छलका पिता का दर्द

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Thu, 18 Jun 2026 12:36 PM (IST)

    ओमान तट के पास मिसाइल हमले में मारे गए हमीरपुर के आदित्य शर्मा का पार्थिव शरीर 8 दिन बाद भारत पहुंचा। बेटे की अंतिम विदाई देख पिता राजेश कुमार शर्मा क ...और पढ़ें

    आदित्य का फाइल फोटो और उदास होकर बैठे पिता राजेश।

    आदित्य का फाइल फोटो और उदास होकर बैठे पिता राजेश।

    HighLights

    1. ओमान में मिसाइल हमले में हमीरपुर के आदित्य शर्मा की मौत।

    2. आठ दिन बाद पैतृक गांव पहुंचा आदित्य शर्मा का पार्थिव शरीर।

    3. बेटे की मौत से पिता राजेश कुमार शर्मा का दर्द छलका।

    अशोक कुमार शर्मा, गलोड़ (हमीरपुर)। ‘सात समंदर पार से तेरे जाने की खबर आई। अब तू लौटकर फिर चला जाएगा।’ यह बात कहते हुए आदित्य शर्मा के पिता राजेश कुमार शर्मा की आंखों से आंसुओं का सैलाब आ गया। जवान बेटे की मौत से टूटे पिता दर्द बयान करते ही फफक-फफक कर रो पड़े। वह कहने लगे सपने तो इकलौते बेटे की घर से बरात निकलने के देखे थे। आंखें उसकी अंतिम विदाई का सच देखने को बिल्कुल भी तैयार नहीं।

    मिसाइल हमले का शिकार हुआ आदित्य

    उल्लेखनीय है कि ओमान के तट के पास जहाज पर पिछले सप्ताह अमेरिकी मिसाइल हमले में हमीरपुर जिले की हड़ेटा पंचायत के भालू गांव के 23 वर्षीय आदित्य शर्मा समेत तीन भारतीयों की मौत हो गई थी। 

    8 दिन बाद अंतिम संस्कार

    लंबे इंतजार के बाद उसकी पार्थिव देह करीब एक सप्ताह बाद बुधवार सुबह भारत पहुंची। दिल्ली से पार्थिव देह को कनेक्टिंग फ्लाइट के माध्यम से चंडीगढ़ पहुंचाया गया। वहां से शिपिंग कंपनी की ओर से उपलब्ध करवाई गई एंबुलेंस के माध्यम से डा. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल पहुंचाया गया। 

    यहां आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पार्थिव देह स्वजन को सौंपी गई। इसके बाद आदित्य का अंतिम संस्कार पैतृक गांव में किया जाएगा।

    खुद को संभालना मुश्किल हुआ

    पिता राजेश ने रुंधे गले से बताया कि खुद को, पत्नी सुषमा देवी और बूढ़ी मां शकुंतला देवी को संभालना मुश्किल हो गया है। जिस बेटे के सिर पर सेहरा सजाने और घर में खुशियों की शहनाई गूंजने के सपने हमने संजोए थे, आज उसी की अंतिम यात्रा की तैयारी हो रही है। 

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    बचपन से अलग करने का था सपना

    वह बताते हैं कि आदित्य बचपन से ही कुछ अलग करने का सपना देखता था। परिवार ने उसकी हर छोटी-बड़ी इच्छा पूरी की और बड़े लाड़-प्यार से उसका पालन-पोषण किया। वह घर बनाने और परिवार को बेहतर जीवन देने के सपने देख रहा था। वह चाहते थे कि बेट जल्द घर बसाए और घर में खुशियां आएं लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था।

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