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    चंबा बस हादसा: पत्नी का संस्कार कर घायल बेटियों से मिलने अस्पताल पहुंचे मोती सिंह, बच्ची बोली- मां क्यों नहीं आई?

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Mon, 10 Aug 2026 12:47 PM (GMT+05:30)

    चंबा बस हादसे में पत्नी नीलमा को खोने के बाद मोती सिंह अपनी घायल बेटियों से मिलने अस्पताल पहुंचे। बेटियां अभी भी मां का इंतजार कर रही हैं, जिससे मोती ...और पढ़ें

    चंबा अस्पताल में उपचाराधीन मोती सिंह की बेटी। जागरण

    चंबा अस्पताल में उपचाराधीन मोती सिंह की बेटी। जागरण

    HighLights

    1. चंबा बस हादसे में नीलमा की मौत, चार बेटियां अस्पताल में।

    2. मोती सिंह ने पत्नी का अंतिम संस्कार कर बेटियों से मुलाकात की।

    3. घायल बेटियां अभी भी मां के लौटने का इंतजार कर रही हैं।

    मान सिंह वर्मा, चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला में बैरागढ़-तीसा मार्ग पर शनिवार को हुए बस हादसे ने मोती सिंह निवासी देवीकोठी के परिवार को गहरे जख्म दिए हैं। पत्नी नीलमा की हादसे में मौत के बाद चार छोटी अबोध बेटियां चंबा अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इन अबोध बालिकाओं को अब भी उम्मीद है कि मां आएगी और गले लगाएंगी। पत्नी के अंतिम संस्कार के बाद रविवार को चंबा अस्पताल पहुंचे मोती सिंह ने जैसे ही बेटियों को देखा तो उसकी आंखें भर आईं।

    अस्पताल में भर्ती बेटियों की तरफ देख और पत्नी के चलते जाने के दर्द को सीने में दबाए मोती राम के आंखों के आंसू नहीं रुक रहे थे। सबसे छोटी बच्ची प्रियंका मां के न आने की बात पूछती तो मोती सिंह कुछ नहीं बोल पाए।

    बेटियों को एहसास दिलाना मुश्किल कि मां नहीं रही

    बेटियों को गले से लगाकर प्यार और दुलार देने के बाद पिता दर्द छिपाए पत्नी के अंतिम संस्कार के बाद होने वाले कार्यों के चलते वापस घर लौट गए। इन मासूम बेटियों को यह एहसास दिलाना मुश्किल और पीड़ादायक है कि अब उनकी मां कभी उन्हें गले से नहीं लगा पाएंगी।

    पांगी में लगी हादसे की खबर

    हादसे के समय मोती सिंह पांगी में मजदूरी कर रहा था। शनिवार को जब गांव के लोगों ने फोन कर घर बुलाया तो वह परेशानी में पड़ गया। पांगी मुख्यालय किलाड़ पहुंचकर जब इंटरनेट आन कर देखा तो बस दुर्घटना का पता चला। उसके बाद पत्नी की भी मौत की खबर मिल गई। यह सुनकर मोती सिंह टूट गया।

    गांव वालों से पूछा सच बता दें, मैं भी चंद्रभागा में कूद जाऊंगा

    बाद में सगे संबंधियों व गांव के लोगों को फोन कर पूछा कि उन्हें सच बता दें, अगर उनका परिवार यानी पत्नी के अलावा बेटियां भी नहीं हैं, तो उन्हें बता दें। जब परिवार ही नहीं रहा तो मेरा भी जीने का कोई फायदा नहीं है। मैं भी चंद्रभागा में कूदकर जान दे दूंगा।

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    लोगों के समझाने पर घर पहुंच किया पत्नी का संस्कार

    लोगों ने उन्हें समझाया कि ऐसा नहीं है, आप घर आएं सब ठीक है। इसके बाद मोती शाम को घर पहुंचे और पत्नी को मुखाग्नि दी। रविवार को उपचाराधीन बेटियों से मिलने चंबा अस्पताल आए थे, लेकिन मजबूरी में बेटियों को किसी ओर के सहारे छोड़कर फिर वापस घर लौट गए।

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