चंबा बस हादसे में घायल UP की यूट्यूबर सुष्मिता को वन कर्मी ने दिया संबल, 130 KM दूर टांडा अस्पताल पहुंचाया
चंबा बस हादसे में घायल अयोध्या की यूट्यूबर सुष्मिता को वन विभाग के चौकीदार कर्म सिंह ने 130 किमी दूर टांडा अस्पताल पहुंचाया, जब उसके साथ कोई परिजन नही ...और पढ़ें

घायल सुष्मिता और कर्म सिंह। जागरण
HighLights
वनकर्मी कर्म सिंह ने बस हादसे के घायलों को बचाया।
घायल सुष्मिता को 130 किमी दूर टांडा अस्पताल पहुंचाया।
अनजान सुष्मिता का सहारा बनकर इंसानियत की मिसाल पेश की।
जागरण संवाददाता, चंबा। कभी-कभी मुश्किल की घड़ी में अनजान व्यक्ति ही सबसे बड़ा सहारा बन जाता है। हिमाचल में चंबा के चलूंज मोड़ में हुए दर्दनाक बस हादसे के बाद मानवता की ऐसी ही मिसाल सामने आई है। हादसे में घायल उत्तर प्रदेश की अयोध्या निवासी 32 वर्षीय सुष्मिता के साथ जब कोई अपना नहीं था, तब वन विभाग में तैनात चौकीदार कर्म सिंह ने उसका सहारा बनकर इंसानियत की मिसाल पेश की। न कोई रिश्ता, न पहचान, फिर भी कर्म सिंह ने सुष्मिता को अकेला नहीं छोड़ा।
यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं सुष्मिता
सुष्मिता एक यूट्यूबर हैं और संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी भी कर रही हैं। वह करीब 20 दिन से तीसा के बैरागढ़ में रह रही थीं। शनिवार को वह भी उसी बस में सवार थीं, जो चलूंज मोड़ के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
सुष्मिता को टांडा किया रेफर
बस हादसे में गंभीर रूप से घायल सुष्मिता को चंबा मेडिकल कालेज से कांगड़ा के टांडा स्थित मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। चंबा से कांगड़ा की दूरी लगभग 130 किलोमीटर है।
घटनास्थल से डेढ़ किलोमीटर दूर काम कर रहे थे कर्म सिंह
हादसे के समय कर्म सिंह और दैनिक वेतनभोगी ओम प्रकाश घटनास्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर वन विभाग की नर्सरी में काम कर रहे थे। गांव के एक व्यक्ति ने फोन कर बस हादसे की सूचना दी तो दोनों तुरंत मौके पर पहुंच गए। वहां बस पलटी हुई थी और उसके भीतर से घायलों की चीखें निकल रही थीं।
घायलों को रेस्क्यू किया
हालात इतने भयावह थे कि किसी को समझ नहीं आ रहा था कि घायलों को बाहर कैसे निकाला जाए। दोनों ने हिम्मत दिखाई और बस के भीतर जाने का रास्ता बनाया। इसके बाद उन्होंने पांच घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। कर्म सिंह ने वहां उपलब्ध दूसरे वाहन की मदद से घायलों को तीसा अस्पताल पहुंचाया। वहां से गंभीर घायलों को मेडिकल कालेज चंबा रेफर किया गया।
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घायल सुष्मिता को दिया संबल
जब सुष्मिता को टांडा रेफर किया गया तो उसके साथ कोई परिजन नहीं था। ऐसे में कर्म सिंह ने उसके साथ टांडा जाने का फैसला किया। कर्म सिंह ने यह साबित किया कि इंसानियत के लिए किसी रिश्ते या पहचान की जरूरत नहीं होती।