रेवाड़ी: कागजों में सिमटा वर्षा जल संचयन, औद्योगिक क्षेत्र में धरातल पर इंतजाम नाकाम
रेवाड़ी के बावल और धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन प्रणालियाँ निष्क्रिय पड़ी हैं या उनकी देखरेख नहीं हो रही, जिससे भूजल स्तर गिर रहा ह ...और पढ़ें

कागजों में सिमटा वर्षा जल संचयन। (AI Generated Image)
HighLights
बावल-धारूहेड़ा में वर्षा जल संचयन सिस्टम निष्क्रिय पड़े हैं।
रखरखाव के अभाव में हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा।
भूजल स्तर गिर रहा, औद्योगिक क्षेत्र को जल संकट।
जागरण संवाददाता, रेवाड़ी। जिले के बावल व धारूहेड़ा के औद्योगिक क्षेत्र में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) के दावों की पड़ताल की गई तो हकीकत काफी निराशाजनक सामने आई। करोड़ों के निवेश वाले इस औद्योगिक हब में जल संरक्षण के लिए बनाए गए सिस्टम या तो बंद पड़े हैं या उनकी नियमित देखरेख नहीं हो रही।
नतीजतन, हर वर्षा के साथ हजारों लीटर पानी यूं ही बहकर बर्बाद हो जाता है। हालांकि औद्योगिक इकाइयों में वर्षा के जल को संचयन करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। औद्योगिक इकाइयों में नियमों के तहत वर्षा जल संचयन सिस्टम लगाना अनिवार्य है, लेकिन कई फैक्ट्रियों में ये केवल कागजों तक सीमित है। कुछ जगहों पर टैंक और पाइपलाइन तो बनी हुई है, लेकिन उनमें गंदगी भरी हुई है या वे पूरी तरह जाम है। कई उद्योग संचालकों ने स्वीकार किया कि सिस्टम तो लगाए गए थे, लेकिन समय के साथ उनकी सफाई और रखरखाव नहीं हो पाया।
लगातार बढ़ रही पानी की मांग
जानकारों के अनुसार, अगर इन क्षेत्रों में सही तरीके से वर्षा जल संचयन लागू किया जाए तो भूजल स्तर में गिरावट को काफी हद तक रोका जा सकता है। बावल और धारूहेड़ा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि भूजल स्तर हर साल नीचे जा रहा है। ऐसे में वर्षा जल का संरक्षण बेहद जरूरी हो जाता है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि प्रशासन को केवल नियम बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनकी सख्ती से पालना भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
कई बार संबंधित विभागों को शिकायतें दी गईं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है और नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों को नोटिस भी जारी किए जाते हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर इन दावों का असर कम ही नजर आता है। यदि समय रहते वर्षा जल संचयन के इन सिस्टमों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो आने वाले समय में औद्योगिक क्षेत्र को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।