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    रेवाड़ी में बेसहारा गोवंशी पकड़ने के लिए टेंडर जारी, एक साल में 34 लाख खर्च होंगे

    Updated: Wed, 04 Mar 2026 11:53 PM (GMT+05:30)

    रेवाड़ी नगर परिषद ने बेसहारा गोवंशी पकड़ने के लिए 34 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है। यह प्रक्रिया एक सप्ताह में पूरी होगी। पिछले साल 1700 गोवंशी पकड़ ...और पढ़ें

    गोवंशी को पकड़ने के लिए मंगलवार को नगर परिषद ने टेंडर जारी कर दिया।

     गोवंशी को पकड़ने के लिए मंगलवार को नगर परिषद ने टेंडर जारी कर दिया।

    HighLights

    1. नगर परिषद ने बेसहारा गोवंशी पकड़ने का टेंडर जारी किया।

    2. एक साल में 34 लाख रुपये खर्च होंगे इस अभियान पर।

    3. गौशालाओं की क्षमता और पशुपालकों की लापरवाही बड़ी चुनौती।

    जागरण संवाददाता, रेवाड़ी। शहर में घूमने वाले बेसहारा गोवंशी को पकड़ने के लिए मंगलवार को नगर परिषद ने टेंडर जारी कर दिया है। एक साल में गोवंशी पकड़ने पर करीब 34 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। नप अधिकारियों के मुताबिक, एक सप्ताह में टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद टेंडर लेनी वाली फर्म से काम भी शुरू करा दिया जाएगा।

    बता दें कि छह जनवरी को टेंडर खत्म होने के बाद दोबारा से टेंडर नहीं लगाया गया था, जिसकी वजह से गोवंशी पकड़ने का काम ठप पड़ा हुआ था। एक साल में फर्म ने करीब 1700 गोवंशी पकड़ने का दावा किया था। हालांकि उसके बावजूद शहर की सड़कों पर अभी बेसहारा गोवंशी विचरण कर रहे हैं।

    दरअसल, शहर में बेसहारा गोवंशी की समस्या सबसे बड़ी है। साल दर साल यह समस्या और भी बढ़ रही है। लेकिन गोवंशी को पकड़ने का टेंडर तो हर साल होता रहा लेकिन न तो गोवंशी की संख्या कम हुई और न ही बेसहारा गोवंशी द्वारा लोगों पर किए जाने वाले हमले कम हुए। आए दिन शहर में किसी न किसी मोहल्ले में गोवंशी के हमले से लोगों के घायल होने के केस आते रहे हैं।

    हर साल गोवंशी पकड़ने का लक्ष्य एक जैसा ही रहा

    हर साल गोवंशी की संख्या बढ़ने का एक मुख्य कारण यह भी है कि लक्ष्य हमेशा एक जैसा ही रहा है। औसतन हर साल की बात करें तो 1300 के आसपास गोवंशी पकड़े जाते हैं। साल 2021 में 1300 गोवंशी पकड़े गए थे। उसके बाद वर्ष 2022, 2023, 2024 में कुछ सुधार के साथ प्रत्येक वर्ष करीब 1500 गोवंशी पकड़े गए। हालांकि पिछले साल 2025 में 1700 से ज्यादा गोवंशी पकड़े जाने का दावा किया गया।

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    नगर परिषद इस बार भी लक्ष्य बढ़ाने पर जोर दे रहा है। दूसरी सबसे बड़ी चुनौती ये रहती है कि गौशालाएं फुल हो जाती हैं। ऐसे में समस्या काफी बढ़ जाती है। इस बार भी यही समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिली थी। ऐसे में नगर परिषद को गौशालाओं में गोवंशी को छोड़ने के लिए पहले ही पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी।

    29 पालक चिन्हित, कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं

    वर्ष 2025 में तमाम कोशिशों के बावजूद गोवंशी की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई तो इस समस्या की जड़ तक जाने की कोशिश की गई। नगर परिषद के अधिकारियों को पता चला कि शहर में 29 पालक जानबूझकर पशुओं को छोड़ देते हैं। जांच में ऐसे 29 पशुपालक चिह्नित किए गए, जिनके कारण सड़कों पर पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसा पहली बार हुआ था जब नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी ने पशुपालकों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए बकायदा एसपी को पत्र भी लिखा। लेकिन छह माह बीते जाने के बाद भी कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ।

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