भिवाड़ी में पटाखा फैक्ट्री में 7 श्रमिकों के जिंदा जलने पर टूटी लापरवाहों की नींद, अवैध फैक्ट्रियों की होगी जांच
भिवाड़ी-खुशखेड़ा में अवैध पटाखा फैक्ट्री में 7 श्रमिकों की मौत के बाद प्रशासन जागा है। क्षेत्र में 100 से अधिक अवैध फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जि ...और पढ़ें

हादसे के बाद मदद करते स्वास्थ्यकर्मी। जागरण

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, भिवाड़ी। राजस्थान के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी-खुशखेड़ा में तकरीबन दो हजार से ज्यादा छोटी और बड़ी फैक्ट्रियां हैं। मगर इनकी आड़ में 100 से ज्यादा फैक्ट्रियां अवैध तरीके से संचालित हो रही हैं। इन फैक्ट्रियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी वैसे तो अलग-अलग विभागों की है, लेकिन सबसे अहम रोल रीको का होता है। हालांकि, संबंधित विभाग के पास वर्तमान में किसी भी फैक्ट्री के बारे पूरी जानकारी नहीं है।
पटाखा फैक्ट्री में सात श्रमिकों के जिंदा जले
इसके जरिये फैक्ट्रियों के लिए प्लाॅट आवंटित होते हैं। उत्पादन के निर्माण के लिए बकायदा अलग-अलग जोन भी बनाए गए हैं, लेकिन जिम्मेदार यह तक पता करने की कोशिश नहीं करते कि जिस जोन के लिए प्लाॅट आवंटित है, वहां क्या उत्पादन हो रहा है, कितने श्रमिक कार्यरत और आवश्यक पंजीयन कराया या नहीं जैसे बुनियादी सवालों के स्पष्ट जवाब तक संबंधित विभागों के पास नहीं मिले। इसका पर्दाफाश अवैध रूप से चल रही पटाखा फैक्ट्री में सात श्रमिकों के जिंदा जलने के बाद हुआ है।
डीएम और मंत्री के बयान में विरोधाभास
घटनास्थल पर पहुंचीं जिला कलेक्टर डाॅ. अर्तिका शुक्ला ने बताया कि इकाई में 20 से कम श्रमिक कार्यरत होने के आधार पर इसका पंजीयन फैक्ट्री एंड बाॅयलर्स विभाग में नहीं कराया गया था। वहीं, प्रदेश के वन मंत्री संजय शर्मा ने बताया कि घटना के वक्त फैक्ट्री में 20 से ज्यादा श्रमिक थे। ऐसे में कलक्टर के बयान से ही विरोधाभास हो रहा है।
सात दिन में सभी फैक्ट्रियों की होगी जांच
इस घटना के बाद सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों की नींद जरूर टूटी है। जिला कलेक्टर डा. अर्तिका शुक्ला ने आगामी सात दिनों में खुशखेड़ा सहित क्षेत्र की सभी औद्योगिक इकाइयों की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। इस दौरान संचालित गतिविधियों, अग्नि सुरक्षा उपायों, वैधानिक अनुमतियों और श्रमिक सुरक्षा मानकों की गहन समीक्षा की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
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दो साल पहले भी चार श्रमिकों की मौत हो चुकी
खुशखेड़ा के औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्री में आग लगने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले मई 2024 में वर्तिका नाम की फैक्ट्री में आग लग गई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। इस फैक्ट्री में भी अवैध तरीके से उत्पादन हो रहा था। हादसे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से कार्रवाई के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए गए लेकिन समय के साथ कार्रवाई की यह फाइलें भी नीचे दबती चली गई।
फैक्ट्रियों की किसी भी तरह से निगरानी नहीं होती
अभी तीन माह पहले ही भिवाड़ी के अंदर अवैध रूप से चल रही ड्रग फैक्ट्री पकड़ी गई थी. जिसके जरिये देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक नशे की दवाई की सप्लाई हो रही थी। भिवाड़ी पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी और गुजरात एसटीएफ ने आकर इसका पर्दाफाश कर दिया। यह घटना भी दर्शाती है कि भिवाड़ी में चल रही फैक्ट्रियों की किसी भी तरह से निगरानी नहीं होती।
"फैक्ट्री राजेंद्र कुमार के नाम से रेडीमेड गारमेंट बनाने के काम से रजिस्टर्ड की गई थी। अभी तक कंपनी में क्या बन रहा था, इसकी जानकारी नहीं मिली है। रीको की ओर से एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। फाेरेंसिक टीम ने फैक्ट्री से हड्डियों, जले हुए पटाखों के नमूने लिए हैं।"
-डाॅ. अर्तिका शुक्ला, कलेक्टर, खैरथल-तिजारा।
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