यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 09, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मानव का शत्रु है मन : राधे राधे
जागरण संवाददाता, पानीपत : मन ही मानव का सबसे बड़ा शत्रु है। मीठा शत्रु इसे कहा जाता है, जो मनुष्य के ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, पानीपत : मन ही मानव का सबसे बड़ा शत्रु है। मीठा शत्रु इसे कहा जाता है, जो मनुष्य के शरीर में रह कर आस्था का विनाश कर देता है। यह बात अवध धाम मंदिर में बृहस्पतिवार को श्रीमद्भागवत कथा सुनाते हुए पंडित राधे राधे ने कही।
उन्होंने कहा कि संसार से वैराग्य और भगवान से अनुराग..ये दोनों क्रियाएं मन को करनी होती है। वास्तव में मन ही करता है। यह बात सत्य है। वेद शास्त्रों के प्रमाण से बताया गया कि बंधन और मोक्ष का कारण केवल मन है। मन माया का पुत्र और जीव भगवान का पुत्र है। दोनों एक दूसरे के विरोधी हैं। भगवान प्रकाश स्वरूप हैं जबकि माया अंधकार स्वरूप है। उन्होंने कहा कि मन जीवात्मा के अंदर रहता है। इसलिए वह जीव आत्मा को भ्रमित करता है। अंधकार की ओर ले जाता है। मन से नहीं प्रभु भक्ति पर आश्रित होकर जीवन यापन करना चाहिए। पंडित दाऊजी के सानिध्य में कथा में विरेंद्र गुप्ता ने व्यासपीठ का पूजन किया। इस मौके पर डॉ. अरविंद शर्मा को सम्मानित किया गया।