हरियाणा में ग्रुप-डी कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता साफ, नायब सरकार ने पदोन्नति की दी मंजूरी
हरियाणा में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लिपिक पदों पर पदोन्नति के लिए SETC पार्ट-1 परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिल गई है, जिससे उनका रास्ता साफ ...और पढ़ें
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हरियाणा में ग्रुप-डी कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता साफ। फाइल फोटो
HighLights
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लिपिक पदों पर पदोन्नति की अनुमति मिली।
SETC पार्ट-1 परीक्षा उत्तीर्ण करना पदोन्नति के लिए अनिवार्य।
चंडीगढ़ में रूफटॉप सोलर फॉर्म जमा करने की समय-सीमा बढ़ी।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की लिपिक पद पर पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है। प्रदेश सरकार ने सभी पात्र कामन काडर ग्रुप-डी कर्मचारियों को ‘कंप्यूटर की समझ और अनुप्रयोग में राज्य पात्रता परीक्षा (एसईटीसी) पार्ट-1’ में शामिल होने की अनुमति दी है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी निर्देश के अनुसार हरियाणा लिपिकीय (भर्ती एवं सेवा शर्तें) अधिनियम-2026 के तहत क्लर्क पद पर पदोन्नति के लिए एसईटीसी पार्ट-1 परीक्षा उत्तीर्ण करने को आवश्यक किया गया है।
सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि एसईटीसी पार्ट-1 परीक्षा में शामिल होने वाले पात्र कामन काडर ग्रुप-डी कर्मचारियों के आवेदन पत्रों और ई-प्रवेश पत्रों का सत्यापन एवं प्रमाणीकरण सुनिश्चित किया जाए। पात्र कर्मचारियों को परीक्षा में शामिल होने में किसी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए।
31 तक रूफटाप सोलर अंडरटेकिंग फार्म जमा कर सकेंगे कर्मचारी
चंडीगढ़ प्रशासन ने सरकारी मकानों में रहने वाले कर्मचारियों के लिए रूफटाप सोलर ऊर्जा प्रणाली के उपयोग से संबंधित विकल्प/अंडरटेकिंग फार्म देने की समय-सीमा 31 अगस्त तक बढ़ा दी है।
हाउस अलाटमेंट कमेटी ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में किसी कर्मचारी का अंडरटेकिंग फार्म प्राप्त नहीं होता है, तो यह मान लिया जाएगा कि उसने रूफटाप सोलर ऊर्जा सुविधा के उपयोग के लिए अपनी सहमति प्रदान नहीं की है। जो कर्मचारी सोलर ऊर्जा का उपयोग करने का विकल्प चुनेंगे, उन्हें निर्धारित सोलर उपयोगकर्ता शुल्क का भुगतान करना होगा तथा सोलर संयंत्र के रखरखाव के लिए अधिकृत कर्मियों को परिसर में प्रवेश की अनुमति देनी होगी।
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जो कर्मचारी इस सुविधा का उपयोग नहीं करना चाहते, उनके मामले में रूफटाप सोलर संयंत्र से बनने वाली बिजली को प्रचलित नियमों के अनुसार ग्रास मीटरिंग प्रणाली के माध्यम से विद्युत वितरण लाइसेंस धारी को हस्तांतरित किया जाएगा।